रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भविष्य के प्रौद्योगिकी-आधारित युद्ध में सामरिक अवसंरचना की भूमिका अनिवार्य बनी रहेगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि आधुनिक हथियार प्रणालियों और सैन्य प्रौद्योगिकियों में तेज़ी से हो रहे बदलावों के बावजूद सड़कें, सुरंगें, हवाई क्षेत्र और बंदरगाह सैन्य अभियानों के मूल आधार बने हुए हैं।
नई दिल्ली में 16 जुलाई 2026 को सीमा सड़क संगठन के सामरिक अवसंरचना सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने अवसंरचना विकास को राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने और 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को साकार करने में महत्वपूर्ण बताया। उनके अनुसार, रक्षा क्षमता केवल हथियारों से नहीं, बल्कि उस अवसंरचना से भी तय होती है जो तैनाती को सहारा देती है।
राजनाथ सिंह ने कहा कि कई बार युद्ध का पहला मोर्चा सीमा पर नहीं, बल्कि उस सड़क पर होता है जो सैनिकों को अग्रिम पंक्ति तक ले जाती है। उन्होंने सीमा सड़क संगठन की सराहना करते हुए कहा कि सड़क बनाने वाला भी राष्ट्रीय सुरक्षा का उतना ही महत्वपूर्ण रक्षक है, जितना सीमा पर तैनात जवान।
उन्होंने सीमा सड़क संगठन द्वारा दूरदराज और कठिन इलाकों में विश्वस्तरीय सामरिक अवसंरचना के विकास के लिए नई और उभरती प्रौद्योगिकियों के उपयोग की प्रशंसा की। रक्षा मंत्री ने कहा कि संगठन सरकार की राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने की प्रतिबद्धता को आगे बढ़ाते हुए देश के दीर्घकालिक विकास लक्ष्यों में भी अहम योगदान दे रहा है।
पिछले साढ़े छह दशकों की यात्रा का उल्लेख करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि सीमा सड़क संगठन एक सड़क निर्माण एजेंसी से विकसित होकर दुनिया के सबसे सम्मानित सामरिक अवसंरचना संगठनों में शामिल हो गया है। उन्होंने अटल सुरंग, उमलिंग ला दर्रा और सेला सुरंग को संगठन की अभियान्त्रिकी उत्कृष्टता, तकनीकी क्षमता और कठिन परिस्थितियों में समर्पण के प्रतीक बताया।
उन्होंने सीमा सड़क संगठन के कार्मिकों के योगदान को भी रेखांकित किया और कहा कि राष्ट्रीय सेवा के प्रति उनका समर्पण यह साबित करता है कि दृढ़ संकल्प, नवाचार और पेशेवर उत्कृष्टता से सबसे कठिन भौगोलिक और पर्यावरणीय चुनौतियों को भी पार किया जा सकता है।
रक्षा मंत्री ने संगठन को अग्रिम पंक्ति का ऐसा संस्थान बताया जो अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों को तेजी से अपनाने में जुटा है। उन्होंने सुरंग निर्माण प्रौद्योगिकी का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि इसने शहरी और पहाड़ी, दोनों क्षेत्रों में अवसंरचना विकास को नई दिशा दी है।
राजनाथ सिंह ने कहा कि कठिन इलाकों में सड़क, राजमार्ग और सामरिक परिसंपत्तियों का अभूतपूर्व वेग से निर्माण मानव प्रतिभा और प्रौद्योगिकीय प्रगति के सफल समन्वय को दर्शाता है। उन्होंने संपर्क व्यवस्था को राष्ट्र-निर्माण का आवश्यक हिस्सा बताते हुए सड़क, रेल, वायु और डिजिटल अवसंरचना के माध्यम से व्यापक संपर्क सुनिश्चित करने की सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई।
