लेफ्टिनेंट जनरल मोहित वाधवा ने सैन्य अभियानों में रसद की अहम भूमिका पर जोर दिया। 101 एरिया के जनरल ऑफिसर कमांडिंग वाधवा ने मिलिट में अधिकारियों को ‘कम्युनिकेशन ज़ोन में ऑपरेशनल और लॉजिस्टिक्स डायनामिक्स’ विषय पर व्याख्यान दिया। इसमें डिफेंस सर्विसेज टेक्निकल स्टाफ कोर्स (डीएसटीएससी-09) और अन्य पाठ्यक्रमों के अधिकारी शामिल हुए।
उन्होंने आधुनिक युद्ध के बदलते स्वरूप और भारत की रणनीतिक रूप से संवेदनशील उत्तरी सीमाओं पर सैन्य अभियानों को जारी रखने में रसद के महत्व पर बात की। उनके मुताबिक, चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में अभियान की तैयारी बनाए रखने, लड़ाकू क्षमता कायम रखने और मिशनों को सफलतापूर्वक पूरा करने के लिए प्रभावी रसद सहायता जरूरी है।
वाधवा ने कहा कि लंबे समय तक चलने वाले संघर्षों से आपूर्ति शृंखला, परिवहन नेटवर्क और उपकरणों के रखरखाव पर दबाव बढ़ता है। ऐसे अभियानों के लिए जरूरी संसाधनों की लगातार उपलब्धता भी एक बड़ी चुनौती होती है। दुश्मन की कार्रवाई, भौगोलिक बाधाओं और अलग-अलग अभियानों की मांग के कारण रसद नेटवर्क बाधित हो सकते हैं।
उन्होंने रसद योजना, आपूर्ति शृंखला प्रबंधन और अभियान सहायता प्रणालियों में आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल पर भी जोर दिया। उनके अनुसार, इससे सैन्य अभियानों के दौरान कामकाज की दक्षता, प्रतिक्रिया क्षमता और व्यवस्था की मजबूती बेहतर हो सकती है।

व्याख्यान में नागरिक-सैन्य सहयोग का मुद्दा भी शामिल था। वाधवा ने राष्ट्रीय रक्षा जरूरतों के लिए सैन्य संगठनों, नागरिक संस्थानों, उद्योगों और बुनियादी ढांचे के बीच बेहतर तालमेल की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि भविष्य के बड़े अभियानों को सहारा देने के लिए सशस्त्र बलों, सरकारी एजेंसियों, उद्योग और देश के अन्य संसाधनों के समन्वित प्रयास जरूरी होंगे।

उन्होंने कठिन अभियान क्षेत्रों में काम कर सकने वाली मजबूत और परिस्थितियों के अनुरूप ढलने वाली रसद क्षमताएं विकसित करने की जरूरत बताई। भारत की उत्तरी सीमाओं पर ऊंचाई वाला दुर्गम भूभाग, खराब मौसम और सीमित संपर्क व्यवस्था आपूर्ति पहुंचाने को कठिन बनाते हैं। अग्रिम मोर्चों पर तैनात सैन्य टुकड़ियों तक लंबे समय तक जरूरी सामान पहुंचाए रखना भी चुनौती है।
वाधवा ने कहा कि भविष्य के संघर्षों में रसद प्रणालियों को युद्धक्षेत्र की बदलती परिस्थितियों के मुताबिक तेजी से ढलना होगा और लड़ाकू टुकड़ियों को निर्बाध सहायता देनी होगी। व्याख्यान के बाद हुई बातचीत में अधिकारियों को आधुनिक युद्ध में अभियान योजना, रसद प्रबंधन और तकनीकी नवाचार के आपसी संबंधों पर जानकारी मिली।