फ्रांस के वायु रक्षा उप कमांडर ज्यूलियन साबेने ने अभ्यास तरंग शक्ति को फ्रांस की PEGASE 26 तैनाती का सबसे अहम हिस्सा बताया है। उन्होंने भारतीय और फ्रांसीसी वायु सेनाओं के बीच हुए परिचालन अनुभवों के आदान-प्रदान और राफेल लड़ाकू बेड़ों के बीच दिखी अंतर-संचालन क्षमता को विशेष रूप से रेखांकित किया।
जोधपुर में एएनआई से बातचीत करते हुए साबेने ने कहा कि अभ्यास के दौरान मिला परिचालन अनुभव दोनों वायु सेनाओं के लिए उपयोगी प्रशिक्षण साबित हुआ। उन्होंने कहा कि यह खास तौर पर इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत और फ्रांस दोनों ने राफेल लड़ाकू विमानों को वास्तविक युद्ध परिस्थितियों में उड़ाया है।
साबेने ने कहा, “भारतीय वायु सेना ने भी राफेल को युद्ध में उड़ाया है और हमने भी।” उनके अनुसार, तरंग शक्ति जैसे बड़े सैन्य अभ्यास में युद्ध के अनुभवों को साझा करने का अवसर मिलता है।
उन्होंने भारत और फ्रांस के बीच रक्षा सहयोग के लंबे इतिहास का भी उल्लेख किया। साबेने ने कहा कि भारतीय वायु सेना 1950 के दशक से फ्रांसीसी मूल के विमानों का संचालन कर रही है। उनके अनुसार, भारतीय वायु सेना ने 1952 में ओरागन का संचालन शुरू किया था और राफेल पिछले कई वर्षों से भारतीय लड़ाकू बेड़े का हिस्सा है।
उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों के पास राफेल होने से अभ्यास के दौरान कार्यप्रणालियों और परिचालन अनुभवों का आदान-प्रदान करने का अवसर मिला। साबेने ने PEGASE 26 के भारतीय चरण को विशेष रूप से महत्वपूर्ण बताया और कहा कि तरंग शक्ति भविष्य के युद्धों की तैयारी के लिए प्रशिक्षण का अच्छा अवसर है।
उन्होंने कहा, “यहां तरंग शक्ति अभ्यास के लिए रुकना हमारे लिए सबसे अहम रहा, क्योंकि यह एक सच्चा, बहुराष्ट्रीय और महत्वाकांक्षी अभ्यास है, जो हमें अगले प्रकार के युद्ध के लिए तैयार होने का सर्वश्रेष्ठ प्रशिक्षण देता है।”
फ्रांसीसी अधिकारी ने लड़ाकू अभियानों से आगे भी दोनों वायु सेनाओं के बीच अंतर-संचालन क्षमता पर जोर दिया। उन्होंने भारतीय और फ्रांसीसी टैंकर विमानों के बीच हुए ईंधन भरने के साझा अभियानों का उल्लेख करते हुए कहा कि इस अभ्यास ने दोनों वायु सेनाओं को एक-दूसरे के टैंकरों से ईंधन भरने की क्षमता दिखाई।
तरंग शक्ति में भाग ले रही फ्रांसीसी टुकड़ी में सात राफेल लड़ाकू विमान, तीन बहु-भूमिका टैंकर परिवहन विमान और दो ए400एम परिवहन विमान शामिल हैं। साबेने ने बताया कि उन्होंने राफेल से जुड़े एक हवा से हवा में ईंधन भरने के मिशन के दौरान ए400एम में पर्यवेक्षक के रूप में उड़ान भरी थी और यह अभियान सफल रहा।
इस अभ्यास ने फ्रांसीसी टुकड़ी को भारतीय वायु सेना के विविध विमान बेड़े के साथ काम करने का भी अवसर दिया है। साबेने के अनुसार, भारतीय वायु सेना द्वारा संचालित विमानों की विविधता ने फ्रांसीसी कर्मियों के लिए अतिरिक्त सीखने के अवसर उपलब्ध कराए।
