आर्मी ट्रेनिंग कमांड (एआरटीआरएसी) के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ लेफ्टिनेंट जनरल देवेंद्र शर्मा, पीवीएसएम, एवीएसएम, एसएम ने 15 जुलाई 2026 को जबलपुर स्थित मिलिट्री कॉलेज ऑफ मटेरियल्स मैनेजमेंट (एमसीएमएम) का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने संस्थान की प्रशिक्षण पहलों और भारतीय सेना के लिए तकनीकी रूप से दक्ष तथा भविष्य के लिए तैयार रसद नेतृत्व विकसित करने में उसकी भूमिका की समीक्षा की।
दौरे के दौरान लेफ्टिनेंट जनरल शर्मा को एमसीएमएम के कार्यवाहक कमांडेंट मेजर जनरल संदीप बहल, एसएम, वीएसएम ने तोपखाना, भंडार और गोला-बारूद प्रबंधन के क्षेत्रों में संस्थान की प्रगतिशील प्रशिक्षण पद्धतियों की जानकारी दी। उन्हें कॉलेज की उन पहलों के बारे में भी बताया गया, जिनका उद्देश्य नवाचारी और प्रौद्योगिकी-सक्षम प्रशिक्षण तरीकों के जरिए पेशेवर सैन्य शिक्षा को और मजबूत करना है।
मिलिट्री कॉलेज ऑफ मटेरियल्स मैनेजमेंट भारतीय सेना की रसद व्यवस्था में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। यह अधिकारियों और कर्मियों को सामग्री प्रबंधन, भंडार नियंत्रण, गोला-बारूद प्रबंधन और आधुनिक रसद पद्धतियों का प्रशिक्षण देने वाला प्रमुख संस्थान है। इसके विशेष पाठ्यक्रम सेना की व्यापक अभियानगत आवश्यकताओं को अलग-अलग मोर्चों पर प्रभावी ढंग से पूरा करने में अहम भूमिका निभाते हैं।
लेफ्टिनेंट जनरल शर्मा ने एमसीएमएम के प्रौद्योगिकी आधारित रूपांतरण की सराहना की और भविष्य के लिए तैयार रसद नेतृत्व विकसित करने में इसकी अहम भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने प्रशिक्षण पाठ्यक्रम में समकालीन प्रौद्योगिकियों और उन्नत प्रबंधन पद्धतियों को शामिल करने के संस्थान के प्रयासों की भी प्रशंसा की, ताकि कर्मियों को लगातार जटिल होती रसद जिम्मेदारियों के लिए तैयार किया जा सके।
सेना कमांडर ने प्रशिक्षणार्थियों के लिए तकनीकी प्रमाणन सुनिश्चित करने वाली कॉलेज की पहलों की विशेष रूप से सराहना की। उन्होंने कहा कि ऐसी पहल पेशेवर दक्षता बढ़ाने और बदलती तकनीकी तथा अभियानगत आवश्यकताओं के अनुरूप सैन्य प्रशिक्षण को ढालने में महत्वपूर्ण हैं। इससे ऐसे दक्ष रसद विशेषज्ञ तैयार होते हैं जो भारतीय सेना की सभी क्षेत्रों में संचालन क्षमता को समर्थन दे सकें।
संचालन सफलता में सैन्य रसद की अपरिहार्य भूमिका को रेखांकित करते हुए लेफ्टिनेंट जनरल शर्मा ने कहा कि आधुनिक युद्ध को ऐसे चुस्त, लचीले और प्रौद्योगिकी-सक्षम रसद तंत्र की आवश्यकता है, जो गतिशील परिस्थितियों में युद्ध अभियानों को प्रभावी समर्थन दे सकें। उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य के संघर्षों में ऐसे रसद नेताओं की जरूरत और बढ़ेगी, जिनके पास तकनीकी विशेषज्ञता के साथ अनुकूलनशील नेतृत्व क्षमता भी हो।
एआरटीआरएसी प्रमुख ने सेना की समग्र रसद क्षमताओं को मजबूत करने में कॉलेज की भविष्यमुखी प्रशिक्षण पद्धतियों को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि रसद प्रबंधन में प्रौद्योगिकी आधारित समाधानों का समावेश समकालीन सैन्य परिवेश में दक्षता, त्वरित प्रतिक्रिया और संचालनगत स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए केंद्रीय महत्व रखता है।
दौरे के दौरान लेफ्टिनेंट जनरल शर्मा ने उत्कृष्ट सैन्य प्रशिक्षण और पेशेवर विकास में योगदान के लिए कुछ सेवारत कर्मियों को जीओसी-इन-सी एआरटीआरएसी प्रशंसा पत्र प्रदान किए। यह सम्मान एमसीएमएम में शिक्षण गुणवत्ता और संस्थागत उत्कृष्टता के उच्चतम मानकों को बनाए रखने के प्रति उनकी निष्ठा को दर्शाता है।
सेना कमांडर ने एक पूर्व सैनिक को पूर्व सैनिक कल्याण में उसके उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित भी किया। यह सम्मान सक्रिय सेवा के बाद भी सैन्य समुदाय को मजबूत करने में पूर्व सैनिकों की निरंतर भूमिका को स्वीकार करता है और पूर्व सैनिकों तथा उनके परिवारों के कल्याण के प्रति भारतीय सेना की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है।
यह दौरा इस बात की भी पुष्टि करता है कि आर्मी ट्रेनिंग कमांड सैन्य शैक्षणिक संस्थानों को उत्कृष्टता केंद्रों में बदलने पर ध्यान दे रही है। ऐसे संस्थान विशेष क्षेत्रों में अत्यधिक कुशल और तकनीकी रूप से प्रवीण सैन्य नेतृत्व तैयार करने में लगातार महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
नवाचार को बढ़ावा देने, प्रौद्योगिकीय प्रगति को अपनाने और पेशेवर सैन्य शिक्षा के उच्च मानकों को बनाए रखने के जरिए मिलिट्री कॉलेज ऑफ मटेरियल्स मैनेजमेंट भविष्य के लिए तैयार भारतीय सेना के निर्माण में योगदान दे रहा है। इसके प्रयास सेना की संचालन क्षमता और युद्ध तत्परता को बनाए रखने के लिए आवश्यक माने जा रहे हैं।