लेफ्टिनेंट जनरल मोहित मल्होत्रा, एवीएसएम, एसएम, भारतीय सेना की सप्त शक्ति कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ, ने एमएफएफआर, सदोलाई डेजर्ट बैटल स्कूल और रणबांकुरा डिवीजन का दौरा कर उनकी परिचालन तैयारियों और जारी प्रशिक्षण गतिविधियों की समीक्षा की। इस दौरे में मिशन-आधारित प्रशिक्षण, तकनीकी अनुकूलन और व्यावसायिक उत्कृष्टता के जरिए युद्ध क्षमता को मजबूत करने पर भारतीय सेना के निरंतर फोकस को रेखांकित किया गया।
दौरे के दौरान लेफ्टिनेंट जनरल मोहित मल्होत्रा को इन संरचनाओं की परिचालन तत्परता और कर्मियों की व्यावसायिक दक्षता बढ़ाने के लिए चलाए जा रहे विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रमों की जानकारी दी गई। सेना कमांडर ने विभिन्न पहलों की समीक्षा की, जिनका उद्देश्य उच्च स्तर की युद्ध तैयारी बनाए रखना और यह सुनिश्चित करना था कि सैनिक अलग-अलग परिचालन परिस्थितियों में प्रभावी ढंग से काम कर सकें।
मिशन-आधारित प्रशिक्षण पद्धतियों पर विशेष जोर दिया गया, जिन्हें आधुनिक सैन्य अभियानों के लिए आवश्यक कौशल और अनुकूलन क्षमता से कर्मियों को लैस करने के लिए तैयार किया गया है। भारतीय सेना ने हमेशा यथार्थवादी और विशेषीकृत प्रशिक्षण को परिचालन प्रभावशीलता का अनिवार्य हिस्सा माना है, क्योंकि भविष्य के संघर्षों में अधिक फुर्तीले, तकनीकी रूप से दक्ष और अत्यंत अनुशासित सैन्य नेतृत्व तथा सैनिकों की आवश्यकता होगी।
सदोलाई डेजर्ट बैटल स्कूल का पश्चिमी क्षेत्र में तैनात सैनिकों की युद्ध क्षमता बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान है। यह संस्था रेगिस्तानी भूभाग में अभियानों के लिए विशेष प्रशिक्षण देती है, जिससे सैनिक ऐसे वातावरण से जुड़ी विशिष्ट सामरिक और रसद संबंधी चुनौतियों को समझ और साध सकें। कठोर क्षेत्रीय अभ्यास और यथार्थवादी परिचालन अनुकरणों के माध्यम से यह संस्थान क्षमता-विकास में अहम भूमिका निभाता है।
लेफ्टिनेंट जनरल मल्होत्रा ने रणबांकुरा डिवीजन की तैयारियों की भी समीक्षा की और उच्च स्तर की परिचालन तत्परता बनाए रखने के लिए किए जा रहे उपायों का आकलन किया। सतत क्षमता-वृद्धि भारतीय सेना के व्यापक आधुनिकीकरण प्रयासों का केंद्रीय हिस्सा बनी हुई है, ताकि अग्रिम पंक्ति की संरचनाएं पारंपरिक और उभरती, दोनों तरह की सुरक्षा चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना करने के लिए तैयार रहें।
अधिकारियों और प्रशिक्षुओं से बातचीत करते हुए सेना कमांडर ने उनकी व्यावसायिकता, समर्पण और सैन्य प्रशिक्षण में उत्कृष्टता के प्रति प्रतिबद्धता की सराहना की। उन्होंने प्रशिक्षकों के अमूल्य योगदान को भी स्वीकार किया, जो सक्षम और आत्मविश्वासी सैन्य पेशेवर तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उनके अनुसार यह भूमिका भारतीय सेना की परिचालन उत्कृष्टता की परंपरा को बनाए रखने के लिए मूलभूत है।
कर्मियों को संबोधित करते हुए लेफ्टिनेंट जनरल मोहित मल्होत्रा ने दोहराया कि मिशन-आधारित प्रशिक्षण, अटूट अनुशासन और निरंतर सीखना भविष्य के लिए तैयार बल की नींव हैं। उन्होंने कहा कि जटिल होती सुरक्षा परिस्थितियों में सैन्य सफलता के लिए केवल शारीरिक और सामरिक दक्षता ही नहीं, बल्कि बौद्धिक अनुकूलनशीलता और आजीवन व्यावसायिक विकास के प्रति प्रतिबद्धता भी आवश्यक है।
सेना कमांडर ने सैन्य नेतृत्व और प्रशिक्षण संस्थानों के सभी स्तरों पर नवाचार और निरंतर सुधार की संस्कृति विकसित करने के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि युद्ध का बदलता स्वरूप भविष्य के संघर्षों में परिचालन बढ़त बनाए रखने के लिए उभरती प्रौद्योगिकियों, अनुकूल प्रशिक्षण पद्धतियों और मजबूत नेतृत्व क्षमताओं के सहज एकीकरण की मांग करता है।
लेफ्टिनेंट जनरल मल्होत्रा ने सभी रैंकों को पेशेवर उत्कृष्टता के प्रति प्रतिबद्ध रहने और अनुशासित प्रशिक्षण तथा अनुभवजन्य सीख के जरिए अपनी क्षमताओं को निरंतर मजबूत करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि भविष्य की परिचालन चुनौतियों के लिए तैयारी बनाए रखने के लिए मानव संसाधन और संस्थागत क्षमताओं, दोनों में सतत निवेश जरूरी है।
यह दौरा सप्त शक्ति कमान के उस निरंतर जोर को दर्शाता है, जिसके तहत युद्ध के लिए तैयार और भविष्योन्मुख संरचनाओं को विकसित किया जा रहा है, ताकि वे बदलती परिचालन जरूरतों पर प्रभावी ढंग से प्रतिक्रिया दे सकें। मिशन-केंद्रित प्रशिक्षण को तकनीकी प्रगति और नेतृत्व विकास के साथ जोड़कर भारतीय सेना विविध अभियानों में राष्ट्रीय हितों की रक्षा करने की अपनी क्षमता को लगातार मजबूत कर रही है।
एमएफएफआर, सदोलाई डेजर्ट बैटल स्कूल और रणबांकुरा डिवीजन के कर्मी प्रशिक्षण और परिचालन उत्कृष्टता के प्रति अपनी अटूट निष्ठा के जरिए सैन्य व्यावसायिकता की सर्वोच्च परंपराओं का उदाहरण बने हुए हैं। वे भारतीय सेना के उस दृष्टिकोण में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं, जिसका लक्ष्य एक प्रौद्योगिकी-सक्षम, मिशन-तैयार और भविष्य-तैयार बल का निर्माण करना है।