भारत फोर्ज को स्वदेशी एडवांस्ड टोएड आर्टिलरी गन सिस्टम (ATAGS) के बड़े पैमाने पर उत्पादन की मंजूरी मिल गई है। कंपनी वित्त वर्ष 2027 में 155 मिमी/52 कैलिबर की तोपों का धारावाहिक उत्पादन शुरू करेगी और उसे वित्त वर्ष 2028 की पहली तिमाही से राजस्व मिलने की उम्मीद है।
यह जानकारी कंपनी ने 5 नवंबर 2026 को जारी वित्त वर्ष 2027 की दूसरी तिमाही और पहली छमाही की निवेशक प्रस्तुति में दी। चेयरमैन और प्रबंध निदेशक बी.एन. कल्याणी ने कहा कि जरूरी मंजूरी मिल गई है और उत्पादन वित्त वर्ष 2027 में शुरू होगा। कंपनी ने स्पष्ट किया कि ऑर्डर में देरी नहीं हुई थी; विलंब केवल उत्पादन मंजूरी की प्रक्रिया में था।
तोपों का ऑर्डर और उत्पादन मंजूरी
रक्षा मंत्रालय ने मार्च 2025 में करीब 6,900 करोड़ रुपये के अनुबंध किए थे। इनमें 307 ATAGS तोपों और उन्हें खींचने के लिए 327 उच्च गतिशीलता वाले 6×6 वाहनों की खरीद शामिल है। भारतीय सेना के लिए निजी क्षेत्र से टो की जाने वाली तोपों की यह पहली बड़ी खरीद थी।
307 तोपों का उत्पादन भारत फोर्ज और टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड (TASL) के बीच 60:40 के अनुपात में बांटा गया है। सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी होने के कारण भारत फोर्ज को करीब 4,000 करोड़ रुपये मूल्य की 184 तोपें मिलीं, जबकि TASL को 123 तोपों का ऑर्डर दिया गया।
बड़े पैमाने पर उत्पादन की मंजूरी से कंपनियां विकास और सीमित प्रोटोटाइप निर्माण से पूर्ण उत्पादन की ओर बढ़ सकती हैं। भारत फोर्ज ने पहले कहा था कि उत्पादन शुरू करने से पहले पहले उत्पादन मॉडल (FOPM) और उससे जुड़ी मंजूरियां पूरी होनी थीं। नई मंजूरी के साथ यह चरण पूरा हो गया है।
उत्पादन और डिलीवरी का कार्यक्रम
भारत फोर्ज को उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2027 की दूसरी छमाही में उत्पादन गतिविधियां बढ़ेंगी। कंपनी की 184 तोपों की डिलीवरी वित्त वर्ष 2028 की पहली तिमाही में शुरू होने और करीब चार साल तक चलने का अनुमान है।
संकेतात्मक कार्यक्रम के तहत शुरुआत में ऑर्डर की करीब 10 फीसदी तोपें दी जाएंगी। इसके बाद डिलीवरी की हिस्सेदारी बढ़कर लगभग 15 फीसदी और फिर 20 फीसदी हो सकती है; आगे के वर्षों में भी इसी तरह की मात्रा का अनुमान है। वास्तविक गति सेना की तोपों को अपने संचालन में शामिल करने, प्रशिक्षण और उन्हें सेवा में लाने की योजना पर निर्भर करेगी।
कंपनी के अनुसार, उसके पास माउंटेड, पहिएदार और टो की जाने वाली श्रेणियों में सालाना करीब 120 से 150 बड़ी तोपें बनाने की क्षमता है। 184 ATAGS तोपों का ऑर्डर इस क्षमता का एक हिस्सा है। इस कार्यक्रम में रक्षा कारोबार का मार्जिन 20 से 22 फीसदी रहने की उम्मीद है।
ATAGS की खासियतें
रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के आयुध अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान (ARDE) ने उद्योग भागीदारों के साथ मिलकर ATAGS विकसित की है। पुरानी और कम कैलिबर वाली तोपों की जगह लेने के उद्देश्य से इस परियोजना की शुरुआत 2013 में हुई थी।
155 मिमी/52 कैलिबर की इस टो की जाने वाली तोप में ऑल-इलेक्ट्रिक ड्राइव, स्वचालित गोला-बारूद संचालन और आधुनिक अग्नि-नियंत्रण प्रणाली है। परीक्षणों में उच्च-विस्फोटक बेस ब्लीड (HE-BB) गोला-बारूद के साथ इसकी मारक दूरी करीब 48 किलोमीटर तक दर्ज की गई। इसका वजन लगभग 18 टन है। इसमें स्वदेशी सामग्री का बड़ा हिस्सा है और इसे अलग-अलग भूभागों में तेजी से तैनाती तथा लंबे समय तक संचालन के लिए बनाया गया है।
मार्च 2025 के अनुबंध में तोपों के साथ विशेष उच्च गतिशीलता वाले वाहन भी शामिल हैं, जिनकी जरूरत तोपों के वजन और उनकी प्रणालियों के कारण पड़ती है। भारतीय सेना की टो की जाने वाली तोपों की कुल जरूरत शुरुआती 307 तोपों की खरीद से काफी अधिक मानी जाती है। पहली खेप का आकार रसद और बुनियादी ढांचे से जुड़ी जरूरतों को ध्यान में रखकर तय किया गया है। ATAGS की डिलीवरी सेना के तोपखाना आधुनिकीकरण कार्यक्रम में शामिल होगी, जिसमें धनुष और K9 वज्र-टी जैसे सिस्टम भी हैं।