नई दिल्ली, 30 सितंबर 2026: केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल अपने कुछ सबसे संवेदनशील दायित्वों पर तैनात कर्मियों, जिनमें संसद भवन परिसर की ड्यूटी और उच्चस्तरीय वीआईपी सुरक्षा देने वाले विशेष सुरक्षा समूह के कमांडो शामिल हैं, का विशेष मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन कराएगा। इसका उद्देश्य मानसिक दबाव की शुरुआती पहचान करना और संस्थागत मानसिक स्वास्थ्य सहायता को मजबूत करना है।
यह निर्णय मंगलवार को जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले के बसोहली क्षेत्र के माश्का गांव में सेव-II जलविद्युत परियोजना पर हुई पारिवारिक हत्या के बाद और अधिक तात्कालिक हो गया। 2009 बैच के एक हेड कांस्टेबल ने कथित विवाद के बाद अपनी सेवा एके-47 से गोलीबारी कर चार साथियों की हत्या कर दी। मारे गए लोगों में सहायक कमांडेंट अंकित कुमार पांडेय, जो कंपनी कमांडर थे, सब-इंस्पेक्टर लक्ष्मण सिंह और दो कांस्टेबल शामिल थे। आरोपी को काबू में कर पुलिस को सौंप दिया गया। मामले की जांच के लिए कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी के आदेश दिए गए हैं और अधिकारी एकांत परियोजना स्थल के कार्य वातावरण की भी जांच कर रहे हैं।
गोलीबारी से चार दिन पहले, 25 सितंबर को, सीआईएसएफ ने दिल्ली के इंस्टीट्यूट ऑफ ह्यूमन बिहेवियर एंड अलाइड साइंसेज के साथ तीन वर्ष के समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए थे। इस समझौते के तहत आईएचबीएएस उच्च संवेदनशील इकाइयों में तैनात या तैनाती के लिए प्रस्तावित कर्मियों, विशेष रूप से संसद भवन परिसर के लिए चिह्नित कर्मियों, का विशेष मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन करेगा।
चिकित्सा अधिकारी, इकाई कमांडर और पर्यवेक्षी कर्मचारियों को शुरुआती व्यवहारिक बदलाव, तीव्र तनाव और मनोचिकित्सीय आपात स्थितियों को पहचानने का प्रशिक्षण दिया जाएगा, ताकि समय रहते पेशेवर हस्तक्षेप शुरू किया जा सके। जिन कर्मियों को चिकित्सकीय देखभाल की जरूरत होगी, उन्हें आईएचबीएएस की बाह्य रोगी और आंतरिक रोगी सुविधाओं तक सीधी पहुंच मिलेगी, जिसमें शराब-निर्भरता सिंड्रोम के लिए विशेष सहायता भी शामिल होगी। बल राष्ट्रीय टेली-मानस हेल्पलाइन 14416 को भी बढ़ावा देगा।
महानिदेशक प्रवीर रंजन ने हस्ताक्षर के अवसर पर कहा कि सीआईएसएफ कर्मी अत्यंत चुनौतीपूर्ण वातावरण में काम करते हैं और यह साझेदारी शुरुआती पहचान, परामर्श और चिकित्सकीय उपचार को मजबूत करेगी, साथ ही मदद मांगने को लेकर कलंक-मुक्त संगठनात्मक संस्कृति को प्रोत्साहित करेगी।
विशेष सुरक्षा समूह का गठन 2006 में हुआ था और यह इस समय निर्धारित एक्स, वाई, जेड और जेड-प्लस श्रेणी के संरक्षण प्राप्त व्यक्तियों की सुरक्षा करता है। हालिया रिपोर्टों में जिन लोगों के नाम शामिल हैं, उनमें असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा, मणिपुर के पूर्व मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत शामिल हैं। इस प्रकार यह मूल्यांकन संसद जैसे स्थिर उच्च-सुरक्षा स्थलों के साथ-साथ मोबाइल निकट-सुरक्षा टीमों पर भी लागू होगा। तुलना के लिए, विशेष सुरक्षा समूह के लिए चुने गए कर्मी पहले से ही कठोर आंतरिक मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन से गुजरते हैं और समय-समय पर वियना टेस्ट सिस्टम लेते हैं।
यह पहल मौजूदा उपायों पर आधारित है। संशोधित तैनाती नीति के तहत, जो 2025 के अंत में घोषित की गई थी, संसद ड्यूटी के लिए मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन, बैटल फिजिकल एफिशिएंसी टेस्ट, संसद-विशिष्ट प्रवेश प्रशिक्षण और सुरक्षा स्वीकृति पहले ही अनिवार्य किए जा चुके थे। इस नीति में कार्यकाल तीन वर्ष से बढ़ाकर चार वर्ष कर दिया गया था, जिसे एक वर्ष और बढ़ाया जा सकता है। प्रोजेक्ट मन्न, आदित्य बिड़ला एजुकेशन ट्रस्ट के साथ साझेदारी में, संसद, हवाई अड्डों और दिल्ली मेट्रो में अब तक हजारों कर्मियों की जांच कर चुका है।
अधिकारियों का कहना है कि केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में व्यावसायिक तनाव एक लगातार चिंता बना हुआ है। पिछले तीन वर्षों में इन बलों में सैकड़ों आत्महत्याएं और कई पारिवारिक हत्याएं दर्ज की गई हैं; इस्तीफे भी ऊंचे बने रहे हैं। आईएचबीएएस के साथ यह नया चिकित्सकीय स्तर पहले से चल रहे कल्याण कार्यक्रमों को पूरक करेगा और यह सुनिश्चित करेगा कि उच्च दबाव वाली भूमिकाओं में तैनात कर्मियों की तैनाती से पहले और उसके दौरान संरचित मनोवैज्ञानिक जांच हो सके।
सीआईएसएफ अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि कठुआ की घटना की जांच जारी है और अब तक किसी कारणात्मक संबंध की सार्वजनिक पुष्टि नहीं की गई है। उनके अनुसार, मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन कार्यक्रम किसी एक घटना की प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि संवेदनशील सुरक्षा दायित्वों की ज्ञात चुनौतियों के लिए एक रोकथामात्मक और व्यवस्थित कदम है।