बोलारम शस्त्रागार चोरी मामले में तीन सेवारत सेना कर्मियों सहित सात और लोगों की गिरफ्तारी के साथ कुल हिरासत में लिए गए आरोपियों की संख्या आठ हो गई है। पुलिस के अनुसार, चोरी किए गए हथियार बैंक, आभूषण दुकानों और संपन्न लोगों को निशाना बनाकर की जाने वाली श्रृंखलाबद्ध डकैतियों के लिए रखे गए थे।
मलकाजगिरी के पुलिस आयुक्त बी. सुमति ने शनिवार, 3 अक्टूबर को बताया कि ताजा गिरफ्तारियों के बाद मामले में हिरासत में आरोपियों की कुल संख्या आठ हो गई है। मुख्य आरोपी, 37 वर्षीय उप्पुथोला मल्लेश उर्फ राजू, 20 बटालियन, मद्रास रेजिमेंट के सेवानिवृत्त हवलदार हैं। उन्हें 11 सितंबर को गिरफ्तार किया गया था और वे चंचलगुड़ा केंद्रीय कारागार में बंद हैं।
गिरफ्तार किए गए सात लोग
तीन सेवारत कर्मियों में कोंडुरी शेषुलु, 36, 20 बटालियन, मद्रास रेजिमेंट के सिपाही हैं और आंध्र प्रदेश के प्रकाशम जिले के मार्कापुरम के रहने वाले हैं। विनोद कुमार, 34, नायक हैं और उसी बटालियन में कोटे यानी शस्त्र भंडार के कर्मचारी हैं। कुचराकांति प्रवीण, 37, 16 बटालियन, मद्रास रेजिमेंट के हवलदार हैं और महबूबनगर जिले के गुंडलापोटापल्ली के निवासी हैं।
नागरिक आरोपियों में पश्चिम बंगाल के बैरकपुर निवासी अवी डे उर्फ ओबी, 32; बैरकपुर छावनी के पास गन्ने के रस की ठेली चलाने वाले बीरबल शाह, 27; नागरकर्नूल जिले के पडारा निवासी राजमिस्त्री और मल्लेश का चचेरा भाई उप्पुथोला मल्लिकार्जुन, 39; तथा उसी पडारा के सामान्य दुकान के मालिक और मल्लेश के मित्र चेम्माकर निरंजन, 39 शामिल हैं।
डकैती की योजना, आतंक से कोई संबंध नहीं
प्रेस वार्ता में आयुक्त सुमति ने बताया कि सेवा से हटने के बाद वित्तीय दबाव में आए मल्लेश ने मल्लिकार्जुन और निरंजन के साथ मिलकर बड़ी संपत्ति संबंधी वारदातों की योजना बनाई। जांच में सामने आया कि उसने बैंक लूट के वीडियो दोनों के साथ साझा किए थे और उनसे ऐसी वारदातों के तरीके समझने को कहा था। पुलिस के अनुसार, समूह का इरादा बैंक और आभूषण दुकानों को लूटने तथा संपन्न लोगों से जबरन वसूली करने के लिए हथियारों का इस्तेमाल करने का था।
पश्चिम बंगाल संपर्कों के जरिए पिस्तौल खरीदने की कोशिश विफल होने पर मल्लेश ने अपने पूर्व यूनिट से हथियार चोरी करने का फैसला किया। इसके बाद उसने शेषुलु, विनोद कुमार और प्रवीण से संपर्क किया, जिनके साथ वह मद्रास रेजिमेंट में रह चुका था। पुलिस का आरोप है कि इन तीनों को योजना की जानकारी थी, उन्होंने कोटे, पहरे की स्थिति और संतरी ड्यूटी की जानकारी दी तथा कोटे और मैगजीन के ताले तोड़ने में मदद की।
पुलिस के अनुसार, मल्लेश ने कई बार इलाके की टोह ली थी, उसे पता था कि यूनिट के सीसीटीवी कैमरे मरम्मत में हैं, और चोरी के बाद उसने प्रवीण को आधी रात के आसपास फोन कर बताया था कि काम पूरा हो गया है। आयुक्त सुमति ने कहा कि जांच में किसी भी आतंकवादी या उग्रवादी संबंध का पता नहीं चला है। उनके अनुसार, मंशा बड़े संपत्ति अपराधों को अंजाम देना थी।
पश्चिम बंगाल के खरीदार और पहले से रखा हथियार
मल्लेश का पश्चिम बंगाल के आरोपियों से संपर्क 2022 का है, जब 20 बटालियन बैरकपुर में तैनात थी। शाह के माध्यम से उसने डे से 10,000 रुपये में देशी पिस्तौल, जिसे टपानचा कहा जाता है, और एक जिंदा कारतूस खरीदा था। बाद में यह हथियार 23 सितंबर को आंचपेट के साई नगर कॉलोनी स्थित उसके पिता के घर से बरामद हुआ। इसका किसी अपराध में उपयोग नहीं हुआ था।
बोलारम की चोरी के बाद डे ने चोरी किए गए सेना के हथियार खरीदने पर सहमति दी और हर पिस्तौल के लिए 3 लाख रुपये तथा हर लंबी बंदूक के लिए 5 लाख रुपये की पेशकश की, जबकि गोलाबारूद के लिए अलग भुगतान तय किया गया। शाह पर बिचौलिया बनने का आरोप है। डे पर पहले से ही खर्दा पुलिस थाना से जुड़ा एक शस्त्र अधिनियम मामला दूसरी न्यायिक मजिस्ट्रेट अदालत, बैरकपुर में लंबित है।
चोरी और बरामदगी
चोरी का पता 31 अगस्त को तब चला जब 20 बटालियन के कर्मियों ने देखा कि कोटे और मैगजीन के ताले तोड़ दिए गए हैं। कमांडिंग अधिकारी लेफ्टिनेंट कर्नल मयंक गोवितिरकर ने उसी शाम बोलारम पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई। चोरी की घटना 30 अगस्त की रात और 31 अगस्त की तड़के की बताई गई है।
बरामद किए गए शस्त्रों में चार एके-203 राइफलें, पांच मैगजीन, एक इंसास राइफल, तीन मैगजीन, छह 9 मिमी पिस्तौलें, 12 मैगजीन, एक 6.35 बोर की नागरिक पिस्तौल, एक मैगजीन, तीन दूरबीनें, 9 मिमी के 1,156 कारतूस, एके-203 के 720 कारतूस और इंसास के 36 कारतूस शामिल थे। पुलिस ने पांच मोबाइल फोन भी जब्त किए। हथियार और गोला-बारूद मल्लेश से जुड़े स्थानों से बरामद किए गए, जिनमें नागरकर्नूल के आंचपेट स्थित उसके पिता का घर भी शामिल है।
नागरकर्नूल के पडारा मंडल के उदुमेली गांव के मूल निवासी मल्लेश ने 30 जून, 2026 को सेना छोड़ी थी। 22 सितंबर से 1 अक्टूबर तक पुलिस हिरासत में पूछताछ के दौरान व्यापक साजिश का खुलासा हुआ। मामला बोलारम पुलिस थाने में अपराध संख्या 207/2026 के रूप में भारतीय न्याय संहिता की धाराओं 331(4), 305, 249, 317(5), 61(2) और 49 तथा शस्त्र अधिनियम, 1959 की धाराओं 25(1AA), 25(1)(A) और 25(1)(B) के तहत दर्ज है। जांच जारी है।