भारत सरकार ने आधुनिकीकरण योजना-चतुर्थ के माध्यम से केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की कार्यात्मक क्षमता को काफी मजबूत किया है। यह एक केंद्रीय क्षेत्र की योजना है, जिसका उद्देश्य बलों को उन्नत हथियारों, निगरानी प्रणालियों, गतिशीलता मंचों और आधुनिक संचालन अवसंरचना से लैस करना है।
गृह राज्य मंत्री श्री नित्यानंद राय ने 4 अगस्त 2026 को लोकसभा में दिए गए लिखित उत्तर में यह जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि इस योजना के तहत केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों को आधुनिक हथियार प्रणालियों और युद्धक उपकरणों से सुसज्जित किया गया है।
इनमें असॉल्ट राइफलें, कॉर्नर शॉट प्रणालियों से एकीकृत ग्लॉक पिस्तौलें, आधुनिक गोला-बारूद और हथियार सहायक उपकरण शामिल हैं। इनके जरिए विभिन्न परिचालन परिस्थितियों में तैनात कर्मियों की मारक क्षमता और युद्धक प्रभावशीलता बढ़ी है।
निगरानी और खुफिया-संग्रह क्षमता बढ़ाने के लिए बलों को थर्मल इमेजर, निष्क्रिय रात्रि दृष्टि चश्मे, मानवरहित हवाई वाहन, ड्रोन, स्वचालित अग्नि पहचान और दमन प्रणाली के साथ-साथ अन्य उन्नत इलेक्ट्रॉनिक निगरानी उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं।
इन तकनीकों ने सीमा सुरक्षा, उग्रवाद-रोधी और आंतरिक सुरक्षा अभियानों के दौरान स्थिति की बेहतर समझ विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इससे क्षेत्रीय परिस्थितियों पर नजर रखना और त्वरित निर्णय लेना अधिक प्रभावी हुआ है।
सरकार ने संचार और सूचना प्रौद्योगिकी अवसंरचना के उन्नयन पर भी ध्यान दिया है। इसके तहत सुरक्षित संचार उपकरण, हाइपर-कन्वर्ज्ड अवसंरचना सर्वर, नेटवर्किंग अवसंरचना, कमान एवं नियंत्रण प्रणालियां और डिजिटल संचालन मंच उपलब्ध कराए गए हैं।
इन व्यवस्थाओं से अभियानों के दौरान सूचनाओं का तेज और अधिक सुरक्षित आदान-प्रदान संभव हुआ है। इससे बलों की समन्वय क्षमता और प्रतिक्रिया दक्षता में भी सुधार हुआ है।
गतिशीलता बढ़ाने के लिए भी कई उपाय किए गए हैं। इनमें मध्यम बुलेट-प्रूफ वाहन, हल्के बुलेट-प्रूफ वाहन, बारूदी सुरंग-रोधी वाहन, पहिएदार बख्तरबंद मंच, आपातकालीन बचाव अग्निशमन वाहन और रबरयुक्त फुलाने योग्य नावें शामिल हैं।
इनसे बलों की विभिन्न भूभागों और परिचालन स्थितियों में प्रभावी ढंग से काम करने की क्षमता बेहतर हुई है। इससे त्वरित आवाजाही और राहत-बचाव कार्यों में भी मदद मिली है।
कर्मियों की सुरक्षा के लिए भी बेहतर सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं। इनमें गोलीरोधी जैकेट, बैलिस्टिक हेलमेट, सुरक्षात्मक ढाल और अन्य व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण शामिल हैं।
विशेषीकृत परिचालन क्षमताओं को बढ़ाने के लिए काउंटर-आईईडी और बम निष्क्रियकरण उपकरण, बचाव और आपदा प्रतिक्रिया प्रणालियां तथा विशेष सामरिक उपकरण भी शामिल किए गए हैं।
आधुनिकीकरण योजना-चतुर्थ के तहत अवसंरचना विकास भी एक प्रमुख क्षेत्र बना हुआ है। आधुनिक प्रशिक्षण सुविधाओं, संचार नेटवर्क, रसद सहायता प्रणालियों, आईसीटी अवसंरचना, रखरखाव सुविधाओं और संचालन अवसंरचना में निवेश किया गया है।
ये निवेश सीमा प्रबंधन और आंतरिक सुरक्षा से जुड़ी जिम्मेदारियों को समर्थन देने के लिए किए गए हैं। मंत्रालय के अनुसार, इन पहलों से केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की परिचालन क्षमता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
मंत्रालय ने कहा कि गतिशीलता, निगरानी, स्थिति की समझ, खुफिया-संग्रह, बल सुरक्षा और प्रतिक्रिया क्षमता बढ़ने से बलों की प्रभावशीलता मजबूत हुई है। इससे सीमा सुरक्षा, उग्रवाद-रोधी अभियानों, नक्सल-रोधी अभियानों और अन्य आंतरिक सुरक्षा कार्रवाइयों में मदद मिली है।
वर्तमान वित्तीय वर्ष 2026–27 में 26 जुलाई 2026 तक इस योजना के तहत सीआरपीएफ के लिए ₹117.01 करोड़, असम राइफल्स के लिए ₹88.98 करोड़, बीएसएफ के लिए ₹38.40 करोड़, सीआईएसएफ के लिए ₹38.03 करोड़, एसएसबी के लिए ₹39.52 करोड़, एनएसजी के लिए ₹32.71 करोड़ और आईटीबीपी के लिए ₹8.80 करोड़ का आवंटन किया गया है।
योजना की शुरुआत से अब तक सरकार ने केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के आधुनिकीकरण के लिए कुल ₹1,523 करोड़ का वित्तीय प्रावधान किया है। आधुनिकीकरण योजना-चतुर्थ का निरंतर क्रियान्वयन सरकार की उस प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जिसके तहत बलों को अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी और आधुनिक अवसंरचना से लैस किया जा रहा है।