महाराष्ट्र मंत्रिमंडल ने अग्निवीरों को राज्य पुलिस और अन्य वर्दीधारी सेवाओं में बिना किसी नई भर्ती परीक्षा और बिना मूल प्रशिक्षण दोहराए शामिल करने की नीति को मंजूरी दे दी है। यह निर्णय राज्य की सेवाओं में अग्निवीरों के लिए सीधे समायोजन का रास्ता खोलेगा।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, जो गृह विभाग भी संभालते हैं, ने मंगलवार को साप्ताहिक मंत्रिमंडल बैठक के बाद यह घोषणा की। उन्होंने कहा कि केंद्र की 2022 की अग्निपथ योजना के तहत भर्ती हुआ अग्निवीरों का पहला बैच चार वर्ष का कार्यकाल पूरा कर लौट रहा है।
फडणवीस ने कहा कि केंद्र ने यह प्रावधान किया है कि 25 प्रतिशत अग्निवीर सशस्त्र बलों में बने रहेंगे, जबकि शेष 75 प्रतिशत को केंद्र और राज्य सरकारों की विभिन्न बलों में समायोजित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र ने निर्णय लिया है कि जिन अग्निवीरों को सशस्त्र बलों में नहीं रखा जाएगा, उन्हें पुलिस और राज्य सरकार के अन्य समान पदों पर मौका दिया जाएगा।
नई नीति के अनुसार, महाराष्ट्र के मूल निवासी पूर्व अग्निवीरों को समूह-ग के वर्दीधारी पदों में 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण मिलेगा। उन्हें लिखित भर्ती परीक्षा से छूट दी जाएगी। उनकी सैन्य प्रशिक्षण अवधि को सामान्य प्रारंभिक प्रशिक्षण के स्थान पर मान्यता दी जाएगी, हालांकि पद के अनुसार अलग से कुछ निर्देश लागू हो सकते हैं।
उदाहरण के तौर पर, अग्निशमन सेवाओं में जाने वाले कर्मियों को पूर्ण तीन वर्षीय पाठ्यक्रम के स्थान पर तेज़ कार्यक्रम पूरा करना पड़ सकता है। ऊपरी आयु सीमा में चार वर्ष की छूट भी मंजूर की गई है।
यह आरक्षण और समायोजन प्रावधान कई पदों पर लागू होंगे। इनमें महाराष्ट्र पुलिस और राज्य रिज़र्व पुलिस बल में पुलिस सिपाही और चालक सिपाही, कारागार सिपाही, नागरिक सुरक्षा निदेशालय और नगर निगमों के अंतर्गत अग्निशामक और बचावकर्मी, होम गार्ड कर्मी, राज्य खुफिया विभाग में सिपाही-नाविक, राज्य आबकारी विभाग में जवान और जवान-सह-चालक पद तथा वनरक्षक शामिल हैं।
भारतीय नौसेना से मुक्त किए गए अग्निवीरों को राज्य की तटीय सुरक्षा शाखा में शामिल किए जाने को प्राथमिकता दी जाएगी। सरकार ने संकेत दिया है कि नौसेना कर्मियों को समायोजित करने के लिए स्वीकृत पदों की सीमा में विशेष रूप से छूट दी जा सकती है। यदि मौजूदा रिक्तियां पर्याप्त नहीं हुईं, तो अतिरिक्त पद भी बनाए जा सकते हैं।
पहले बैच में सेवा पूरी करने वाले लगभग 2,496 अग्निवीर महाराष्ट्र के हैं। सरकार ने कहा है कि जो भी पात्र उम्मीदवार राज्य सेवा में जाना चाहेगा, उसे समायोजित किया जाएगा।
फडणवीस ने कहा कि यह नीति सैन्य सेवा के दौरान अर्जित अनुशासन, शारीरिक दक्षता और संचालन संबंधी अनुभव का उपयोग करने के लिए लाई गई है। उन्होंने कहा, “जो भी अग्निवीर राज्य सरकार की सेवा में आना चाहता है, उसे बिना परीक्षा और बिना प्रशिक्षण बाधा के सीधे हमारी पुलिस और वर्दीधारी सेवाओं में समायोजित किया जाएगा।”
सरकार की ओर से वरिष्ठता, पदोन्नति, कौशल की मान्यता और अन्य शेष प्रक्रिया संबंधी विषयों पर विस्तृत शासनादेश बाद में जारी किए जाने की उम्मीद है। यह कदम केंद्र के उस आग्रह के अनुरूप है, जिसमें राज्यों से कहा गया है कि वे नियमित सशस्त्र बलों में न रखे जाने वाले 75 प्रतिशत अग्निवीरों के लिए सेवा-उपरांत अवसर तैयार करें।