फ्रांस ने 114 राफेल बहु-भूमिका लड़ाकू विमानों की खरीद के लिए भारत को अपना विस्तृत तकनीकी और वाणिज्यिक प्रस्ताव सौंप दिया है। इसे भारतीय वायु सेना के उन सबसे बड़े लड़ाकू विमान अधिग्रहण कार्यक्रमों में एक महत्वपूर्ण प्रगति माना जा रहा है, जिनका उद्देश्य उसकी युद्ध क्षमता को मजबूत करना और घटती स्क्वाड्रन संख्या की समस्या को दूर करना है।
रिपोर्टों के अनुसार, फ्रांसीसी पक्ष ने भारत के अनुरोध पत्र पर औपचारिक जवाब दिया है। यह अनुरोध पत्र मई 2026 में प्रस्तावित सरकार-से-सरकार खरीद ढांचे के तहत जारी किया गया था। अब यह प्रस्ताव रक्षा मंत्रालय के अधिग्रहण प्रकोष्ठ और भारतीय वायु सेना के परीक्षणाधीन है।
करीब 3.25 लाख करोड़ रुपये के इस प्रस्ताव का केंद्र 114 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद है। इसमें प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, स्वदेशी निर्माण और लंबे समय तक औद्योगिक सहयोग पर विशेष जोर दिया गया है, जो सरकार की आत्मनिर्भर भारत पहल से जुड़ा है।
फ्रांसीसी प्रस्ताव की एक प्रमुख विशेषता यह है कि 114 में से 94 विमानों का निर्माण भारत में स्थानीय औद्योगिक साझेदारी के माध्यम से करने की प्रतिबद्धता जताई गई है। राफेल बनाने वाली कंपनी दसॉ एविएशन के एमबीडीए, सफरान और थेल्स जैसी प्रमुख फ्रांसीसी रक्षा कंपनियों के साथ मिलकर भारतीय रक्षा और विमानन कंपनियों के साथ स्थानीय उत्पादन के लिए सहयोग करने की उम्मीद है।
प्रस्ताव में स्वदेशी सामग्री बढ़ाने की भी बात है। भारतीय पक्ष इस बात का आकलन करेगा कि राफेल मंच में देश में विकसित हथियारों, जैसे अस्त्र की विभिन्न श्रेणियों वाली दृश्य-परे वायु-से-वायु मिसाइल, को किस तरह जोड़ा जा सकता है। प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, स्थानीयकरण और औद्योगिक भागीदारी का दायरा भारत के मूल्यांकन में निर्णायक रहेगा, जिसके बाद आगे की बातचीत दूसरे चरण में जाएगी।
इस कार्यक्रम से भारत के रक्षा विनिर्माण क्षेत्र में बड़े आर्थिक अवसर पैदा होने की उम्मीद है। उद्योग की भागीदारी लगभग 1.6 लाख करोड़ रुपये आंकी गई है। टाटा, लार्सन एंड टुब्रो और अन्य घरेलू विमानन एवं रक्षा निर्माता, यदि यह प्रस्ताव आगे बढ़ता है, तो उत्पादन व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
इस खरीद का उद्देश्य भारतीय वायु सेना की परिचालन क्षमता को काफी मजबूत करना है। मौजूदा समय में सेवा की लड़ाकू स्क्वाड्रन संख्या स्वीकृत स्तर से नीचे बनी हुई है, क्योंकि पुराने मिग विमानों की सेवानिवृत्ति और स्वदेशी मंचों, जैसे लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट एलसीए एमके1ए तथा भविष्य के एलसीए एमके2, की शामिली में देरी हुई है।
राफेल पहले से ही भारतीय वायु सेना के अग्रिम पंक्ति के लड़ाकू विमानों में शामिल हो चुका है। 2016 के समझौते के तहत मंगाए गए 36 विमानों की आपूर्ति के बाद यह स्थिति बनी है। इसके अलावा भारतीय नौसेना ने विमानवाहक पोत आधारित अभियानों के लिए 26 राफेल मरीन विमान भी मंगाए हैं। यदि 114 विमानों की प्रस्तावित खरीद अंतिम रूप लेती है, तो भारत के राफेल बेड़े की संख्या 176 हो जाएगी और देश की वायु युद्ध क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
यह प्रस्ताव रक्षा अधिग्रहण परिषद द्वारा इसी वर्ष भारतीय वायु सेना की 114 बहु-भूमिका लड़ाकू विमानों की आवश्यकता को मंजूरी दिए जाने के बाद सामने आया है। यह कार्यक्रम रक्षा मंत्रालय के उस व्यापक प्रयास का केंद्रीय हिस्सा है, जिसका लक्ष्य वायु सेना का आधुनिकीकरण करना और क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों के बीच स्क्वाड्रन शक्ति को बहाल करना है।
अब फ्रांसीसी प्रस्ताव का रक्षा मंत्रालय और भारतीय वायु सेना द्वारा विस्तृत तकनीकी, परिचालन और वाणिज्यिक मूल्यांकन किया जाएगा। इसके बाद मूल्य, औद्योगिक साझेदारी, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और अनुबंध की शर्तों पर आगे बातचीत होगी। यदि यह समझौता अंतिम रूप लेता है, तो यह भारत के सबसे बड़े रक्षा खरीद कार्यक्रमों में से एक होगा और भारत-फ्रांस के लंबे समय से चले आ रहे रणनीतिक तथा रक्षा संबंधों को और गहरा करेगा।