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Home - भारतीय थलसेना - जांबाज़ काउंटर-टेरर अभियान में शौर्य चक्र से सम्मानित हिमाचल के 6 PARA (SF) के कैप्टन योगेंद्र सिंह ठाकुर

भारतीय थलसेना

जांबाज़ काउंटर-टेरर अभियान में शौर्य चक्र से सम्मानित हिमाचल के 6 PARA (SF) के कैप्टन योगेंद्र सिंह ठाकुर

SSBCrack News Desk
Last updated: जुलाई 5, 2026 10:24 पूर्वाह्न
SSBCrack News Desk
Published: जुलाई 5, 2026
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Captain Yogendra Singh Thakur

हिमाचल प्रदेश और देश के लिए गर्व के क्षण में, 6 PARA (Special Forces) के कैप्टन योगेंद्र सिंह ठाकुर को जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद-रोधी अभियान के दौरान असाधारण साहस, रणभूमि नेतृत्व और कर्तव्य के प्रति अटूट समर्पण दिखाने के लिए प्रतिष्ठित शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया है। यह भारत का तीसरा सर्वोच्च शांतिकालीन वीरता सम्मान है।

यह वीरता सम्मान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन में आयोजित रक्षा अलंकरण समारोह में प्रदान किया। समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और वरिष्ठ सैन्य अधिकारी उपस्थित थे।

कैप्टन ठाकुर हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले की जोगिंदरनगर उपमंडल की डार्ट बगला पंचायत से संबंध रखते हैं। उनके पिता अनिल ठाकुर सेवानिवृत्त स्कूल प्रधानाचार्य हैं, जबकि उनकी माता बीना देवी गृहिणी हैं।

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उन्होंने सरस्वती विद्या मंदिर, बलक रूपी, जोगिंदरनगर से शिक्षा प्राप्त की है। विद्यालय से मिली जानकारी के अनुसार वे पढ़ाई में मेधावी और अनुशासित छात्र थे। वे कक्षा में लगातार शीर्ष स्थान प्राप्त करने के साथ-साथ सांस्कृतिक और सह-पाठ्य गतिविधियों में भी सक्रिय रहते थे।

उनकी इस उपलब्धि से न केवल उनके परिवार, बल्कि विद्यालय, विद्या भारती परिवार, जोगिंदरनगर क्षेत्र और पूरे हिमाचल प्रदेश को गर्व महसूस हुआ है।

जिस अभियान के लिए उन्हें शौर्य चक्र मिला, वह जम्मू-कश्मीर के उधमपुर जिले के बसंतरगढ़ क्षेत्र में हुआ था। खुफिया एजेंसियों ने वहां जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े आतंकियों की मौजूदगी की सूचना दी थी।

21 जुलाई 2025 को कैप्टन ठाकुर को दूरदराज और दुर्गम इलाके में आतंकियों को निष्प्रभावी करने के लिए एक विशेष मिशन का नेतृत्व सौंपा गया। निगरानी के दौरान उनकी टीम ने लगभग एक किलोमीटर दूर संदिग्ध गतिविधि देखी, जिसके बाद उन्होंने अपनी घातक टीम को रणनीतिक रूप से पुनः तैनात किया।

26 जुलाई 2025 को लगभग 0900 बजे निगरानी दल ने करीब 300 मीटर की दूरी पर संदिग्ध व्यक्तियों को देखा। घना कोहरा, लगभग शून्य दृश्यता और प्रतिकूल मौसम के बावजूद कैप्टन ठाकुर ने अपनी स्थिति बनाए रखी, ताकि आतंकी भाग न सकें और अनजाने में किसी भी तरह की क्षति से बचा जा सके।

इसके बाद आतंकियों ने उनकी टीम पर अंधाधुंध और भारी गोलीबारी शुरू कर दी। अत्यंत खतरनाक परिस्थिति में भी कैप्टन ठाकुर ने अदम्य साहस और संयम का परिचय दिया। अपने जीवन के खतरे को नजरअंदाज करते हुए वे लगातार दुश्मन की गोलीबारी के बीच रेंगते हुए आगे बढ़े और आतंकियों के और करीब पहुंच गए।

असाधारण युद्ध कौशल, रणनीतिक समझ और निर्भीक नेतृत्व का प्रदर्शन करते हुए उन्होंने निकट मुकाबले में आतंकियों से भिड़ंत की। तीव्र मुठभेड़ में उन्होंने एक कट्टर आतंकवादी को ढेर कर दिया, जिससे मिशन की सफलता में महत्वपूर्ण योगदान मिला और अपने साथी सैनिकों की सुरक्षा सुनिश्चित हुई।

उनकी त्वरित और निर्णायक कार्रवाई ने आतंकियों के भागने की संभावना समाप्त की और क्षेत्र में सुरक्षा बलों तथा नागरिकों के लिए बने बड़े खतरे को भी खत्म किया।

शौर्य चक्र की प्रशस्ति में कैप्टन ठाकुर के असाधारण पराक्रम, अडिग साहस, युद्ध कौशल और गंभीर व्यक्तिगत जोखिम के बावजूद मिशन को सफल बनाने के संकल्प को मान्यता दी गई है।

पुरस्कार की घोषणा के बाद जोगिंदरनगर और मंडी जिले में उत्सव का माहौल बन गया। ग्रामीणों, शिक्षकों और स्थानीय समुदाय के नेताओं ने कैप्टन ठाकुर और उनके परिवार को बधाई दी।

उल्लेखनीय वीरता, उत्कृष्ट नेतृत्व, असाधारण युद्ध कौशल और कर्तव्यनिष्ठ समर्पण के लिए कैप्टन योगेंद्र सिंह ठाकुर को शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया है, जिससे हिमाचल प्रदेश, भारतीय सेना और देश का गौरव बढ़ा है।

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