सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने सेना मार्क्समैनशिप इकाई की नायब सूबेदार नीरू ढांडा को सम्मानित किया, जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय निशानेबाजी खेल महासंघ विश्व कप में महिलाओं की ट्रैप स्पर्धा में व्यक्तिगत स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया। वह यह उपलब्धि हासिल करने वाली पहली भारतीय महिला बनीं।
यह ऐतिहासिक जीत इटली के लोनातो में आयोजित आईएसएसएफ शॉटगन विश्व कप में दर्ज की गई। नीरू ढांडा ने दुनिया के शीर्ष ट्रैप निशानेबाजों के खिलाफ संयमित और प्रभावशाली प्रदर्शन करते हुए यह पदक अपने नाम किया।
सेना प्रमुख ने दी सराहना
सम्मान समारोह के दौरान जनरल धीरज सेठ ने नीरू ढांडा की असाधारण क्षमता, दृढ़ संकल्प और खेल प्रतिभा की प्रशंसा की। उन्होंने उनकी जीत को भारतीय सेना और राष्ट्र दोनों के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।
सेना प्रमुख ने कहा कि इस स्तर की अंतरराष्ट्रीय निशानेबाजी में सफलता पाने के लिए अनुशासन और निरंतरता की आवश्यकता होती है। उन्होंने नीरू की प्रेरक यात्रा को भी सराहा और इसे भारतीय सेना की प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की पहचान, प्रशिक्षण और सहयोग के प्रति निरंतर प्रतिबद्धता का परिणाम बताया।
सेना की ओर से कहा गया कि यह उपलब्धि युवा खिलाड़ियों, विशेषकर वर्दी में सेवा दे रही महिलाओं को उत्कृष्टता की ओर बढ़ने और बड़े अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए प्रेरित करेगी।
सम्मान समारोह में सेना मार्क्समैनशिप इकाई की उस भूमिका को भी रेखांकित किया गया, जिसने दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों के खिलाफ प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम निशानेबाज तैयार किए हैं।
लोनातो में नीरू का स्वर्णिम प्रदर्शन
नीरू ढांडा ने महिलाओं की ट्रैप स्पर्धा के क्वालिफिकेशन चरण में ही अपना दबदबा बना लिया। उन्होंने 125 में से 121 निशाने लगाकर शीर्ष स्थान हासिल किया और आठ निशानेबाजों के फाइनल में जगह बनाई।
क्वालिफिकेशन राउंड की शुरुआत उन्होंने लगातार तीन बेहतरीन सीरीज़ के साथ की और 75 में से सभी निशाने सटीक लगाए। उनकी इस निरंतरता ने उन्हें कई प्रमुख निशानेबाजी देशों के शीर्ष खिलाड़ियों से भरे बेहद प्रतिस्पर्धी मुकाबले में आगे बनाए रखा।
30 निशानों वाले फाइनल में नीरू ने उल्लेखनीय नियंत्रण और सटीकता दिखाई। उन्होंने केवल तीन निशाने चूके और 30 में से 27 के विजयी स्कोर के साथ स्वर्ण पदक जीत लिया।
फ्रांस की पूर्व विश्व चैंपियन कैरोल कोर्मेनियर ने 25 निशानों के साथ रजत पदक जीता, जबकि इटली की एरिका सेसा ने कांस्य पदक हासिल किया।
नीरू फाइनल के शुरुआती चरण से ही अग्रणी खिलाड़ियों में शामिल रहीं और निर्णायक दौर तक मामूली बढ़त बनाए रखी। दबाव में शांत रहने की उनकी क्षमता ने अंततः उन्हें पहला व्यक्तिगत आईएसएसएफ विश्व कप खिताब दिलाया।
विश्व कप ट्रैप स्वर्ण जीतने वाली पहली भारतीय महिला
इस जीत के साथ 26 वर्षीय निशानेबाज आईएसएसएफ विश्व कप में ट्रैप शूटिंग में व्यक्तिगत स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला बन गईं।
इस उपलब्धि ने विश्व कप स्तर पर महिलाओं की ट्रैप स्पर्धा में भारत के 16 साल के इंतजार को भी समाप्त कर दिया। इससे पहले सीमा तोमर ने 2010 में इस स्पर्धा में रजत पदक जीता था।
