चेन्नई में 16 अक्टूबर 2026 को लेफ्टिनेंट जनरल राजेश पुष्कर, एवीएसएम, वीएसएम, जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ (जीओसी-इन-सी), दक्षिणी कमान ने मुख्यालय दक्षिण भारत क्षेत्र का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने परिचालन तैयारी, रियर-एरिया सुरक्षा, रसद क्षमताओं और सैन्य प्रशिक्षण में उभरती प्रौद्योगिकियों के समावेश से जुड़ी पहलों की समीक्षा की।
दौरे के दौरान सेना कमांडर ने गठन की परिचालन तत्परता के विभिन्न पहलुओं का आकलन किया। विशेष रूप से उन्होंने रसद सहायता को मजबूत करने, सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाए रखने और तकनीकी प्रगति के जरिए सैन्य प्रशिक्षण की प्रभावशीलता बढ़ाने पर बल दिया।
समीक्षा में भारतीय सेना के उस निरंतर प्रयास को रेखांकित किया गया, जिसके तहत वह मजबूत सहायक ढांचे का निर्माण कर रही है और यह सुनिश्चित कर रही है कि गठन उभरती परिचालन चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना करने के लिए तैयार रहें।
उत्कृष्ट सेवा और पेशेवर समर्पण को मान्यता देते हुए लेफ्टिनेंट जनरल राजेश पुष्कर ने छह सेवारत कार्मिकों और पूर्व सैनिकों की उनके उल्लेखनीय समर्पण और योगदान के लिए सराहना की। उन्होंने उनके पेशेवर रवैये और कर्तव्यनिष्ठा की प्रशंसा करते हुए सेना की उत्कृष्ट परंपराओं को बनाए रखने में सेवारत सैनिकों और पूर्व सैन्यकर्मियों की महत्वपूर्ण भूमिका को स्वीकार किया।
दौरे के दौरान सेना कमांडर ने सभी रैंकों के कर्मियों को उभरती प्रौद्योगिकियों को अपनाने, नवाचार को बढ़ावा देने और पेशेवर उत्कृष्टता के उच्चतम मानकों को बनाए रखने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने बदलती सैन्य आवश्यकताओं के अनुरूप ढलने और परिचालन दक्षता बढ़ाने के लिए तकनीकी प्रगति का उपयोग करने के महत्व पर जोर दिया।
चेन्नई यात्रा के हिस्से के रूप में लेफ्टिनेंट जनरल पुष्कर ने एक स्वदेशी दूरसंचार सुविधा का भी दौरा किया, जहां उन्हें उन्नत ऑप्टिकल-फाइबर प्रौद्योगिकियों और सुरक्षित सैन्य संचार के लिए तैयार कनेक्टिविटी समाधानों की जानकारी मिली।
इस दौरे ने आधुनिक सैन्य अभियानों में विश्वसनीय और सुरक्षित संचार नेटवर्क के बढ़ते महत्व को रेखांकित किया, विशेषकर तब जब भारतीय सेना अपने परिचालन और रसद तंत्र में उन्नत प्रौद्योगिकियों को एकीकृत कर रही है।
स्वदेशी दूरसंचार उद्योग के साथ यह संवाद सेना-उद्योग सहयोग को मजबूत करने और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत पहल के तहत स्वावलंबन को बढ़ावा देने की भारतीय सेना की प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है।
दौरे ने दक्षिणी कमान के उस जोर को भी उजागर किया, जिसमें परिचालन तैयारी, तकनीकी आधुनिकीकरण, रसद लचीलापन और स्वदेशी रक्षा क्षमताओं पर ध्यान देकर अपनी इकाइयों को भविष्य की चुनौतियों के लिए मिशन-तत्पर बनाए रखने की बात शामिल है।