मानेसर में 4 सितंबर 2026 को राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड ने महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज करते हुए एनएसजी प्रशिक्षण अकादमी में अपने पहले महिला कमांडो रूपांतरण पाठ्यक्रम (एमसीसीसी-01) की शुरुआत की।
3 सितंबर 2026 को अकादमी के दौरे के दौरान महानिदेशक, राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड ने इस अग्रणी पाठ्यक्रम में प्रशिक्षण ले रही महिला प्रशिक्षुओं से संवाद किया। उन्होंने एनएसजी की उस सोच पर जोर दिया, जिसमें अत्यधिक प्रशिक्षित और मिशन के लिए तैयार महिला कर्मियों को विकसित करने पर बल दिया जा रहा है।
12 सप्ताह का यह कठोर महिला कमांडो रूपांतरण पाठ्यक्रम 24 अगस्त 2026 को एनएसजी प्रशिक्षण अकादमी में शुरू हुआ था। कार्यक्रम का उद्देश्य प्रशिक्षुओं को विशिष्ट कौशल, शारीरिक तैयारी, सामरिक दक्षता और मानसिक दृढ़ता से लैस करना है, जो इस विशिष्ट आतंकवाद-रोधी बल से जुड़ी होती है।
प्रशिक्षुओं को संबोधित करते हुए एनएसजी महानिदेशक ने महिला कर्मियों को कठोर प्रशिक्षण के जरिए सशक्त बनाने और उन्हें ऐसे राष्ट्रीय संसाधन के रूप में तैयार करने की अपनी दृष्टि साझा की, जो अग्रिम पंक्ति से नेतृत्व कर सकें।
यह पहल विशेष सुरक्षा और आतंकवाद-रोधी प्रशिक्षण में महिलाओं की भूमिका को बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। इसके साथ ही यह राष्ट्रीय सुरक्षा और राष्ट्र-निर्माण में उनके योगदान को भी मजबूत करती है।
दौरे के दौरान महानिदेशक ने महिला प्रशिक्षुओं के साथ युद्धक निशानेबाजी प्रदर्शन भी देखा। इसमें एनएसजी प्रशिक्षण अकादमी के प्रशिक्षकों की सटीकता, गति और त्वरित प्रतिक्रिया का प्रदर्शन किया गया, जिससे प्रशिक्षुओं को विशेष प्रशिक्षण के दौरान अपेक्षित युद्धक दक्षता के मानकों की झलक मिली।
एनएसजी प्रशिक्षण अकादमी आतंकवाद-रोधी, निकट युद्ध, युद्धक निशानेबाजी और उच्च जोखिम वाले सुरक्षा अभियानों के लिए आवश्यक अन्य विशिष्ट कौशलों का उन्नत प्रशिक्षण देती है। महिला कमांडो रूपांतरण पाठ्यक्रम के तहत प्रशिक्षुओं को 12 सप्ताह तक गहन प्रशिक्षण वातावरण में रखा जाएगा।
एमसीसीसी-01 की शुरुआत एनएसजी में महिला कर्मियों की बढ़ती भागीदारी को एक नया आयाम देती है। इसके सफल समापन के बाद प्रशिक्षुओं की सामरिक और परिचालन क्षमताओं में वृद्धि होने की उम्मीद है, जिससे वे विशिष्ट जिम्मेदारियों के लिए अधिक सक्षम बनेंगी।
प्रशिक्षुओं में आत्मविश्वास, संकल्प और नेतृत्व को रेखांकित करते हुए एनएसजी ने इस पहल की भावना को इन शब्दों में समेटा: “शेरनी क्या करती है? उठती है! बढ़ती है!! और LEAD करती है!!”
महिला कमांडो रूपांतरण पाठ्यक्रम की यह पहली टोली एनएसजी के लिए न केवल एक प्रशिक्षण उपलब्धि है, बल्कि भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा संरचना में महिला कर्मियों को अधिक जिम्मेदार भूमिकाएं देने के व्यापक प्रयास का भी संकेत है।