केंद्र सरकार सेवारत सैन्यकर्मियों के निजी वाहनों को बिना बैरियर वाली नई टोल व्यवस्था में भी छूट देने के लिए एक तंत्र तैयार करने पर विचार कर रही है। देश में करीब 14 लाख सेवारत सैन्यकर्मी हैं। जिन राजमार्गों पर मल्टी-लेन फ्री फ्लो (MLFF) प्रणाली शुरू हुई है, वहां निजी वाहनों से गुजरने वाले सैन्यकर्मियों को ई-चालान जारी होने की समस्या सामने आई है।
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने रक्षा मंत्रालय के साथ इस पर चर्चा शुरू की है। मकसद ऐसी डिजिटल व्यवस्था बनाना है, जो छूट के पात्र निजी वाहनों की पहचान कर सके और उन्हें बिना रुके गुजरने दे। एक प्रस्ताव के तहत इन वाहनों को FASTag दिया जा सकता है और उसके वार्षिक पास की लागत रक्षा मंत्रालय वहन कर सकता है। हालांकि, खर्च किस मंत्रालय के जिम्मे आएगा, इस पर अभी सहमति नहीं बनी है। दूसरा विकल्प विशेष FASTag का है, जो वाहन के गुजरने का रिकॉर्ड रखे, लेकिन टोल न काटे।
इस मुद्दे का समाधान MLFF के विस्तार में देरी रोकने के लिए भी जरूरी माना जा रहा है। वित्त वर्ष 2027-28 के अंत तक देश के करीब 1,150 टोल प्लाजा को इस प्रणाली के दायरे में लाने की उम्मीद है। फिलहाल 10 से भी कम टोल प्लाजा पर यह व्यवस्था लागू है। 100 से अधिक अन्य प्लाजा के लिए बोलियां आमंत्रित की जा चुकी हैं। मंत्रालय को चालू वित्त वर्ष के अंत तक 300–400 और प्लाजा के लिए बोलियां आमंत्रित किए जाने की उम्मीद है। मंत्रालय ने पहले इसी साल के अंत तक लगभग पूरा नेटवर्क इसके दायरे में आने की संभावना जताई थी, लेकिन काम अपेक्षाकृत धीमी गति से आगे बढ़ा है।
मौजूदा व्यवस्था में सैन्यकर्मी टोल प्लाजा पर पहचान पत्र दिखाकर अपने निजी वाहन के लिए टोल छूट ले सकते हैं। MLFF में न बैरियर होते हैं और न ही कर्मचारी पहचान पत्र की जांच करते हैं। सड़क के ऊपर लगे ढांचों पर स्वचालित नंबर प्लेट पहचान कैमरे और रेडियो फ्रीक्वेंसी पहचान रीडर लगाए जाते हैं। ये सामान्य राजमार्ग गति से गुजरते वाहनों की पहचान कर टोल की प्रक्रिया पूरी करते हैं। ऐसे में डिजिटल रिकॉर्ड में छूट दर्ज न होने पर पात्र वाहन को भी बकाया टोल का ई-चालान मिल सकता है।
नाम न जाहिर करने की शर्त पर एक सरकारी अधिकारी ने बताया कि तकनीक का परीक्षण किया जा रहा है और देशभर में लागू करने से पहले ऐसी समस्याएं दूर करने की कोशिश हो रही है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय तथा रक्षा मंत्रालय को ईमेल से भेजे गए सवालों का जवाब नहीं मिला।
मई 2026 में आई रिपोर्टों में भी बताया गया था कि मंत्रालय टोल से छूट प्राप्त वाहनों के लिए विशेष FASTag की संभावना तलाश रहा है। इनमें सैन्यकर्मियों के वाहन भी शामिल हैं। इससे बिना रकम काटे या जुर्माना लगाए वाहनों की आवाजाही का डिजिटल रिकॉर्ड रखा जा सकेगा। सशस्त्र बलों के आधिकारिक वाहनों की पहचान विशेष रक्षा नंबर प्लेट से की जा सकती है और सुरक्षा कारणों से उनकी आवाजाही का डेटा बाद में हटाया जा सकता है। निजी वाहनों के मामले में चुनौती अधिक है, क्योंकि उनका स्वामित्व और इस्तेमाल सीधे किसी सरकारी विभाग से जुड़ा नहीं होता।
पूर्व सड़क परिवहन एवं राजमार्ग सचिव और पूर्व रक्षा सचिव गिरिधर अरमाने के मुताबिक, मंत्रालय वाहनों का विवरण अपने डेटाबेस में जोड़ सकता है या ऐसे विशेष FASTag जारी कर सकता है जिनसे बिना किसी सीमा के मुफ्त आवाजाही संभव हो। एक अन्य विकल्प सामान्य FASTag इस्तेमाल करने और संबंधित विभाग से टोल भुगतान की प्रतिपूर्ति कराने का है। उन्होंने यह भी कहा कि दोनों मंत्रालयों के बीच सहमति के आधार पर सड़क परिवहन मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय को आधिकारिक उद्देश्यों के लिए तय संख्या में मुफ्त FASTag जारी करने का अधिकार दे सकता है।
इस व्यवस्था पर सालाना कई सौ करोड़ रुपये का खर्च आ सकता है। थलसेना, नौसेना और वायुसेना में कुल करीब 14 लाख सेवारत सैन्यकर्मी हैं, लेकिन छूट के पात्र निजी वाहनों की सटीक संख्या सार्वजनिक नहीं है। वित्त वर्ष 2026-27 में मौजूदा FASTag वार्षिक पास की कीमत 3,075 रुपये है। इससे एक साल में राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेसवे के टोल प्लाजा पर अधिकतम 200 बार गुजरने की सुविधा मिलती है। यदि ऐसे पास 10 लाख वाहनों के लिए लिए जाएं, तो लागत 307.5 करोड़ रुपये होगी। अंतिम खर्च पात्र वाहनों की संख्या और तय होने वाले नियमों पर निर्भर करेगा।
EY इंडिया के पार्टनर और नेशनल इन्फ्रास्ट्रक्चर लीडर कुलजीत सिंह ने इस व्यवस्था को निर्बाध आवाजाही के लिए जरूरी बताया, खासकर सीमावर्ती इलाकों और पश्चिमी कमान मुख्यालय जैसे प्रमुख रक्षा कार्यालयों के आसपास। उनके अनुसार, टोल प्रणाली और रक्षा संबंधी छूट के बीच बेहतर तालमेल से MLFF की कार्यकुशलता बढ़ेगी और बिना बैरियर यात्रा का उद्देश्य भी बना रहेगा।
व्यवस्था की विश्वसनीयता के लिए वाहनों की सही पहचान, समय-समय पर पात्रता की जांच, FASTag की नकल या दुरुपयोग रोकना और डेटाबेस को तत्काल अद्यतन रखना जरूरी होगा। विशेष FASTag पहचान संकेतों या FASTag अथवा उससे जुड़े खाते में छूट की स्थिति दर्ज करने से मैनुअल जांच की जरूरत हट सकती है। प्रस्तावित ढांचे को MLFF के देशव्यापी विस्तार से पहले अंतिम रूप दिए जाने की उम्मीद है।