फ्रांसीसी तैनाती ने भारत तक लगभग 30,000 किलोमीटर की दूरी तय की। साबेने ने कहा कि यह लंबी दूरी की तैनाती भारत-प्रशांत क्षेत्र में फ्रांस की स्थिति को दर्शाती है, क्योंकि उसके नागरिक उसके विदेश स्थित क्षेत्रों में भी रहते हैं।
पूर्व में मिराज 2000 उड़ाने वाले इस फ्रांसीसी अधिकारी ने भारत के स्वदेशी लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट तेजस के साथ उड़ान भरने का अनुभव भी साझा किया। उन्होंने कहा कि यह विमान उनके लिए नया था और इसकी विशेषताएं उन्हें मिराज 2000 की याद दिलाती हैं, जिसे उन्होंने अपने लड़ाकू पायलट करियर के दौरान उड़ाया था।
उन्होंने यह भी बताया कि फ्रांस ने अमेरिकी एफ-35 के साथ भी अभ्यास किया है। साबेने के अनुसार, फ्रांसीसी वायु सेना ने अलास्का में अभ्यासों के दौरान एफ-35 विमानों के साथ उड़ान भरी थी।
साबेने ने भारत के स्वदेशी रक्षा विकास प्रयासों की सराहना करते हुए दोनों देशों के रक्षा उत्पादन में संप्रभुता पर जोर देने की सोच को समान बताया। उन्होंने कहा, “एक संप्रभु राष्ट्र के रूप में फ्रांस भारत जैसा है।”
विमानों और परिचालन प्रक्रियाओं के अलावा साबेने ने अभ्यास में शामिल कर्मियों के बीच संवाद को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि वायु कर्मियों का एक-दूसरे को जानना, अपने विमानों और सर्वोत्तम तरीकों पर चर्चा करना, अंतर-संचालन क्षमता बढ़ाने का अहम हिस्सा है।
उनके अनुसार, जोधपुर में भारतीय और फ्रांसीसी वायु कर्मियों को मिलने, बातचीत करने और अलग-अलग विमानों के संचालन के अनुभव साझा करने का अवसर मिला।
PEGASE 26 की तरंग शक्ति में भागीदारी भारतीय सशस्त्र बलों के निमंत्रण पर की गई है और यह भारत-फ्रांस रक्षा संबंधों का हिस्सा है। फ्रांस के सशस्त्र बल मंत्रालय ने दोनों देशों के संबंधों को “सघन और गतिशील” बताया है और गरुड़, ओरियन तथा तरंग शक्ति जैसे अभ्यासों को दोनों सेनाओं के बीच अंतर-संचालन क्षमता का संकेत बताया है।
मंत्रालय ने भारतीय वायु सेना में राफेल के शामिल होने के बाद रक्षा सहयोग के और मजबूत होने की बात भी कही है। तरंग शक्ति अभ्यास जोधपुर में 26 सितंबर से 12 अक्टूबर तक “साझेदारी में शक्ति” विषय के तहत आयोजित किया जा रहा है। यह बहुपक्षीय हवाई अभ्यास भाग लेने वाली वायु सेनाओं को प्रशिक्षण, विशेषज्ञता के आदान-प्रदान और अंतर-संचालन क्षमता विकसित करने का अवसर देता है।
इस अभ्यास में ऑस्ट्रेलिया, संयुक्त राज्य अमेरिका, संयुक्त अरब अमीरात, फ्रांस और जर्मनी सहित मित्र विदेशी देश भाग ले रहे हैं। फ्रांसीसी टुकड़ी के लिए यह अभ्यास भारतीय राफेल विमानों के साथ संचालन, हवा से हवा में ईंधन भरने की गतिविधियों और विभिन्न भाग लेने वाली वायु सेनाओं के कर्मियों के साथ संवाद का अवसर बना है।