भारतीय सेना की नायब सूबेदार नीरू धांडा ने 2026 एशियाई खेलों में इतिहास रच दिया है। आइची-नागोया में हुए महिलाओं की ट्रैप निशानेबाजी स्पर्धा में उन्होंने व्यक्तिगत स्वर्ण पदक जीतकर यह उपलब्धि हासिल की और इस इवेंट में स्वर्ण जीतने वाली पहली भारतीय महिला बन गईं।
नीरू ने पूरी प्रतियोगिता में दबदबे वाला प्रदर्शन किया। योग्यता चरण में उन्होंने 125 में से 118 लक्ष्य भेदे और नया खेल रिकॉर्ड बनाया। इस शानदार प्रदर्शन ने उन्हें फाइनल से पहले मजबूत मनोबल दिया।
फाइनल में भी उन्होंने दबाव के बीच उल्लेखनीय निरंतरता, धैर्य और सटीकता दिखाई। कठिन परिस्थितियों में उतरने के बावजूद नीरू ने शुरुआती श्रृंखला से ही बढ़त बनाए रखी और अंततः शीर्ष स्थान हासिल कर भारत के लिए स्वर्ण पदक पक्का किया।
यह जीत भारतीय निशानेबाजी के लिए भी एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है, खासकर शॉटगन वर्ग में, जहां राइफल और पिस्टल स्पर्धाओं की तुलना में बड़े अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पदक हासिल करना अधिक चुनौतीपूर्ण रहा है।
दिन की शुरुआत में नीरू ने महिलाओं की ट्रैप टीम स्पर्धा में भी भारत के रजत पदक में अहम योगदान दिया। अशीमा अहलावत और मनिषा कीर के साथ उतरी भारतीय तिकड़ी ने कुल 328 अंक बनाए, जिसमें नीरू टीम की सर्वोच्च प्रदर्शन करने वाली खिलाड़ी रहीं।
एशियाई खेलों का यह स्वर्ण पदक नीरू के अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार अच्छे प्रदर्शन के बाद आया है। जुलाई 2026 में उन्होंने इटली के लोनेटो में महिलाओं की ट्रैप स्पर्धा में अपना पहला आईएसएसएफ विश्व कप स्वर्ण पदक जीता था।
भारतीय सेना में नायब सूबेदार के रूप में सेवाएं दे रहीं नीरू सेना निशानेबाजी इकाई से जुड़ी हैं। यह इकाई वर्षों से भारत के लिए कई उत्कृष्ट निशानेबाज तैयार करती रही है।
उनकी निशानेबाजी की प्रेरणा उनके चचेरे भाई लक्ष्य शेरोन रहे, जिन्होंने 2018 के जकार्ता एशियाई खेलों में पुरुषों की ट्रैप स्पर्धा में रजत पदक जीता था। आठ साल बाद नीरू ने उसी महाद्वीपीय मंच पर स्वर्ण पदक जीतकर उनसे एक कदम आगे बढ़कर उपलब्धि दर्ज की।
उनकी यह सफलता केवल व्यक्तिगत संकल्प और वर्षों के अभ्यास को ही नहीं, बल्कि भारतीय सेना के उस खेल ढांचे को भी दर्शाती है जो खिलाड़ियों को उच्चतम स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने के लिए तैयार करता है।
योग्यता चरण में नया खेल रिकॉर्ड, व्यक्तिगत स्वर्ण और टीम रजत के साथ नायब सूबेदार नीरू धांडा 2026 एशियाई खेलों में भारत की सबसे प्रमुख खिलाड़ियों में शामिल रहीं। उनकी यह ऐतिहासिक उपलब्धि ट्रैप और अन्य शॉटगन स्पर्धाओं में आगे बढ़ने की इच्छा रखने वाली नई पीढ़ी की भारतीय निशानेबाज़ों को प्रेरणा दे सकती है।