तोपखाना विद्यालय, देओलाली और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, जम्मू ने 1 अक्टूबर, 2026 को एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते के तहत लॉन्ग गनरी स्टाफ कोर्स कर रहे छात्र अधिकारियों को एम.टेक. की डिग्री प्रदान की जाएगी।
यह समझौता तोपखाना विद्यालय के ब्रिगेडियर विरेंद्र सिंह और आईआईटी जम्मू के निदेशक डॉ. मनोज सिंह गौर ने हस्ताक्षरित किया।
इस सहयोग के तहत लॉन्ग गनरी स्टाफ कोर्स के छात्र अधिकारी आईआईटी जम्मू के साथ मिलकर प्रौद्योगिकी तत्परता स्तर आधारित परियोजनाओं पर काम कर सकेंगे। इन परियोजनाओं का ध्यान वास्तविक तकनीकी चुनौतियों और भारतीय सेना की परिचालन आवश्यकताओं पर रहेगा।
इस पहल के माध्यम से कोर्स कर रहे अधिकारियों के सैन्य अनुभव को आईआईटी जम्मू की शैक्षणिक और तकनीकी विशेषज्ञता के साथ जोड़ा जाएगा। इसका उद्देश्य शोध, नवाचार और स्वदेशी प्रौद्योगिकी समाधानों के विकास को बढ़ावा देना है।
प्रौद्योगिकी तत्परता स्तर आधारित दृष्टिकोण छात्र अधिकारियों को तकनीक-केंद्रित परियोजनाओं पर काम करने के लिए एक रूपरेखा देगा। आईआईटी जम्मू के साथ जुड़ाव के जरिए अधिकारी अपने परिचालन अनुभव को शैक्षणिक और तकनीकी इनपुट के साथ जोड़ सकेंगे।
तोपखाना विद्यालय और आईआईटी जम्मू के बीच यह सहयोग सैन्य आवश्यकताओं और तकनीकी शोध के एकीकरण के लिए एक शैक्षणिक मंच प्रदान करता है। वास्तविक चुनौतियों और परिचालन आवश्यकताओं पर केंद्रित यह पहल भारतीय सेना के लिए उपयोगी समाधानों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से की गई है।
यह समझौता एक प्रमुख सेना प्रशिक्षण संस्थान और एक आईआईटी के बीच शोध तथा प्रौद्योगिकी विकास को आगे बढ़ाने की दिशा में सहयोग को दर्शाता है। साथ ही, यह छात्र अधिकारियों को सैन्य और परिचालन आवश्यकताओं से जुड़ी परियोजनाओं पर काम करते हुए एम.टेक. की डिग्री प्राप्त करने का अवसर भी देता है।
इस सहयोग से सैन्य अनुभव और शैक्षणिक विशेषज्ञता को एक संगठित ढंग से जोड़ते हुए शोध, नवाचार और स्वदेशी प्रौद्योगिकी विकास में योगदान मिलने की उम्मीद है।