केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) लांस नायक और नायक की रैंक बहाल करने पर विचार कर रहा है। ये दोनों रैंक करीब 29 साल पहले समाप्त कर दी गई थीं और क्रमशः सिपाही तथा हेड कांस्टेबल में मिला दी गई थीं।
इस प्रस्ताव का उद्देश्य सीआरपीएफ कर्मियों में लंबे समय से बनी पदोन्नति की ठहराव की स्थिति को दूर करना और सिपाही स्तर पर करियर में आगे बढ़ने के अधिक अवसर देना है। सीआरपीएफ देश का सबसे बड़ा केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल है और इसमें लगभग 3.25 लाख कर्मी हैं।
चल रही चर्चा के तहत सीआरपीएफ मुख्यालय ने देशभर की फील्ड इकाइयों को कर्मियों के साथ परामर्श करने, जिसमें सैनिक सम्मेलन भी शामिल हैं, और अपनी समेकित राय भेजने के निर्देश दिए हैं। यह प्रतिक्रिया 18 अक्टूबर तक भेजे जाने की उम्मीद है, ताकि सक्षम प्राधिकारी द्वारा आगे विचार किया जा सके।
लांस नायक और नायक की रैंक 10 अक्टूबर 1997 के गृह मंत्रालय के आदेश के बाद सीआरपीएफ की संरचना से हटाई गई थी। यह निर्णय केंद्रीय पुलिस संगठनों में गैर-राजपत्रित कर्मियों की रैंक व्यवस्था और वेतनमान को युक्तिसंगत बनाने की कवायद का हिस्सा था।
पुनर्गठन के तहत लांस नायक को सिपाही में और नायक को हेड कांस्टेबल में मिला दिया गया था। हालांकि, भारतीय सेना की रैंक संरचना में लांस नायक और नायक आज भी शामिल हैं।
मर्जर से पहले सीआरपीएफ में सिपाही के रूप में भर्ती होने वाले कर्मी आमतौर पर करीब पांच साल की सेवा के बाद लांस नायक और लगभग 10 साल के बाद नायक बनते थे। इसके बाद वे आगे चलकर हेड कांस्टेबल बनते थे।
वर्तमान में सीआरपीएफ के सिपाहियों को अपनी पहली नियमित पदोन्नति के लिए दो दशक से अधिक समय तक प्रतीक्षा करनी पड़ सकती है। एक ही रैंक में लंबे समय तक बने रहने की यह स्थिति कर्मियों के लिए बड़ी चिंता बनी हुई है और इसी कारण करियर में आगे बढ़ने के लिए अतिरिक्त रास्ते बनाने पर चर्चा शुरू हुई है।
लांस नायक और नायक की बहाली से सिपाही और हेड कांस्टेबल के बीच दो मध्यवर्ती रैंक फिर से जुड़ जाएंगी। इससे सेवा अवधि के दौरान कर्मियों को अतिरिक्त पदोन्नति मिल सकती है और सिपाही स्तर पर लंबे समय तक ठहराव कम होने से मनोबल भी बेहतर हो सकता है।
विचाराधीन एक ढांचे के अनुसार कर्मी लगभग पांच साल की सेवा पूरी करने के बाद लांस नायक और करीब 10 साल बाद नायक बन सकते हैं, जिसके बाद हेड कांस्टेबल पद पर आगे बढ़ेंगे। हालांकि, अंतिम पदोन्नति मानदंड और सेवा शर्तें सरकार द्वारा अंततः स्वीकृत ढांचे पर निर्भर होंगी।
यह प्रस्ताव ऐसे समय सामने आया है जब केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल अग्निपथ योजना के तहत चार साल का कार्यकाल पूरा करने वाले पूर्व अग्निवीरों की भर्ती की तैयारी कर रहे हैं। पूर्व अग्निवीर सीआरपीएफ सहित सीएपीएफ में भर्ती के लिए पात्र हैं और सरकार ने पात्र उम्मीदवारों को आरक्षण तथा आयु-छूट लाभ देने की व्यवस्था की है।
मध्यवर्ती रैंक बहाल होने पर सीआरपीएफ में शामिल होने वाले कर्मियों, जिनमें सैन्य सेवा पूरी करने के बाद बल में आने वाले पूर्व अग्निवीर भी शामिल हैं, को करियर में आगे बढ़ने की अधिक स्पष्ट संरचना मिल सकती है।
हालांकि, लांस नायक और नायक की बहाली पर अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। सीआरपीएफ इकाइयों से राय एकत्र की जा रही है और उसे सक्षम प्राधिकारी के समक्ष प्रस्ताव रखने से पहले परखा जाएगा।
दोनों रैंकों की किसी भी बहाली के लिए भर्ती नियमों, वेतन संरचना, वरिष्ठता प्रावधानों और संगठनात्मक ढांचे में भी समान बदलाव करने होंगे।
यदि मंजूरी मिलती है, तो यह कदम 1997 के पुनर्गठन के बाद से सीआरपीएफ की सिपाही रैंक संरचना में सबसे बड़े बदलावों में से एक होगा और इससे हजारों कर्मियों को उनके करियर में पदोन्नति के अतिरिक्त अवसर मिल सकते हैं।