उत्तराखंड के चमोली जिले में जोशीमठ के पास 30 अक्टूबर 2026 को हुए हेलीकॉप्टर हादसे में सेवानिवृत्त कर्नल हिमांशु सभरवाल समेत छह लोगों की मौत हो गई। 48 वर्षीय सभरवाल ट्रांस भारत एविएशन प्राइवेट लिमिटेड का हेलीकॉप्टर उड़ा रहे थे। सेना से समयपूर्व सेवानिवृत्ति लेने के बाद वह व्यावसायिक हेलीकॉप्टर सेवाओं से जुड़ गए थे।
पश्चिमी दिल्ली के शालीमार बाग निवासी कर्नल सभरवाल ने भारतीय सेना की आर्मी एविएशन कोर में सेवा दी थी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उनका सैन्य सेवाकाल सिख लाइट इन्फैंट्री से भी जुड़ा रहा था और उन्होंने कमान की जिम्मेदारी भी संभाली थी।
दुर्घटनाग्रस्त हेलीकॉप्टर एक इंजन वाला AS350B3 था, जिसका पंजीकरण नंबर VT-HCX था। उसने 30 अक्टूबर को दोपहर करीब 1:14 बजे बदरीनाथ के सिविल हेलीपैड से देहरादून के सहस्रधारा हेलीपैड के लिए उड़ान भरी थी। उसमें पायलट सभरवाल के अलावा पांच यात्री सवार थे।
उड़ान भरने के कुछ ही समय बाद जोशीमठ घाटी के ऊपर हेलीकॉप्टर से संचार संपर्क टूट गया और वह ट्रैकिंग प्रणाली से भी गायब हो गया। क्षेत्र में तैनात सैन्यकर्मियों ने कथित तौर पर हाथी पर्वत के पास धुआं और हेलीकॉप्टर को तेजी से नीचे आते देखा था। बाद में उसका मलबा चाई गांव के पास जंगल वाले पहाड़ी इलाके में मिला। यह स्थान जेपी पावर हाउस और मारवाड़ी पुल के करीब है।
हादसे में मारे गए पांचों यात्री कर्नाटक के थे। उनकी पहचान बेंगलुरु की सेंट्रल क्राइम ब्रांच में तैनात 44 वर्षीय पुलिस इंस्पेक्टर अरुण सालुंखे, एच.एस. नटराजा, प्रतापा, सुधीर के. और वी.बी. शंकर गौड़ा के रूप में हुई।
तलाशी और शवों को निकालने के अभियान में सेना, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, उत्तराखंड पुलिस और जिला प्रशासन की टीमें शामिल रहीं। दुर्गम पहाड़ी इलाके, कम दृश्यता और खराब मौसम के कारण अभियान में कठिनाई आई। बाद में सभी छह शव दुर्घटनास्थल से निकाल लिए गए।
नागर विमानन महानिदेशालय ने प्रारंभिक आकलन शुरू किया है। विमानन प्राधिकरण हादसे की परिस्थितियों की जांच कर रहे हैं। क्षेत्र में खराब मौसम और कम दृश्यता की जानकारी सामने आई है, लेकिन दुर्घटना का सटीक कारण अभी तय नहीं हुआ है। ट्रांस भारत एविएशन ने एहतियात के तौर पर अपने हेलीकॉप्टर बेड़े की उड़ानें रोक दी हैं।
कर्नल सभरवाल लंबे समय से पश्चिमी शालीमार बाग में रहते थे। उन्होंने इलाके के मॉडर्न पब्लिक स्कूल से बारहवीं की पढ़ाई पूरी की थी। बचपन से उन्हें जानने वाले स्थानीय निवासियों ने उन्हें हंसमुख, सम्मान देने वाला और उदार व्यक्ति बताया। पड़ोसियों के मुताबिक, व्यस्त पेशेवर जीवन के बावजूद वह अपने मोहल्ले से जुड़े रहे।
उनके पड़ोसी राकेश ग्रोवर ने बताया कि सेना में सेवा और कमान की जिम्मेदारियां संभालने के कारण इलाके में लोग उन्हें “कर्नल” के नाम से जानते थे। पूर्व सहकर्मियों और सैन्य अधिकारियों ने भी उन्हें श्रद्धांजलि दी। उन्होंने सभरवाल को कुशल पायलट और विनम्र अधिकारी के रूप में याद किया, जो जूनियर साथियों के साथ अपना ज्ञान और अनुभव साझा करते थे।
नागरिक विमानन में अपने करियर के दौरान सभरवाल विशेष हेलीकॉप्टर अभियानों से भी जुड़े रहे। इनमें गुरु राम दास जी के प्रकाश पर्व पर अमृतसर स्थित श्री हरमंदिर साहिब क्षेत्र में हेलीकॉप्टर से पुष्पवर्षा करना भी शामिल था। बताया जाता है कि वह ऐसी धार्मिक और औपचारिक उड़ानों में भाग लेने को सौभाग्य मानते थे।
उनके परिवार में पत्नी, दो बच्चे, माता-पिता और छोटे भाई कुणाल सभरवाल हैं। कुणाल दिल्ली में वकालत करते हैं।