उन्होंने कहा कि दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले किसी भी नागरिक को राष्ट्रीय मुख्यधारा से कटे होने का अहसास नहीं होना चाहिए। इसी संदर्भ में उन्होंने वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम का उल्लेख किया, जिसका उद्देश्य सीमा गांवों को देश के अंतिम गांवों की बजाय पहले गांवों के रूप में विकसित करना है।
रक्षा मंत्री ने राष्ट्र-निर्माण को सामूहिक प्रयास बताते हुए कहा कि अवसंरचना विकास केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है। उन्होंने उद्योग, शिक्षाविदों, अभियंताओं और प्रशासकों से नवाचार, अनुसंधान और प्रभावी क्रियान्वयन के माध्यम से उत्कृष्टता का वातावरण बनाने का आग्रह किया।
सीमा सड़क महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल हरपाल सिंह ने भी सम्मेलन को संबोधित किया और सामरिक क्षमता के बदलते मानकों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आज सामरिक अवसंरचना का मूल्यांकन केवल इस आधार पर नहीं होता कि क्या बनाया गया, बल्कि इस पर भी कि परियोजनाएं कितनी बुद्धिमानी से योजनाबद्ध की गईं, कितनी तेजी से लागू हुईं, कितनी प्रभावी ढंग से निगरानी की गईं और पूरे जीवनचक्र में परिसंपत्तियों का रखरखाव कितना टिकाऊ रहा।
उन्होंने बताया कि सीमा सड़क संगठन तकनीकी नवाचार, संगठनात्मक सुधार और संस्थागत आधुनिकीकरण के साथ परिवर्तन की यात्रा पर है। इसके तहत डिजिटल योजना प्रणालियों, कृत्रिम बुद्धिमत्ता-आधारित समाधानों, यंत्रीकृत निर्माण पद्धतियों और उद्योग तथा शिक्षाविदों के साथ बेहतर सहयोग पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
कार्यक्रम के दौरान राजनाथ सिंह ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली सीमा सड़क संगठन की विभिन्न परियोजनाओं को पुरस्कार प्रदान किए। उन्होंने परियोजना प्रबंधन और भर्ती से जुड़ी दो डिजिटल प्रणालियों की शुरुआत भी की, जो संगठन के डिजिटल परिवर्तन की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम है।
इसके अलावा, उन्होंने संगठन की इंजीनियरिंग उपलब्धियों, सर्वोत्तम कार्य-पद्धतियों, तकनीकी नवाचारों और सामरिक अवसंरचना विकास के भविष्य दृष्टिकोण को दर्ज करने वाली तीन प्रमुख प्रकाशनें—‘पथ प्रदर्शक’, ‘ऊँची सड़कें’ और ‘पथ विकास’—जारी कीं। इस अवसर पर सीमा सड़क संगठन का गीत भी प्रस्तुत किया गया, जिसे संगठन के कर्मयोगियों के समर्पण, अदम्य साहस और निःस्वार्थ सेवा को समर्पित बताया गया।
15 जुलाई से शुरू हुए दो दिवसीय सामरिक अवसंरचना सम्मेलन में वरिष्ठ सैन्य नेतृत्व, नीति-निर्माता, अवसंरचना विशेषज्ञ, उद्योग प्रतिनिधि, प्रौद्योगिकी साझेदार और सीमा सड़क संगठन के कार्मिक शामिल हुए। इसमें योजनाकरण, डिजाइन, क्रियान्वयन, निगरानी, स्थिरता और उन्नत प्रौद्योगिकियों के उपयोग जैसे विषयों पर विचार-विमर्श किया गया।
“प्रौद्योगिकी, नवाचार और क्रियान्वयन उत्कृष्टता के माध्यम से क्षमता संवर्धन” विषय पर आयोजित इस सम्मेलन में यह संदेश दिया गया कि भविष्य की सामरिक अवसंरचना अधिक मेहनत से नहीं, बल्कि अधिक समझदारी से, प्रौद्योगिकी, नवाचार और पेशेवर उत्कृष्टता के समन्वय से विकसित की जानी चाहिए।