नई दिल्ली, 2 नवंबर 2026: कर्नल विनय भारद्वाज भारतीय सेना से सेवानिवृत्त हो गए हैं। रिपोर्टों के अनुसार, वह सेना की पूर्व खुफिया इकाई टेक्निकल सपोर्ट डिवीजन (टीएसडी) से जुड़े रहे थे।
‘बर्डी’ के नाम से जाने जाने वाले भारद्वाज कथित तौर पर उन अधिकारियों में शामिल थे, जिन्हें टीएसडी में सेवा के लिए चुना गया था। इस विशेष सैन्य खुफिया इकाई का गठन 2010 में तत्कालीन सेना प्रमुख जनरल वी.के. सिंह के कार्यकाल में हुआ था।
वर्ष 2008 के मुंबई आतंकी हमलों के बाद बढ़ी राष्ट्रीय सुरक्षा चिंताओं के बीच टीएसडी बनाई गई थी। सैन्य खुफिया महानिदेशालय के अधीन इस इकाई को संवेदनशील खुफिया जानकारी जुटाने और गुप्त अभियान चलाने की जिम्मेदारी दी गई थी। इसका खास ध्यान पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठनों से जुड़े सुरक्षा खतरों पर था।
रिपोर्टों के मुताबिक, भारद्वाज इससे पहले भारत की बाहरी खुफिया एजेंसी रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) से भी जुड़े रहे थे। उन्हें जम्मू-कश्मीर और पूर्वोत्तर में आतंकी समूहों से संबंधित खुफिया अभियानों का अनुभव होने की बात भी कही गई है।
कामकाज गोपनीय होने के कारण टीएसडी की गतिविधियों के बारे में सार्वजनिक तौर पर बहुत कम जानकारी उपलब्ध थी। बाद में निगरानी उपकरणों, खुफिया अभियानों और गुप्त कोष के इस्तेमाल से जुड़े आरोपों को लेकर यह इकाई विवादों में आ गई। वर्ष 2012 में जनरल वी.के. सिंह के सेना प्रमुख पद से सेवानिवृत्त होने के बाद टीएसडी को भंग कर दिया गया और उसकी गतिविधियां जांच तथा सार्वजनिक पड़ताल के दायरे में आईं।

भारद्वाज की सेवानिवृत्ति के बाद प्रसारित एक सम्मान संदेश में उन्हें टीएसडी से जुड़ा अंतिम सेवारत अधिकारी बताया गया और उनकी सैन्य सेवा को याद किया गया। उनके अभियान संबंधी करियर का बड़ा हिस्सा अब भी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है।