लोनातो का स्वर्ण नीरू के खेल करियर की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में शामिल है। वह 2025 में कजाखस्तान के श्यामकेंट में एशियाई निशानेबाजी चैंपियनशिप में महिलाओं की ट्रैप स्वर्ण पदक जीतकर मौजूदा एशियाई चैंपियन के रूप में प्रतियोगिता में उतरी थीं।
वह मौजूदा राष्ट्रीय चैंपियन भी हैं और इससे पहले आल्माटी में आयोजित एक आईएसएसएफ विश्व कप में मिश्रित टीम कांस्य पदक जीत चुकी हैं।
सैन्य पुलिस कोर से विश्व मंच तक
हरियाणा के जींद जिले की रहने वाली नीरू ढांडा ने उस समय सेना में भर्ती होकर सैन्य पुलिस कोर जॉइन किया, जब भारतीय सेना ने महिलाओं के लिए रैंक और फाइल में भर्ती खोली थी।
शूटर के रूप में उनकी प्रतिभा को बाद में मध्य प्रदेश के महू स्थित पैदल सेना विद्यालय में मौजूद सेना मार्क्समैनशिप इकाई में निखारा गया।
यह इकाई भारतीय सेना के मिशन ओलंपिक्स कार्यक्रम के तहत काम करती है और सैन्य कर्मियों, पैरा-खिलाड़ियों तथा चुने हुए नागरिक निशानेबाजों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए प्रशिक्षित करती है।
विशेष प्रशिक्षण, खेल विज्ञान सहयोग और उच्च-तीव्रता वाले प्रतिस्पर्धी अभ्यास के जरिए इस इकाई ने कई ऐसे सफल निशानेबाज तैयार किए हैं, जिन्होंने प्रतिष्ठित खेल आयोजनों में भारत का प्रतिनिधित्व किया है।
सैन्य पुलिस कोर की एक सैनिक से एशियाई चैंपियन और आईएसएसएफ विश्व कप स्वर्ण पदक विजेता तक नीरू की यात्रा भारतीय सेना में महिला कर्मियों के लिए बढ़ते अवसरों को दर्शाती है।
भारतीय सेना की निशानेबाजी के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि
नायब सूबेदार नीरू ढांडा की यह जीत भारतीय सेना की खेल व्यवस्था के लिए एक बड़ा मील का पत्थर है।
इस परिणाम ने विशेष खेल संस्थानों, पेशेवर प्रशिक्षण और व्यवस्थित खिलाड़ी विकास में सेना के दीर्घकालिक निवेश की प्रभावशीलता को दिखाया।
इससे भारत को एशियाई खेलों सहित आने वाली प्रमुख प्रतियोगिताओं से पहले एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय सफलता भी मिली है।
ट्रैप शूटिंग को शॉटगन की सबसे कठिन स्पर्धाओं में गिना जाता है। इसमें खिलाड़ियों को छिपे हुए ट्रैप हाउस से अलग-अलग कोणों और गति से छोड़े गए मिट्टी के निशानों पर निशाना साधना होता है। इसके लिए तेज प्रतिक्रिया, सटीक आंख-हाथ समन्वय, मानसिक दृढ़ता और क्षणिक निर्णय लेने की क्षमता जरूरी होती है।
फाइनल में 30 में से 27 निशाने लगाने वाला नीरू का स्कोर उनकी तकनीकी सटीकता और अंतरराष्ट्रीय पदक मुकाबले के तीव्र मानसिक दबाव को संभालने की क्षमता को दर्शाता है।
आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा
जनरल धीरज सेठ द्वारा किया गया सम्मान केवल पदक के लिए नहीं, बल्कि इस ऐतिहासिक उपलब्धि के पीछे वर्षों के अनुशासन, प्रशिक्षण और बलिदान की मान्यता भी था।
सेना प्रमुख ने कहा कि नीरू ढांडा की यात्रा भारतीय सेना से जुड़े समर्पण, दृढ़ता और उत्कृष्टता के मूल्यों को प्रतिबिंबित करती है।
उम्मीद की जा रही है कि उनकी यह जीत सैनिकों और नागरिक खिलाड़ियों की नई पीढ़ी को निशानेबाजी और अन्य ओलंपिक स्पर्धाओं में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेगी।
लोनातो में मंच के शीर्ष पर खड़ी होकर नायब सूबेदार नीरू ढांडा ने शॉटगन निशानेबाजी में भारतीय महिलाओं के लिए नया मानक स्थापित किया और भारतीय सेना की खेल विरासत में एक और गौरवशाली अध्याय जोड़ दिया।
उनकी उपलब्धि ने एक बार फिर साबित किया कि संस्थागत सहयोग, पेशेवर प्रशिक्षण और अटूट संकल्प के साथ भारतीय खिलाड़ी दुनिया की सबसे मजबूत खेल शक्तियों के खिलाफ सफलतापूर्वक प्रतिस्पर्धा कर सकते हैं।