नई दिल्ली/लखनऊ, 23 अक्टूबर 2026: केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो ने बिहार चारा घोटाले के मामलों में 25 वर्षों से अधिक समय से वांछित फरार अभियुक्त सत्येंद्र कुमार को लखनऊ रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार किया है। यह गिरफ्तारी 22 अक्टूबर की आधी रात के आसपास उस समय हुई, जब वह मध्य प्रदेश के गुना से उत्तर प्रदेश के लखनऊ तक ट्रेन से यात्रा कर रहा था।
कुमार का नाम 2001 में दाखिल सीबीआई के आरोपपत्र में शामिल था। इसके बाद वह तुरंत फरार हो गया और मुकदमे का सामना करने के लिए अदालत में पेश नहीं हुआ। इसी कारण उसके खिलाफ स्थायी गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया था। एजेंसी पिछले 25 वर्षों से उसकी तलाश कर रही थी।
लगातार भौतिक निगरानी, तकनीकी निगरानी और मानवीय खुफिया जानकारी के जरिए जांचकर्ताओं ने कुमार की लोकेशन नेपाल में पता की, जहां बताया गया कि वह एक छद्म पहचान के साथ रह रहा था। हाल ही में वह भारत लौटा था। 22 अक्टूबर को गुना से लखनऊ तक उसकी ट्रेन यात्रा की पक्की सूचना मिलने के बाद सीबीआई ने एक विशेष टीम बनाई और उसे ट्रेन के पहुंचने से काफी पहले लखनऊ रेलवे स्टेशन पर तैनात कर दिया। कुमार को आधी रात के आसपास हिरासत में ले लिया गया।
उसे ट्रांजिट रिमांड पर झारखंड के रांची लाया जा रहा है, जहां सक्षम अदालत के समक्ष पेश कर मुकदमे की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।
बिहार चारा घोटाला अविभाजित बिहार के पशुपालन विभाग से 1990 के दशक में बड़े पैमाने पर सार्वजनिक धन की हेराफेरी से जुड़ा था। इसमें 1992 से 1995 के बीच चारे, दवाओं और उपकरणों के फर्जी बिलों के जरिए लगभग 950 करोड़ रुपये की करीब 55 फर्जी निकासी के मामले शामिल थे। इन मामलों से राजनेताओं, नौकरशाहों, आपूर्तिकर्ताओं और बिचौलियों की मिलीभगत सामने आई थी। बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव को इससे जुड़े पांच मामलों में दोषी ठहराया जा चुका है।
रिपोर्टों के अनुसार, कुमार पर घोटाले में आपूर्तिकर्ता होने का आरोप था। हालांकि, सीबीआई ने अपने आधिकारिक बयान में उसकी भूमिका के बारे में इससे आगे कोई विस्तृत जानकारी नहीं दी है।
यह गिरफ्तारी दो दशकों से अधिक समय से चल रही और अंतरराष्ट्रीय सीमाओं तक फैली तलाश का अंत है। मामला अभी भी रांची की विशेष अदालत के अधिकार क्षेत्र में है।