नई दिल्ली में रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने कहा कि हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) भारत के एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (एएमसीए) कार्यक्रम के प्रोटोटाइप विकास चरण के लिए तकनीकी आधार पर अयोग्य रही। उन्होंने एनडीटीवी रक्षा सम्मेलन 2026 में कहा कि यह राज्य स्वामित्व वाली कंपनी को किसी भारतीय लड़ाकू विमान परियोजना से बाहर रखे जाने का पहला मामला है।
रविवार को नई दिल्ली में एक साक्षात्कार के दौरान सिंह ने कहा कि एचएएल “कुछ सामान्य तकनीकी आधारों पर योग्य नहीं हो सकी, जिन्हें वह किसी तरह पूरा नहीं कर पाई।” हालांकि, उन्होंने यह नहीं बताया कि कंपनी किन मानकों को पूरा नहीं कर सकी।
रक्षा मंत्रालय ने एएमसीए प्रोटोटाइप कार्यक्रम में निजी क्षेत्र की भागीदारी इस उद्देश्य से खोली थी कि देश में लड़ाकू विमान उत्पादन की दूसरी लाइन तैयार की जा सके और एक ही निर्माता पर निर्भरता कम हो। सिंह ने कहा, “हम देश में दूसरी लड़ाकू विमान उत्पादन लाइन बनाना चाहते थे, ताकि एक ही टोकरी में सारे अंडे रखने की स्थिति न रहे, जैसा कि इस देश में हमेशा रहा है।” उन्होंने कहा कि तीन भरोसेमंद और तकनीकी रूप से योग्य बोलीदाता मिलना सौभाग्य की बात रही।
आठ नहीं, सात समूहों ने रुचि दिखाई थी, जिनमें से केवल तीन अनिवार्य तकनीकी और वित्तीय मानकों पर खरे उतरे। एचएएल ने दो छोटी कंपनियों के साथ साझेदारी में बोली लगाई थी। अंतिम सूची में स्वतंत्र रूप से टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड (टीएएसएल), एलएंडटी–भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड–डायनामैटिक टेक्नोलॉजीज का समूह, तथा भारत फोर्ज–बीईएमएल–डेटा पैटर्न्स का समूह शामिल हैं।
एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी (एडीए) ने मई 2026 में तीनों चयनित बोलीदाताओं को प्रस्ताव के लिए अनुरोध जारी किया था। सरकार प्रोटोटाइप चरण के लिए पूरी तरह वित्तपोषण कर रही है, जिसकी अनुमानित लागत लगभग 15,000 करोड़ रुपये है। चयनित विकास-सह-उत्पादन भागीदार एडीए के साथ मिलकर पांच उड़ान प्रोटोटाइप और एक संरचनात्मक परीक्षण विमान बनाएगा, और अनुबंध मिलने के तीन महीने के भीतर एक नई कंपनी शामिल करनी होगी। प्रारंभिक चरण में प्रोटोटाइप जनरल इलेक्ट्रिक एफ414 इंजनों के साथ उड़ेंगे। डिजाइन प्राधिकरण एडीए के पास ही रहेगा।
सिंह ने संकेत दिया कि पहला एएमसीए प्रोटोटाइप सितंबर 2028 में उड़ान भरने की उम्मीद है। कार्यक्रम दस्तावेज़ों के अनुसार, अनुबंध मिलने के 30 महीने के भीतर पहली उड़ान, 64 महीने में सभी पांच प्रोटोटाइप पूरे करने और 84 महीने में 1,800 उड़ान-परीक्षण सॉर्टियों को पूरा करने की शर्त है। प्रस्ताव के लिए अनुरोध के तहत बोली जमा करने की अंतिम तिथि 30 अक्टूबर 2026 तक बढ़ा दी गई है।
फरवरी 2026 की पिछली रिपोर्टों में एचएएल की अयोग्यता को उस अभिरुचि अभिव्यक्ति मानदंड से जोड़ा गया था, जिसमें वार्षिक कारोबार के तीन गुना से अधिक ऑर्डर बुक होने पर शून्य अंक दिए जाने का प्रावधान था। एचएएल की ऑर्डर बुक लगभग 2.52 ट्रिलियन रुपये बताई गई थी, जो उस सीमा से काफी अधिक थी, जबकि कंपनी तेजस एमके1ए, तेजस एमके2 और अन्य कार्यक्रमों पर काम कर रही है। उस समय एचएएल ने कहा था कि उसे बहिष्कार की कोई आधिकारिक सूचना नहीं मिली है और उसने अपनी विविधतापूर्ण ऑर्डर बुक तथा उत्पादन की दृश्यता को रेखांकित किया था। रक्षा सचिव की ताजा टिप्पणी ने इसे पहले की वित्तीय क्षमता समीक्षा के बजाय सामान्य तकनीकी आवश्यकताओं को पूरा न करने की विफलता के रूप में प्रस्तुत किया।
एएमसीए भारत का प्रस्तावित स्वदेशी पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ लड़ाकू विमान है। भारतीय वायु सेना के पास फिलहाल कोई रडार से बचने वाला स्टील्थ विमान नहीं है। अधिकारियों ने एएमसीए की तैनाती को राष्ट्रीय प्राथमिकता बताया है और चीन द्वारा तैनात स्टील्थ लड़ाकू बेड़ों के आकार का हवाला दिया है। अंतरिम उपाय के रूप में रूसी एसयू-57 विमानों की सीमित खरीद पर भी विचार किया जा रहा है। एचएएल को श्रृंखला उत्पादन चरण में भाग लेने का अवसर अभी भी मिल सकता है।
यह निर्णय उच्च-मूल्य वाले लड़ाकू विमान कार्य को किसी एक सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी तक सीमित रखने के बजाय सार्वजनिक और निजी उद्योग में वितरित करने की व्यापक नीति को दर्शाता है। अब बची हुई तीनों बोलीदाताओं के बीच तकनीकी और वाणिज्यिक प्रस्तावों पर प्रतिस्पर्धा होगी, जिसे अधिकारियों ने मौजूदा रक्षा-औद्योगिक कार्यक्रमों में सबसे महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में से एक बताया है।