लेफ्टिनेंट जनरल देवेंद्र शर्मा, पीवीएसएम, एवीएसएम, एसएम, सेना प्रशिक्षण कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ, ने 13 जुलाई 2026 को धाना स्थित प्रतिष्ठित गैर-कमीशंड अफसर अकादमी का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने प्रशिक्षण पहलों और चल रहे रूपांतरण की समीक्षा की, जिसका उद्देश्य भारतीय सेना के लिए भविष्य के अनुरूप युद्ध नेतृत्व तैयार करना है।
यह दौरा 21वीं सदी के युद्ध की बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप सैन्य प्रशिक्षण संस्थानों के आधुनिकीकरण पर सेना के लगातार जोर को भी दर्शाता है। अकादमी में अपनाई जा रही नई प्रक्रियाओं और विकासात्मक पहलों पर विशेष ध्यान दिया गया।
दौरे के दौरान लेफ्टिनेंट जनरल शर्मा को गैर-कमीशंड अफसर अकादमी के कमांडेंट ब्रिगेडियर ललित शर्मा, एससी, एसएम ने संस्था के कामकाज के विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी। इसमें प्रशिक्षण की नवाचारी पद्धतियाँ, विज़न 2030 की रूपरेखा, परिणाम विश्लेषण और धारणा आकलन की व्यवस्था शामिल थी।
ब्रिफिंग में यह भी बताया गया कि अकादमी तकनीक-आधारित शिक्षण मॉडल को किस तरह प्रशिक्षण में शामिल कर रही है। साथ ही, भारतीय सेना भर के गैर-कमीशंड अफसरों के लिए नेतृत्व विकास कार्यक्रमों को और मजबूत करने के प्रयासों की जानकारी दी गई।
गैर-कमीशंड अफसर अकादमी भारतीय सेना की कॉम्बैट और कॉम्बैट सपोर्ट शाखाओं से आने वाले कनिष्ठ नेताओं को तैयार करने में अहम भूमिका निभाती है। यह संस्थान उन्हें आवश्यक व्यावसायिक दक्षता, सामरिक ज्ञान और नेतृत्व कौशल प्रदान करता है, ताकि वे जटिल परिचालन परिस्थितियों में प्रभावी ढंग से काम कर सकें।
अकादमी की प्रशिक्षण रूपरेखा सैनिकों को बड़ी जिम्मेदारियों के लिए तैयार करने के साथ-साथ उनमें अनुकूलनशीलता, पहल और परिचालन उत्कृष्टता विकसित करने पर केंद्रित है। इसके माध्यम से भविष्य की चुनौतियों का सामना करने वाले नेतृत्व को तैयार करने की कोशिश की जा रही है।
लेफ्टिनेंट जनरल शर्मा ने अकादमी के प्रौद्योगिकी-आधारित सफल रूपांतरण की सराहना की और भविष्य के लिए तैयार बल बनाने में इसके योगदान को स्वीकार किया। उन्होंने नवाचारी और प्रगतिशील प्रशिक्षण पद्धतियों को अपनाने की प्रतिबद्धता की भी प्रशंसा की, जो भारतीय सेना के व्यापक आधुनिकीकरण लक्ष्यों के अनुरूप हैं।
सेना कमांडर ने कनिष्ठ स्तर के सैन्य नेतृत्व की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने टीम निर्माण, अनुकूलनशील नेतृत्व और प्रशिक्षण में स्वचालन के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि आधुनिक युद्धक्षेत्र ऐसे नेताओं की मांग करता है जो सामरिक रूप से दक्ष होने के साथ-साथ तेजी से निर्णय लेने और नई तकनीकों का प्रभावी उपयोग करने में सक्षम हों।
एआरटीआरएसी प्रमुख ने बदलते युद्ध स्वरूप के अनुरूप भविष्यवादी प्रशिक्षण संरचना विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने तकनीक की बढ़ती भूमिका, नेटवर्क-केंद्रित अभियानों और एकीकृत युद्धक्षेत्र प्रणालियों का उल्लेख करते हुए अकादमी को अपनी क्षमताएँ और मजबूत करने के लिए प्रोत्साहित किया।
उन्होंने कहा कि गैर-कमीशंड अफसरों को सैन्य अभियानों के पूरे दायरे में प्रभावी नेतृत्व के लिए तैयार रहना चाहिए। इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए अकादमी लगातार अपने प्रशिक्षण ढांचे को और सशक्त बना रही है।
उत्कृष्ट सैन्य प्रशिक्षण को मान्यता देते हुए लेफ्टिनेंट जनरल शर्मा ने दो प्रशिक्षकों को एआरटीआरएसी के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ प्रशंसा पत्र प्रदान किए। यह सम्मान उनके प्रशिक्षण में उत्कृष्ट योगदान और उच्चतम मानकों को बनाए रखने की प्रतिबद्धता के लिए दिया गया।
इन प्रशिक्षकों के प्रयासों ने अकादमी में दी जाने वाली नेतृत्व प्रशिक्षण की गुणवत्ता और प्रभावशीलता को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। वहीं, दो पूर्व सैनिकों को भी एआरटीआरएसी के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ पूर्व सैनिक उपलब्धि पदक और प्रशंसा पत्र से सम्मानित किया गया।
यह सम्मान पूर्व सैनिकों के कल्याण में उनके अनुकरणीय योगदान की मान्यता के रूप में दिया गया। इससे सक्रिय सेवा से आगे भी उनके योगदान को स्वीकार करने की एआरटीआरएसी की निरंतर प्रतिबद्धता झलकती है।
यह दौरा इस बात की पुष्टि करता है कि भारतीय सेना अपने प्रशिक्षण संस्थानों को उत्कृष्टता के केंद्र में बदलने पर ध्यान दे रही है। लक्ष्य ऐसे सैन्य नेताओं को तैयार करना है जो प्रौद्योगिकी में दक्ष, परिचालन रूप से सक्षम और नैतिक रूप से मजबूत हों।
विज़न 2030 के अनुरूप पहलों के साथ धाना स्थित गैर-कमीशंड अफसर अकादमी भविष्य के युद्धक्षेत्रों की चुनौतियों का सामना करने वाले अगले नेतृत्व वर्ग को तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। नवाचार, नेतृत्व विकास और सतत आधुनिकीकरण पर जोर देकर यह अकादमी भारतीय सेना के एक युद्ध-तैयार और भविष्य उन्मुख बल के निर्माण के प्रयासों का केंद्रीय हिस्सा बनी हुई है।