नई दिल्ली, 28 सितंबर 2026: गृह मंत्रालय ने केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल को उत्तराखंड के हरिद्वार स्थित पतंजलि फूड एंड हर्बल पार्क प्राइवेट लिमिटेड में तैनात सुरक्षा विंग के सभी 34 स्वीकृत पद समाप्त करने का निर्देश दिया है। यह कदम बल की तैनाती वापस लिए जाने के लगभग पांच महीने बाद उठाया गया है।
सीआईएसएफ ने 4 मई 2026 को प्रतिष्ठान में अपनी सुरक्षा उपस्थिति समाप्त कर दी थी। इस महीने की शुरुआत में जारी पत्र में मंत्रालय ने “पतनंजलि फूड एंड हर्बल पार्क, प्राइवेट लिमिटेड, हरिद्वार (उत्तराखंड) से 4 मई 2026 को सीआईएसएफ सुरक्षा विंग की वापसी के परिणामस्वरूप नीचे उल्लिखित 34 पदों को समाप्त” करने का निर्णय बताया।
इन स्वीकृत पदों में एक सहायक कमांडेंट, चार उप निरीक्षक, दो सहायक उप निरीक्षक, 11 हेड कांस्टेबल और 16 कांस्टेबल शामिल थे। आदेश के साथ ही उस पूरी मानवशक्ति संरचना को औपचारिक रूप से समाप्त कर दिया गया, जो इस परिसर में चौबीसों घंटे सुरक्षा प्रदान कर रही थी।
मंत्रालय ने सीआईएसएफ को यह भी सुनिश्चित करने को कहा है कि “यदि कोई लंबित और बकाया देनदारी है, तो उसे संबंधित प्रबंधन द्वारा चुकाया जाए।” यह संचार सीआईएसएफ के अपर महानिदेशक (उत्तर), महानिदेशक, पतंजलि फूड एंड हर्बल पार्क प्राइवेट लिमिटेड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और अन्य संबंधित अधिकारियों को भेजा गया है।
सीआईएसएफ जून 2015 से इस पार्क में सुरक्षा प्रदान कर रहा था। यह तैनाती मई 2015 में प्रतिष्ठान के सुरक्षा गार्डों और एक स्थानीय ट्रक यूनियन के समर्थकों के बीच हुई झड़प के बाद की गई थी। यूनियन पार्क द्वारा उत्पादों के परिवहन के लिए हरिद्वार के बाहर के ट्रक संचालकों को काम पर रखने का विरोध कर रही थी। इस घटना में एक व्यक्ति की मौत हुई थी। मामले में योग गुरु स्वामी रामदेव के भाई रामभारत सहित दस लोगों को गिरफ्तार किया गया था।
इस सुरक्षा सेवा का भुगतान फूड पार्क प्रशासन द्वारा किया जाता था, जिसके तहत प्रतिष्ठान केंद्रीय बल की तैनाती की लागत केंद्र को वापस करता था। नवीनतम आदेश के साथ हरिद्वार इकाई में सीआईएसएफ की स्वीकृत संरचना पर एक दशक से अधिक समय बाद औपचारिक रूप से विराम लग गया है।
आधिकारिक रिपोर्टों में 4 मई 2026 को की गई वापसी का कोई विस्तृत परिचालन कारण नहीं बताया गया है, सिवाय इसके कि बाद में पद समाप्त करने का प्रशासनिक निर्णय लिया गया। मंत्रालय का निर्देश स्वीकृत बल-ढांचे को समाप्त करने और प्रबंधन से किसी भी बकाया राशि की वसूली तक सीमित है।