नई दिल्ली, 24 अक्टूबर 2026: वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने 20 अक्टूबर 2026 को दुंडिगल स्थित वायु सेना अकादमी में राष्ट्रीय कैडेट कोर की सीनियर विंग कैडेट जक्कुला तेजस्वी रेड्डी के साथ एक विशेष उड़ान sortie की। इस अवसर ने युवा कैडेट को भारतीय वायु सेना के शीर्ष अधिकारी के साथ सैन्य उड्डयन का दुर्लभ अनुभव दिया।
यह उड़ान उस विशेष अवसर से पहले की गई, जब वायु सेना प्रमुख अपनी पहली उड़ान प्रशिक्षक के साथ अपनी अंतिम उड़ान sortie करने वाले थे। इसी वजह से यह मौका और भी महत्वपूर्ण बन गया।
उड़ान से पहले कैडेट तेजस्वी ने व्यापक पूर्व-उड़ान तैयारी की। इसमें कॉकपिट से परिचय, सुरक्षा ब्रीफिंग, इजेक्शन प्रक्रिया से परिचय और अनिवार्य चिकित्सा जांच शामिल थी।
एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने स्वयं कैडेट को किरण विमान की विशेषताओं और मुख्य घटकों की जानकारी दी। उन्होंने विमान के इंजन की कार्यप्रणाली, कॉकपिट प्रक्रियाओं और आवश्यक सुरक्षा तंत्र के बारे में भी समझाया।
उड़ान के दौरान वायु सेना प्रमुख ने विभिन्न उड़ानाभ्यास, उड़ान कोण और तीखे मोड़ दिखाए। इससे कैडेट को सैन्य उड़ान के तकनीकी और परिचालन पहलुओं का प्रत्यक्ष अनुभव मिला।
एक उत्साहवर्धक पहल के तहत सीएएस ने कैडेट तेजस्वी को अपनी प्रत्यक्ष देखरेख में उड़ानाभ्यास का अभ्यास भी कराया। इससे उसे व्यावहारिक और प्रत्यक्ष सीखने का मूल्यवान अवसर मिला।
इस उड़ान sortie ने युवा एनसीसी एयर विंग कैडेट को विमानन का व्यावहारिक अनुभव दिया और एविएटर बनने की उसकी आकांक्षा को और मजबूत किया। इस अनुभव ने युवाओं को मार्गदर्शन देने और उन्हें सशस्त्र बलों में करियर अपनाने के लिए प्रेरित करने के भारतीय वायु सेना के संकल्प को भी दर्शाया।
राष्ट्रीय कैडेट कोर युवाओं में नेतृत्व गुण, अनुशासन, आत्मविश्वास और तकनीकी कौशल विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। अपनी एयर विंग प्रशिक्षण योजनाओं के माध्यम से कैडेट विमानन से जुड़ा ज्ञान और व्यावहारिक अनुभव प्राप्त करते हैं तथा भारतीय वायु सेना में संभावित करियर की दिशा में आगे बढ़ते हैं।
यह पहल विकसित भारत @2047 की व्यापक परिकल्पना से भी जुड़ी है, जो कौशल विकास, नेतृत्व के अवसर और राष्ट्र निर्माण में भागीदारी के जरिए युवाओं को सशक्त बनाने पर बल देती है।
एयर चीफ मार्शल एपी सिंह और कैडेट जक्कुला तेजस्वी रेड्डी के बीच यह संवाद वरिष्ठ सैन्य नेतृत्व की ओर से अगली पीढ़ी के भावी एविएटरों, विशेषकर सैन्य उड्डयन में करियर बनाने की इच्छुक युवा महिलाओं, को प्रोत्साहन देने का प्रेरक उदाहरण बना।