सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने चंडीमंदिर स्थित पश्चिमी कमान मुख्यालय का दौरा कर कमान की सैन्य तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने क्षमता बढ़ाने की पहल और भारतीय सशस्त्र बलों के सामने उभरती सुरक्षा चुनौतियों पर भी चर्चा की।
समीक्षा के दौरान जनरल सेठ ने बदलते सुरक्षा माहौल के अनुरूप युद्ध क्षमता मजबूत करने के उपायों पर गौर किया। उन्होंने उच्च स्तर की तैयारी बनाए रखने और सैन्य कार्रवाई को अधिक प्रभावी बनाने के लिए आधुनिक तकनीक अपनाने पर जोर दिया।
सेना, नौसेना और वायुसेना के वरिष्ठ कमांडरों से बातचीत में उन्होंने तीनों सेवाओं के बीच संयुक्तता, एकीकृत युद्ध संचालन और तकनीक को सैन्य इस्तेमाल में शामिल करने की जरूरत बताई। उनके मुताबिक, आधुनिक अभियानों में विभिन्न क्षेत्रों की क्षमताओं, संसाधनों और संचालन संबंधी योजना का बेहतर तालमेल जरूरी है।

जनरल सेठ ने उभरती सुरक्षा चुनौतियों के अनुरूप लगातार क्षमता विकसित करने और उन्नत तकनीक को सैन्य अभियानों में शामिल करने पर भी बल दिया।
‘जय से विजय’ के अपने दृष्टिकोण को दोहराते हुए उन्होंने कहा कि भविष्य के खतरों और अभियानों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए सेना को एकीकृत, फुर्तीला और तकनीक-सक्षम बनाना होगा।

जनरल सेठ ने 30 जून 2026 को सेना प्रमुख का 31वां पदभार संभालने के बाद ‘विजय’ ढांचा पेश किया था। इसमें पांच प्राथमिकताएं हैं—सीमाओं पर सतर्कता, नवाचार और रूपांतरण, संयुक्तता और एकीकरण, आत्मनिर्भरता तथा योद्धा-प्रथम।

इस ढांचे का उद्देश्य सेना की अभियान क्षमता मजबूत करने के साथ स्वदेशी रक्षा तकनीक, सेवाओं के बीच बेहतर तालमेल और सैन्यकर्मियों के कल्याण व सशक्तीकरण को बढ़ावा देना है।
पश्चिमी कमान की जिम्मेदारी पाकिस्तान से लगी सीमा के अहम क्षेत्रों की सुरक्षा से जुड़ी है। इन क्षेत्रों में उसकी तैयारी भारत की पश्चिमी रक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है।