पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सोमवार को चंडीगढ़ में थलसेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ से मुलाकात की और राज्य से जुड़े राष्ट्रीय सुरक्षा, सीमा प्रबंधन तथा रक्षा संबंधी कई मुद्दों पर चर्चा की।
बैठक के दौरान मान ने पंजाब सरकार और भारतीय सेना के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत पर जोर दिया, ताकि राज्य और देश की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने सीमा पर दूसरी पंक्ति की रक्षा को मजबूत करने और सेना तथा राज्य की सुरक्षा एजेंसियों के बीच सहयोग बढ़ाने की भी बात कही।
चर्चा में पंजाब की पाकिस्तान से लगती सीमा पर एंटी-ड्रोन निगरानी को मजबूत करने की बढ़ती जरूरत एक प्रमुख मुद्दा रहा। मान ने सीमा पार तस्करी और अन्य सुरक्षा खतरों के लिए ड्रोन के इस्तेमाल को रोकने हेतु उन्नत एंटी-ड्रोन तकनीक और कम ऊंचाई पर काम करने वाले अवरोधक राडार लगाने पर बल दिया।
पाकिस्तान से सटी 532 किलोमीटर लंबी सीमा के कारण कम ऊंचाई वाले हवाई क्षेत्र की प्रभावी निगरानी को विशेष रूप से महत्वपूर्ण बताया गया। मुख्यमंत्री ने पंजाब पुलिस की क्षमताओं को बढ़ाने के लिए थलसेना प्रमुख से सहयोग का आग्रह किया और उसे दूसरी पंक्ति की रक्षा का अहम हिस्सा बताया।
मान ने कहा कि पंजाब पहले ही अपनी प्रति-ड्रोन क्षमता को मजबूत करने की दिशा में कदम उठा चुका है और वह देश का पहला राज्य है जिसने अपनी एंटी-ड्रोन तकनीक स्थापित की। उन्होंने कहा कि बदलते खतरों से निपटने के लिए तकनीकी उन्नयन और सशस्त्र बलों के साथ घनिष्ठ समन्वय लगातार जरूरी रहेगा।
बैठक में पंजाब के युवाओं की सशस्त्र बलों में भर्ती का मुद्दा भी उठा। मान ने कहा कि पंजाबियों ने ऐतिहासिक रूप से देश की सीमाओं की रक्षा में बड़ी भूमिका निभाई है और राज्य सरकार भर्ती बढ़ाने के प्रयास कर रही है।
उन्होंने लड़कियों के लिए माई भागो सशस्त्र बल तैयारी संस्थान, महाराजा रणजीत सिंह सशस्त्र बल तैयारी संस्थान और सी-पाइट केंद्रों के नेटवर्क की भूमिका का भी उल्लेख किया, जो युवाओं को सशस्त्र बलों में करियर के लिए तैयार करते हैं।
मुख्यमंत्री ने सेवा में तैनात सैनिकों और भूतपूर्व सैनिकों के कल्याण से जुड़े मुद्दे भी उठाए। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार पूर्व सैनिकों के साथ खड़ी है और पंजाब पूर्व सैनिक निगम के माध्यम से काम करने वाले भूतपूर्व सैनिकों के लिए रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के उपाय किए जा रहे हैं।
मान ने थलसेना प्रमुख को यह भी बताया कि पंजाब सरकार ने रूपनगर में सेना को 200 एकड़ प्रमुख भूमि उपलब्ध कराई है। उन्होंने कहा कि इस भूमि का उपयोग रक्षा क्षेत्र से जुड़ी गतिविधियों को समर्थन और मजबूती देने के लिए किया जा सकता है।
मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय सुरक्षा में पंजाब के लंबे योगदान को याद करते हुए कहा कि राज्य देश की एकता और अखंडता के समर्थन की अपनी परंपरा को आगे भी निभाता रहेगा। उन्होंने हाल ही में आई बाढ़ के दौरान पंजाब के लोगों की मदद करने के लिए सेना के सहयोग की सराहना भी की।
जनरल धीरज सेठ ने पूर्व सैनिकों के कल्याण के लिए पंजाब सरकार की नीतियों और पहलों पर आभार व्यक्त किया। इस बातचीत से नागरिक प्रशासन और सशस्त्र बलों के बीच घनिष्ठ समन्वय की जरूरत वाले क्षेत्रों पर चर्चा का अवसर मिला।
इस बैठक में पंजाब के मुख्य सचिव केएपी सिन्हा, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव रवि भगत, विशेष डीजीपी पीके सिन्हा, लेफ्टिनेंट जनरल पुष्पेन्द्र सिंह और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
यह चर्चा पंजाब में नागरिक और सैन्य सहयोग के महत्व को रेखांकित करती है, खासकर सीमा सुरक्षा, प्रति-ड्रोन तैयारी, युवा भर्ती, रक्षा ढांचे और भूतपूर्व सैनिकों के कल्याण के क्षेत्रों में।