बेंगलुरु पुलिस ने कर्नाटक के कलबुर्गी स्थित जेलों के उप महानिरीक्षक एम. सोमशेखर को 2018 में बेंगलुरु केंद्रीय कारागार से एक आजीवन कारावास की सजा पाए कैदी की अवैध रिहाई में कथित मदद करने के आरोप में गिरफ्तार किया है। यह रिहाई कथित तौर पर जाली सर्वोच्च न्यायालय आदेश के आधार पर की गई थी।
पुलिस के अनुसार सोमशेखर को 4 अक्टूबर को हिरासत में लिया गया और 9 अक्टूबर तक पुलिस अभिरक्षा में भेज दिया गया। जांचकर्ताओं का कहना है कि उन्होंने सहयोग नहीं किया और जालसाजी से जुड़ी जानकारी छिपाई।
जिस समय यह रिहाई हुई, उस समय सोमशेखर परप्पना अग्रहारा स्थित बेंगलुरु केंद्रीय कारागार के मुख्य अधीक्षक थे। कैदी शंकर ए. आराध्या 13 नवंबर 2018 को जेल से बाहर आ गया था। उसकी रिहाई एक ऐसे दस्तावेज के आधार पर की गई, जिसे 2 नवंबर 2018 का सर्वोच्च न्यायालय का आदेश बताया गया था। उसी दिन आराध्या ने उस कथित आदेश से जुड़ा 10,000 रुपये का जुर्माना भी भरा और उसे छोड़ दिया गया।
आम अदालत संबंधी पत्राचार जेल तक इलेक्ट्रॉनिक रूप से पहुंचता है, लेकिन इस मामले में कागजात हाथ से पहुंचाए गए थे। यह धोखाधड़ी करीब आठ साल तक पकड़ी नहीं गई। बाद में एक अज्ञात याचिका जेल महानिदेशक आलोक कुमार के कार्यालय तक पहुंची, जिसके बाद उप महानिरीक्षक, दक्षिण की जांच शुरू हुई।
20 मई 2026 को बेंगलुरु केंद्रीय कारागार के प्रभारी अधीक्षक ने परप्पना अग्रहारा पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई। सर्वोच्च न्यायालय के सहायक रजिस्ट्रार के कार्यालय से सत्यापन में पुष्टि हुई कि ऐसा कोई रिहाई आदेश जारी नहीं किया गया था। इसके बाद पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की धारा 465, 466, 468, 471, 472 और 420 के तहत मामला दर्ज किया, जिनमें मूल्यवान प्रतिभूति और न्यायिक अभिलेख की जालसाजी, जाली दस्तावेजों का उपयोग और धोखाधड़ी शामिल हैं।
जांच में तत्कालीन द्वितीय श्रेणी सहायक और बाद में प्रथम श्रेणी सहायक एस. श्रीकांत को सर्वोच्च न्यायालय आदेश की जालसाजी करने वाला बताया गया है। जेल के दोषी बंदी अनुभाग में कार्यरत श्रीकांत पर आरोप है कि आराध्या की पत्नी ने पति की रिहाई में मदद के लिए उससे संपर्क किया था।
एक पुलिस अधिकारी के अनुसार श्रीकांत ने 12 लाख रुपये की मांग की थी और 6 लाख रुपये मिलने के बाद जाली आदेश का इस्तेमाल कर रिहाई कराई गई। आराध्या की पत्नी ने यह भी कहा कि सोमशेखर ने रिहाई में मदद की थी। श्रीकांत, आराध्या और आराध्या की पत्नी को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है और वे न्यायिक हिरासत में हैं। उप पुलिस आयुक्त, इलेक्ट्रॉनिक सिटी एम. नारायण ने सोमवार को सोमशेखर की गिरफ्तारी की जानकारी दी।
आराध्या 2001 के फिरौती के लिए अपहरण मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहा था, जो चिकपेट पुलिस थाने में दर्ज हुआ था। फास्ट ट्रैक कोर्ट-1 ने 12 जुलाई 2004 को उसे भारतीय दंड संहिता की धारा 364ए और धारा 120बी के तहत दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास और 10,000 रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई थी।
उसकी अपीलें कर्नाटक उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय दोनों में खारिज हो गई थीं और सजा बरकरार रही। कुछ बाद की रिपोर्टों में मूल अपराध को हत्या बताया गया, लेकिन जेल शिकायत और विस्तृत पुलिस विवरण के अनुसार मामला 2001 का फिरौती के लिए अपहरण प्रकरण था। पहले की कवरेज में उसे शंकर अरुमुगम भी बताया गया था।
पुलिस अब यह जांच कर रही है कि जाली आदेश जेल के भीतर कैसे प्राप्त और मंजूर किया गया, रिहाई से पहले उसका सत्यापन हुआ या नहीं, और किन अधिकारियों ने रिहाई को अधिकृत किया। जांच जारी है।