महाराष्ट्र सरकार ने राज्य के निवासी नौसेना के पहले बैच के 282 अग्निवीरों को पुलिस कांस्टेबल के रूप में नियुक्त किया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। नियुक्त होने वालों में 150 सीमैन डेकसाइड और 132 सीमैन इंजिनसाइड कर्मी शामिल हैं। केंद्रीय सरकार से पहली सूची मिलने के बाद नियुक्ति आदेश जारी किए गए।
मुख्यमंत्री फडणवीस ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा कि राज्य मंत्रिमंडल ने देश की सेवा करने वाले अग्निवीरों को सरकारी नौकरियों में आरक्षण देने का निर्णय लिया था। इसके बाद नियमों में आवश्यक बदलाव किए गए और 282 अग्निवीरों की नियुक्ति को मंजूरी दी गई। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र के निवासी नौसेना के 282 अग्निवीरों की पहली सूची राज्य सरकार को केंद्र से प्राप्त हुई थी।
फडणवीस ने बताया कि 282 अग्निवीरों में 150 सीमैन डेकसाइड और 132 सीमैन इंजिनसाइड शामिल हैं। इन्हें पुलिस कांस्टेबल के रूप में नियुक्त किया गया है और संबंधित आदेश भी उन्हें सौंप दिए गए हैं। उन्होंने सभी को उनकी नई भूमिका के लिए शुभकामनाएं दीं।
इन नियुक्तियों को राज्य मंत्रिमंडल के 29 सितंबर 2026 के फैसले के तहत लागू किया गया है। इस फैसले में महाराष्ट्र के मूल निवासी पूर्व अग्निवीरों के लिए समूह-सी की वर्दीधारी पदों पर 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण को मंजूरी दी गई थी। इनमें महाराष्ट्र पुलिस, राज्य रिजर्व पुलिस बल, अग्निशमन सेवा, तटीय सुरक्षा, जेल, गृह रक्षक और संबंधित संवर्ग शामिल हैं।
योग्य अग्निवीरों को बिना प्रतिस्पर्धी परीक्षा दिए और बिना मूल प्रशिक्षण दोहराए सीधी भर्ती के माध्यम से शामिल किया जा रहा है। इसके साथ आयु सीमा में छूट और अन्य रियायतों का भी प्रावधान है। नौसेना के कर्मियों को राज्य की तटीय सुरक्षा शाखा में प्राथमिकता दी जा रही है और आवश्यकता होने पर स्वीकृत पदों की सीमा में भी छूट दी जा सकती है।
पत्रकारों से बातचीत में फडणवीस ने पुष्टि की कि नौसेना से प्राप्त पहला बैच पूरी तरह तटीय सुरक्षा शाखा में शामिल कर लिया गया है। उन्होंने कहा कि सीमा पर और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में मिली उनकी व्यापक ट्रेनिंग तटीय सुरक्षा को मजबूत करेगी और यह दोनों पक्षों के लिए लाभकारी होगी।
उन्होंने यह भी कहा कि सेना और भारतीय वायु सेना के अग्निवीरों के लिए भी अवसर दिए जाएंगे। उनके अनुसार, आगे बढ़ते हुए पुलिस बल में शामिल होने के इच्छुक अग्निवीरों को महाराष्ट्र पुलिस में लिया जाएगा।
यह कदम केंद्र की अग्निपथ योजना के तहत सेवा पूरी करने वाले कर्मियों को रोजगार उपलब्ध कराने की दिशा में है। यह योजना 2022 में शुरू की गई थी। इसके तहत भर्ती कर्मी चार वर्ष तक सेवा देते हैं, जिसके बाद लगभग 25 प्रतिशत को सशस्त्र बलों में रखा जाता है और बाकी 75 प्रतिशत को सेवा से मुक्त कर दिया जाता है। महाराष्ट्र ने संकेत दिया है कि अपनी अवधि पूरी करने वाले पहले बैच के लगभग 2,496 अग्निवीर राज्य के निवासी हैं।
यह नीति अन्य राज्यों की इसी तरह की व्यवस्थाओं के अनुरूप है। असम में कुछ कांस्टेबल स्तर के पदों पर 12 प्रतिशत आरक्षण है, जबकि गुजरात में पुलिस में सीधी भर्ती के साथ 20 प्रतिशत आरक्षण दिया जाता है। इस नीति का उद्देश्य पूर्व अग्निवीरों के अनुशासित प्रशिक्षण और कौशल का राज्य की वर्दीधारी सेवाओं में उपयोग करना और उन्हें दूसरा करियर देने का अवसर उपलब्ध कराना है।