पंजाब के कपूरथला निवासी 35 वर्षीय अमनदीप सिंह माथन ने रॉयल ऑस्ट्रेलियन वायु सेना के अधिकारी प्रशिक्षण विद्यालय से स्नातक होकर पायलट ऑफिसर के रूप में कमीशन प्राप्त किया है। यह उपलब्धि भारतीय मूल के उस परिवार के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव है, जिसकी सैन्य सेवा की परंपरा कई पीढ़ियों से जुड़ी रही है।
कपूरथला के आर्मी स्कूल में पढ़े अमनदीप ने अपने परिवार की सशस्त्र बलों से पुरानी संबद्धता को आगे बढ़ाया है। उनके पिता सेवा सिंह और दादा निर्मल सिंह, दोनों भारतीय सेना में सेवा दे चुके हैं। उनकी मां के पिता और भाई ने भी भारतीय सेना में सेवा की थी। माथन परिवार लगभग दो दशक पहले ऑस्ट्रेलिया चला गया था और अब मेलबर्न में रहता है।
अमनदीप तीन भाइयों में से एक हैं। वे और उनके छोटे भाई कमलप्रीत, दोनों रॉयल ऑस्ट्रेलियन वायु सेना में हैं। कमलप्रीत को 2025 में विक्टोरिया के साले स्थित अधिकारी प्रशिक्षण विद्यालय में प्रारंभिक अधिकारी पाठ्यक्रम पूरा करने के बाद फ्लाइंग ऑफिसर (एरोनॉटिकल इंजीनियर) के रूप में कमीशन मिला था। उनके बड़े भाई सरबजीत सिंह माथन पहले ऑस्ट्रेलियाई सेना में सेवा दे चुके हैं और अब न्यू साउथ वेल्स पुलिस बल में पुलिस अधिकारी हैं।
ऑस्ट्रेलिया से द ट्रिब्यून से बात करते हुए अमनदीप की मां अमरजीत कौर ने कहा कि उनके बेटे अपने पिता के पदचिह्नों पर चल रहे हैं। उन्होंने बताया कि परिवार कई वर्ष पहले ऑस्ट्रेलिया गया था और उनके बेटों ने इस उपलब्धि तक पहुंचने के लिए बहुत मेहनत की है। छात्र वीजा पर शुरुआत करने के बाद उन्होंने नौकरी और पढ़ाई के बीच संतुलन बनाते हुए कड़ी प्रशिक्षण प्रक्रिया पूरी की और फिर बलों में शामिल हुए।
अमरजीत कौर ने कहा कि उनके पति की रक्षा पृष्ठभूमि और उसी वातावरण में बेटों की परवरिश ने उनके संकल्प को और मजबूत किया। उन्होंने यह भी बताया कि पासिंग आउट परेड के तुरंत बाद अमनदीप ने कहा था कि वर्दी उनके लिए “सिर्फ वर्दी नहीं, जीवन का तरीका” है। कमीशन मिलने के बाद परिवार को बधाई संदेशों की भरमार मिली है।
अमनदीप के पिता सेवा सिंह ने कहा कि माथन परिवार में सेवा की भावना पीढ़ियों से गहराई से बस चुकी है। उन्होंने बताया कि अमनदीप के दादा निर्मल सिंह और वे स्वयं भारतीय सेना में सेवा दे चुके हैं। उनके अनुसार, यह गौरवशाली विरासत अब ऑस्ट्रेलिया में भी आगे बढ़ रही है, जहां नई पीढ़ी राष्ट्र और समाज की सेवा के लिए प्रतिबद्ध है।
उन्होंने यह भी कहा कि ऑस्ट्रेलिया ने परिवार को मेहनत के बल पर नया जीवन बनाने के अवसर दिए और उस अनुभव से उपजी कृतज्ञता उनकी सेवा को कर्तव्य के रूप में देखने की भावना को और मजबूत करती है।
अमनदीप सिंह माथन का कमीशन, उनके भाई कमलप्रीत के बाद, ऑस्ट्रेलिया की रक्षा सेनाओं में भारतीय मूल के प्रवासी समुदाय के निरंतर योगदान को दर्शाता है। साथ ही यह भारत से शुरू हुई उस पारिवारिक सैन्य परंपरा को भी आगे बढ़ाता है, जो अब विदेश में भी बनी हुई है।