सेना मार्क्समैनशिप इकाई की नायब सूबेदार नीरू धांधा रविवार, 4 अक्टूबर 2026 को आइची-नागोया में होने वाले 20वें एशियाई खेलों के समापन समारोह में भारत की महिला ध्वजवाहक होंगी।
भारत की उप प्रमुख मिशन अंजलि भागवत ने शुक्रवार को इस सम्मान की पुष्टि की। उन्होंने कहा कि वह कल सुबह नागोया लौटकर महिला ध्वजवाहक बनेंगी। पुरुष ध्वजवाहक के नाम पर निर्णय भी कल लिया जाएगा। घोषणा के समय पुरुष ध्वजवाहक का नाम तय नहीं हुआ था। समारोह नागोया के मिज़ुहो पार्क एथलेटिक स्टेडियम में होगा।
25 मई 2000 को जन्मी 26 वर्षीय ट्रैप निशानेबाज़ अपनी तीसरी पदक जीत के बाद हरियाणा के जींद स्थित सांगतपुरा गांव लौट चुकी थीं। जापानी हथियार नियमों के अनुसार निशानेबाज़ अपने हथियार प्रतियोगिता के बाद अपने पास नहीं रख सकते और उन्हें देश से बाहर ले जाना होता है। वह समारोह के लिए शनिवार को नागोया वापस जा रही हैं। हवाई अड्डे से बात करते हुए उन्होंने बताया कि उन्हें कुछ घंटे पहले ही भागवत का फोन आया था। उन्होंने कहा, “यह मेरे लिए बहुत बड़ा सम्मान है। मैं इसे गंवाना नहीं चाहती थी।” उन्होंने यह भी कहा कि उनकी मां ने उनसे कहा था कि ऐसा अवसर सभी को नहीं मिलता।
धांधा का चयन नागोया में भारत के सबसे मजबूत व्यक्तिगत अभियानों में से एक के बाद हुआ है। उन्होंने महिलाओं की व्यक्तिगत ट्रैप स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता और इस स्पर्धा में व्यक्तिगत एशियाई खेल खिताब जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनीं। वह शॉटगन वर्ग में व्यक्तिगत एशियाई खेल स्वर्ण जीतने वाली भी पहली भारतीय महिला बनीं। उन्होंने 125 में से 118 अंक बनाकर क्वालीफिकेशन में एशियाई खेलों का रिकॉर्ड बनाया और फाइनल में 30 में से 28 लक्ष्य भेदकर एशियाई रिकॉर्ड स्थापित किया। इसके बाद उन्होंने मनिषा कीर और आशिमा अहलावत के साथ महिलाओं की ट्रैप टीम में रजत पदक जीता और फिर किनान चेनाई के साथ मिश्रित ट्रैप टीम में स्वर्ण पदक अपने नाम किया। दो स्वर्ण और एक रजत ने उन्हें खेलों में भारत की प्रमुख पदक विजेताओं में शामिल कर दिया।
एशियाई खेलों में उनका प्रदर्शन तेजी से उभरते करियर को और आगे बढ़ाता है। जुलाई 2026 में उन्होंने इटली के लोनातो में आईएसएसएफ शॉटगन विश्व कप में महिलाओं की ट्रैप स्पर्धा का स्वर्ण जीता था, जो इस स्पर्धा में किसी भारतीय महिला का पहला विश्व कप स्वर्ण था। उन्होंने इसमें प्रमुख यूरोपीय निशानेबाज़ों को पीछे छोड़ा। 2025 में उन्होंने शिमकेंट में एशियाई निशानेबाज़ी चैंपियनशिप में व्यक्तिगत और टीम स्वर्ण पदक जीते थे।
वह कोर ऑफ मिलिट्री पुलिस में नायब सूबेदार के रूप में सेवा दे रही हैं और मऊ में सेना मार्क्समैनशिप इकाई के साथ प्रशिक्षण लेती हैं। उन्होंने सेना द्वारा महिलाओं के लिए रैंक-एंड-फाइल भर्ती खोलने के बाद इस कोर में प्रवेश किया। उन्होंने 2019 में अपेक्षाकृत देर से ट्रैप निशानेबाज़ी शुरू की थी, जब उन्हें 2018 जकार्ता एशियाई खेलों के पुरुष ट्रैप रजत पदक विजेता अपने चचेरे भाई लक्षय शेरोन से प्रेरणा मिली। शुरुआती अभ्यास परिवार की दो नाली बंदूक और चचेरे भाई से उधार लिए गए हथियार से, अक्सर टिन के डिब्बों पर, किया जाता था। बाद में वह मध्य प्रदेश निशानेबाज़ी अकादमी में पहुंचीं। उनके कोच ओलंपिक चैंपियन पीटर विल्सन हैं।
इस चयन के साथ अंतिम परेड में भारतीय दल का नेतृत्व एक सेना निशानेबाज़ करेंगी, जिसने नागोया में तीन बार पदक मंच पर जगह बनाई है और साल की शुरुआत में विश्व कप स्वर्ण भी जीता था।