उत्तरी कमान के सेना कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल प्रतीक शर्मा ने रक्षा भूमि के प्रबंधन और उपयोग से जुड़े पक्षों को एक मंच पर लाने की एक अग्रणी पहल के तहत आयोजित नॉर्दर्न कमांड लैंड कॉन्फ्रेंस की अध्यक्षता की।
यह सम्मेलन रक्षा और नागरिक एजेंसियों के लिए एक साझा मंच बना, जहां रक्षा भूमि से जुड़े मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया। इसमें भूमि प्रबंधन को बेहतर बनाने, उसके प्रभावी उपयोग और लंबे समय से लंबित मामलों के समय पर समाधान पर विशेष ध्यान दिया गया।
सम्मेलन में उत्तरी कमान, रक्षा मंत्रालय (सेना) के एकीकृत मुख्यालय, भारतीय वायु सेना, सीमा सड़क संगठन, रक्षा संपदा महानिदेशालय, प्रधान मुख्य वन संरक्षक तथा जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया।
विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों की उपस्थिति से उन मुद्दों पर व्यापक चर्चा संभव हुई, जिनमें विभागीय समन्वय की आवश्यकता थी। इनमें रक्षा भूमि प्रबंधन का बुनियादी ढांचे के विकास, पर्यावरण संबंधी पहलुओं, संपर्क व्यवस्था और नागरिक प्रशासन से जुड़ाव विशेष रूप से शामिल रहा।
लेफ्टिनेंट जनरल प्रतीक शर्मा ने हितधारकों के बीच अधिक समन्वय की आवश्यकता पर जोर दिया, ताकि रक्षा भूमि का प्रबंधन प्रभावी ढंग से हो सके और परिचालन तथा विकासात्मक आवश्यकताओं को भी पूरा किया जा सके।
सम्मेलन में संबंधित विभागों की समन्वित कार्रवाई के माध्यम से लंबित मुद्दों के समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।
यह पहल संस्थागत सहयोग को मजबूत करने और उत्तरी कमान क्षेत्र में रक्षा भूमि प्रबंधन के लिए अधिक सुव्यवस्थित पद्धति स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
सम्मेलन में इस बात पर भी बल दिया गया कि परिचालन आवश्यकताओं और जिम्मेदार भूमि उपयोग तथा विकास के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है, विशेषकर जम्मू-कश्मीर और लद्दाख जैसे सामरिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्रों में।
नॉर्दर्न कमान लैंड कॉन्फ्रेंस को रक्षा और नागरिक एजेंसियों के बीच समन्वय सुधारने तथा रक्षा भूमि को इस तरह प्रबंधित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया गया, जिससे परिचालन तैयारी और व्यापक राष्ट्रीय हित दोनों को समर्थन मिल सके।