एयर मार्शल पीवी शिवानंद, एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ (एओसी-इन-सी), दक्षिण पश्चिमी वायु कमान ने मिलिटरी इंस्टिट्यूट ऑफ ट्रेनिंग (MILIT) में डीएसटीएससी-09 तथा अन्य चल रहे पाठ्यक्रमों के छात्र अधिकारियों से बातचीत की और “दक्षिण पश्चिमी थिएटर में एयरोस्पेस शक्ति” विषय पर संबोधन दिया।
अपने संचालन अनुभव के आधार पर एयर मार्शल पीवी शिवानंद ने भारतीय वायु रणनीति, संचालन की अवधारणा और संयुक्त अभियानों के लिए आवश्यक क्षमताओं पर अपने विचार साझा किए। इस बातचीत में ऑपरेशन सिंदूर और समकालीन संघर्षों से मिले सबक भी शामिल रहे।
इस संवाद के दौरान एओसी-इन-सी ने उभरते परिचालन परिवेश में एयरोस्पेस शक्ति की भूमिका और इसे संयुक्त सैन्य क्षमताओं के साथ एकीकृत करने के महत्व पर जोर दिया। इस अवसर ने छात्र अधिकारियों को दक्षिण पश्चिमी थिएटर में एयरोस्पेस शक्ति के प्रयोग पर संचालनगत दृष्टिकोण समझने का मौका दिया।
चर्चा में समकालीन युद्धक्षेत्र में त्वरित और परिस्थितिजन्य निर्णय लेने की आवश्यकता पर भी ध्यान केंद्रित किया गया। इस बातचीत ने एयरोस्पेस शक्ति को संयुक्त क्षमताओं और त्वरित निर्णय-प्रक्रिया के साथ जोड़ने के महत्व को रेखांकित किया, ताकि संचालनगत चुस्ती बनी रहे और निर्णायक प्रभाव हासिल किए जा सकें।
डीएसटीएससी-09 और MILIT के अन्य पाठ्यक्रमों में शामिल अधिकारियों के साथ यह संवाद संचालन अनुभव और समकालीन सबक साझा करने का एक मंच भी बना। भारतीय वायु रणनीति, संयुक्त अभियान और हालिया संचालन अनुभव पर केंद्रित इस चर्चा ने बदलते युद्धक्षेत्र के अनुरूप सैन्य अवधारणाओं और निर्णय-प्रक्रिया को ढालने की आवश्यकता को सामने रखा।
बातचीत का समापन इस जोर के साथ हुआ कि समकालीन और भविष्य के संघर्षों में एयरोस्पेस शक्ति के प्रभावी उपयोग के लिए एकीकृत क्षमताएं और संचालनगत चुस्ती प्रमुख तत्व हैं।