पोर्ट ब्लेयर, 1 नवंबर 2026: अंडमान और निकोबार कमान के तहत अंडमान और निकोबार जोन के मुख्य अभियंता मुख्यालय ने टिकाऊ और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप रक्षा बुनियादी ढांचे पर ‘वर्क्स संगोष्ठी 2026’ आयोजित की। 29 और 30 अक्टूबर को हुई इस संगोष्ठी में द्वीपीय क्षेत्रों में ऐसी सैन्य सुविधाएं विकसित करने पर चर्चा हुई, जो कठिन परिस्थितियों का सामना कर सकें और पर्यावरण पर कम असर डालें।
दो दिवसीय संगोष्ठी की थीम पर्यावरण संरक्षण के साथ टिकाऊ द्वीपों और भविष्य की चुनौतियों का सामना करने में सक्षम बुनियादी ढांचे के निर्माण पर केंद्रित थी। इसमें आधुनिक इंजीनियरिंग समाधानों को अपनाते हुए द्वीपों में निर्माण से जुड़ी विशिष्ट परिचालन और रसद चुनौतियों का ध्यान रखने पर जोर दिया गया।
चर्चा में नई निर्माण तकनीक, हरित बुनियादी ढांचा, नवीकरणीय ऊर्जा और डिजिटल इंजीनियरिंग जैसे विषय शामिल रहे। इसके अलावा जल और कचरे के टिकाऊ प्रबंधन तथा कठिन परिस्थितियों में भी काम करने में सक्षम हवाई अड्डों, बंदरगाहों, समुद्री सुविधाओं और भूमिगत ढांचे के विकास पर विचार किया गया।
अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह की भौगोलिक, पर्यावरणीय और रसद संबंधी बाधाओं से निपटने पर विशेष ध्यान दिया गया। प्रतिभागियों ने ऐसी नई तकनीकों और टिकाऊ इंजीनियरिंग पद्धतियों पर चर्चा की, जिनसे पर्यावरणीय प्रभाव कम रखते हुए सैन्य अभियानों की तैयारी मजबूत की जा सके।

संगोष्ठी में मिलिट्री इंजीनियर सर्विसेज (एमईएस), शैक्षणिक संस्थानों और उद्योग जगत के बीच सहयोग की जरूरत भी रेखांकित की गई। विचार-विमर्श का केंद्र व्यावहारिक समाधान तलाशना, पायलट परियोजनाएं विकसित करना और नए विचारों को जलवायु संबंधी चुनौतियों का सामना करने में सक्षम रक्षा बुनियादी ढांचे के लिए अमल योग्य रणनीतियों में बदलना रहा।
हिंद महासागर क्षेत्र में अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह की स्थिति रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। यहां विश्वसनीय और टिकाऊ सैन्य बुनियादी ढांचा परिचालन क्षमताओं तथा दीर्घकालिक रक्षा तैयारियों के लिए जरूरी है। संगोष्ठी का उद्देश्य क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियों और पर्यावरणीय संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए रक्षा आधुनिकीकरण और पर्यावरण संरक्षण को साथ लेकर चलना था।