सप्त शक्ति कमान के आर्मी कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल मोहित मल्होत्रा ने 4 से 6 अगस्त 2026 तक बठिंडा सैन्य स्टेशन का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने कमान के जिम्मेदारी क्षेत्र में मौजूदा परिचालन वातावरण की समीक्षा की और भारतीय सेना की युद्ध तत्परता का आकलन किया।
तीन दिवसीय दौरे के दौरान आर्मी कमांडर ने क्षेत्रीय कमांडरों के साथ विस्तृत परिचालन चर्चा की। इसमें बदलती सुरक्षा स्थिति, परिचालन तैयारी और लगातार अधिक जटिल होते खतरे के माहौल में युद्ध क्षमता बढ़ाने के लिए आवश्यक उपायों पर ध्यान केंद्रित किया गया।
वरिष्ठ कमांडरों ने लेफ्टिनेंट जनरल मल्होत्रा को मौजूदा परिचालन स्थिति, तैयारियों के स्तर और संरचनाओं के स्तर पर क्षमता मजबूत करने के लिए जारी पहलों की जानकारी दी। समीक्षा में उभरती प्रौद्योगिकियों के समावेश, बल आधुनिकीकरण और भविष्य के युद्धक्षेत्र की चुनौतियों से निपटने के लिए परिचालन अवधारणाओं के परिष्कार को भी शामिल किया गया।
कमांडरों को संबोधित करते हुए लेफ्टिनेंट जनरल मल्होत्रा ने युद्ध कौशल को लगातार विकसित करने और तंत्र, तकनीक एवं प्रक्रियाओं को समय के साथ अद्यतन करने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भविष्य के संघर्षों को उन्नत प्रौद्योगिकियां, सूचना में बढ़त और बहु-क्षेत्रीय अभियान अधिक प्रभावित करेंगे, इसलिए बलों को चुस्त और अनुकूलनशील बने रहना होगा।
आर्मी कमांडर ने परिचालन योजना और युद्धक्षेत्रीय निर्णय प्रक्रिया में अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों को शामिल करने की आवश्यकता पर भी बल दिया, ताकि निर्णायक युद्ध लाभ हासिल किया जा सके और उसे बनाए रखा जा सके। उन्होंने कहा कि आधुनिक सैन्य अभियान के लिए प्रौद्योगिकी, खुफिया, गतिशीलता और संयुक्त अभियान क्षमताओं को एक साथ जोड़ने वाला समग्र दृष्टिकोण आवश्यक है।
लेफ्टिनेंट जनरल मल्होत्रा ने चुस्त, सूचित और अनुकूलनशील योजना के महत्व को भी रेखांकित किया। उन्होंने कमांडरों से उभरते खतरों का अनुमान लगाने, नवाचार अपनाने और लचीलेपन के साथ प्रतिक्रिया देने का आह्वान किया। साथ ही उन्होंने निरंतर व्यावसायिक विकास, यथार्थवादी प्रशिक्षण और उन्नत परिचालन पद्धतियों को अपनाने पर जोर दिया, ताकि संरचनाएं 21वीं सदी के युद्ध की चुनौतियों के लिए तैयार रहें।
यह दौरा प्रौद्योगिकीय उन्नति, परिचालन नवाचार और बेहतर युद्ध तत्परता के माध्यम से युद्ध क्षमता को बदलने की सप्त शक्ति कमान की प्रतिबद्धता को दोहराता है। यह भारतीय सेना की उस व्यापक दृष्टि को भी दर्शाता है, जिसके तहत बदलते रणनीतिक वातावरण में सैन्य अभियानों के पूरे दायरे में निर्णायक प्रतिक्रिया देने में सक्षम भविष्य-तैयार बल का निर्माण किया जा रहा है।