रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने दिवाली पर सिक्किम के शेराथांग युद्ध स्मारक पहुंचकर देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले सैनिकों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने राज्य के अग्रिम इलाकों में तैनात भारतीय सेना के जवानों से भी मुलाकात की।
सिंह ने युद्ध स्मारकों को साहस, बलिदान और राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि ये स्मारक शहीदों की याद संजोने के साथ आने वाली पीढ़ियों को उन मूल्यों की याद भी दिलाते हैं, जिनके लिए सैनिकों ने प्राण न्योछावर किए।
स्मारकों के महत्व पर बात करते हुए उन्होंने कहा, “स्मारक मृतकों के लिए नहीं, बल्कि जीवित लोगों के लिए होते हैं।” उन्होंने कहा कि ऐसे स्मारक देश की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान देने वाले सैनिकों की स्मृति को जीवित रखते हैं।

रक्षा मंत्री ने सिक्किम के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण अग्रिम क्षेत्रों में तैनात जवानों से बातचीत की। उन्होंने कठिन पहाड़ी भूभाग और बेहद खराब मौसम के बावजूद उनके समर्पण, सैन्य प्रतिबद्धता और ऊंचे मनोबल की सराहना की।
दिवाली के दीयों से सैनिकों की तुलना करते हुए सिंह ने उन्हें ऐसे “दीये” बताया, जो चुपचाप अंधकार से लड़ते हैं और देश के घरों तक सुरक्षा का उजाला पहुंचाते हैं। उन्होंने कहा कि जब लाखों लोग परिवारों के साथ त्योहार मनाते हैं, तब सीमाओं पर सतर्क जवानों की मौजूदगी से देश में शांति और सुरक्षा का माहौल बना रहता है।

सिंह ने सीमाओं की रक्षा कर रहे जवानों के साथ दिवाली मनाने पर गर्व जताया। उन्होंने सैनिकों के साथ-साथ उनके परिवारों के त्याग को भी याद किया, जिन्हें सैन्य जिम्मेदारियों के कारण अहम त्योहारों पर अपने प्रियजनों से दूर रहना पड़ता है। रक्षा मंत्री ने सीमा पर तैनात सैन्यकर्मियों और उनके परिवारों को दिवाली की शुभकामनाएं दीं।
शेराथांग का दौरा ऊंचाई वाले सीमावर्ती इलाकों में सेवा की कठिनाइयों की ओर भी ध्यान दिलाता है, जहां लगातार सतर्कता के लिए शारीरिक सहनशक्ति, अनुशासन और दृढ़ संकल्प की जरूरत होती है।