लैफ्टिनेंट जनरल उल्हास किर्पेकर, महानिदेशक, वित्तीय योजना ने सिकंदराबाद स्थित रक्षा प्रबंधन महाविद्यालय में उच्च रक्षा प्रबंधन पाठ्यक्रम-22 के प्रतिभागियों को शीर्ष स्तर पर बजट योजना और निगरानी के विषय पर संबोधित किया।
इस सत्र में प्रतिभागियों को भारत की रक्षा तैयारियों को सहारा देने वाली वित्तीय योजना प्रक्रियाओं पर विस्तृत दृष्टिकोण मिला। पाठ्यक्रम में शामिल अवधारणाओं के आधार पर लैफ्टिनेंट जनरल किर्पेकर ने रक्षा आवश्यकताओं को वित्तीय योजनाओं और संसाधन आवंटन में बदलने से जुड़ी व्यावहारिक बातों को समझाया।
संबोधन में सेना की व्यापक वित्तीय रूपरेखा पर भी जोर दिया गया, जिसमें पूंजीगत और राजस्व आवंटन से जुड़ी बातों को शामिल किया गया। प्रतिभागियों को बड़ी रक्षा व्यय प्राथमिकताओं के निर्धारण में शामिल रणनीतिक विकल्पों और आकलनों की जानकारी दी गई।
लैफ्टिनेंट जनरल किर्पेकर ने वित्तीय संसाधनों की प्रभावी निगरानी और उनके विवेकपूर्ण उपयोग के महत्व को भी रेखांकित किया। सत्र में यह भी सामने आया कि वित्तीय योजना, क्षमता विकास, संचालनगत तैयारी और सशस्त्र बलों की दीर्घकालिक आधुनिकीकरण आवश्यकताओं से सीधे जुड़ी है।
इस संवाद से उच्च रक्षा प्रबंधन पाठ्यक्रम-22 के प्रतिभागियों को रक्षा योजना के पीछे होने वाली वित्तीय निर्णय प्रक्रिया को करीब से समझने का अवसर मिला। साथ ही, इसने तात्कालिक संचालनगत जरूरतों और दीर्घकालिक क्षमता वृद्धि तथा आधुनिकीकरण की प्राथमिकताओं के बीच संतुलन के महत्व को भी उजागर किया।
रक्षा प्रबंधन महाविद्यालय में हुआ यह सत्र वरिष्ठ अधिकारियों और रक्षा पेशेवरों को रणनीतिक प्रबंधन और राष्ट्रीय सुरक्षा के व्यापक पहलुओं को समझाने में संस्थान की भूमिका को भी मजबूत करता है। इसमें भारत की रक्षा क्षमताओं को बनाए रखने के लिए आवश्यक वित्तीय ढांचे पर भी ध्यान केंद्रित किया गया।