रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह 6 अक्टूबर 2026 को ओडिशा में हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड यानी एचएएल के कोरापुट प्रभाग में एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम का उद्घाटन करेंगे। यह कार्यक्रम उस 2,000वें एयरो-इंजन की आपूर्ति का प्रतीक होगा, जिसे इस प्रभाग ने तैयार किया है।
यह अवसर एचएएल कोरापुट के लगभग छह दशकों के योगदान को भी रेखांकित करेगा। इस दौरान प्रभाग ने भारत की एयरोस्पेस और रक्षा विनिर्माण क्षमता को मजबूत करने के साथ-साथ सशस्त्र बलों की परिचालन तैयारियों में भी अहम भूमिका निभाई है।
कार्यक्रम का एक प्रमुख पक्ष शक्ति इंजनों के लिए दूसरी उत्पादन लाइन की स्थापना भी होगा। इस पर 218 करोड़ रुपये का निवेश किया गया है। अतिरिक्त उत्पादन क्षमता का उद्देश्य स्वदेशी हेलीकॉप्टर प्लेटफॉर्मों की बढ़ती जरूरतों को पूरा करना है, जिनमें ध्रुव एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर और प्रचंड लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर शामिल हैं।
2,000वें एयरो-इंजन की आपूर्ति एचएएल के कोरापुट प्रभाग की निर्माण यात्रा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। यह उपलब्धि लगभग छह दशकों में भारत की एयरोस्पेस और रक्षा विनिर्माण क्षमता में दिए गए उसके योगदान को सामने लाएगी।
शक्ति इंजनों के लिए दूसरी उत्पादन लाइन की स्थापना भी इस कार्यक्रम की प्रमुख विशेषताओं में शामिल रहेगी। इससे हेलीकॉप्टर प्लेटफॉर्मों के लिए स्वदेशी निर्माण क्षमता को और मजबूती मिलने की उम्मीद है, खासकर ध्रुव एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर और प्रचंड लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर के लिए।
यह कार्यक्रम सरकार की उस सोच को भी सामने रखेगा, जिसके तहत भारत को रक्षा उपकरणों का खरीदार नहीं, बल्कि रक्षा प्रणालियों का डिजाइनर, विकासकर्ता और निर्माता बनाने पर जोर दिया जा रहा है। स्वदेशी एयरो-इंजन क्षमता को इस दृष्टि का अहम हिस्सा माना गया है, क्योंकि प्रणोदन प्रणालियों की रणनीतिक महत्ता और तकनीकी जटिलता बहुत अधिक है।
एयरो-इंजनों का विकास और उत्पादन रक्षा विनिर्माण का एक महत्वपूर्ण क्षेत्र बना हुआ है। एचएएल कोरापुट में शक्ति इंजन उत्पादन का विस्तार हेलीकॉप्टर प्लेटफॉर्मों के लिए स्वदेशी विनिर्माण क्षमता को और मजबूत करने के उद्देश्य से किया जा रहा है।
इस कार्यक्रम में ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी, रक्षा उत्पादन सचिव संजीव कुमार और एचएएल के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक रवि के, सहित अन्य लोग उपस्थित रहेंगे।
इस तरह 6 अक्टूबर को एचएएल कोरापुट में होने वाला कार्यक्रम 2,000वें एयरो-इंजन की आपूर्ति और शक्ति इंजन की अतिरिक्त उत्पादन क्षमता, दोनों को सामने लाएगा। साथ ही यह भारत की एयरोस्पेस और रक्षा विनिर्माण क्षेत्र में कोरापुट प्रभाग के योगदान को भी प्रदर्शित करेगा।