नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्ण स्वामीनाथन ने मॉरीशस की आधिकारिक यात्रा के दौरान भारतीय और मॉरीशस के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बातचीत की। इस दौरान दोनों देशों के बीच समुद्री सहयोग को और मजबूत करने तथा संचालनात्मक संबंधों को गहरा करने पर चर्चा हुई।
यात्रा के दौरान एडमिरल कृष्ण स्वामीनाथन ने मॉरीशस में भारत के उच्चायुक्त श्री अनुराग श्रीवास्तव, मॉरीशस पुलिस बल के पुलिस आयुक्त श्री राम्परसाद सूरूजेबल्ली और मॉरीशस सरकार की गृह एवं रक्षा मामलों की सचिव सुश्री कान ओये फोंग वेंग-पूरण से मुलाकात की।
चर्चाओं में भारत और मॉरीशस के बीच समुद्री सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया। मॉरीशस राष्ट्रीय तट रक्षक बल की क्षमताओं को बढ़ाने के मुद्दे पर भी बात हुई, क्योंकि क्षमता निर्माण द्विपक्षीय समुद्री साझेदारी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बना हुआ है।
वार्ता में संयुक्त विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र निगरानी भी प्रमुख विषयों में शामिल रही। इस सहयोग से समुद्री क्षेत्र की जानकारी बेहतर होगी और दोनों देशों को अपने-अपने समुद्री क्षेत्रों में गतिविधियों पर नजर रखने तथा आवश्यक प्रतिक्रिया देने की क्षमता मिलेगी।
मुलाकातों के दौरान भारतीय नौसेना और मॉरीशस की समुद्री सेनाओं के बीच संचालन स्तर के संबंधों को बढ़ाने के अवसरों पर भी विचार किया गया। अधिक समन्वय और संपर्क से आपसी सामंजस्य, सूचना साझा करने और उभरती समुद्री सुरक्षा चुनौतियों पर संयुक्त प्रतिक्रिया को बल मिल सकता है।
भारत और मॉरीशस के बीच समुद्री साझेदारी लंबे समय से आपसी विश्वास, निकट भौगोलिक और ऐतिहासिक संबंधों तथा हिंद महासागर क्षेत्र में सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखने के साझा हितों पर आधारित रही है।
नौसेना प्रमुख की इस यात्रा के दौरान हुई चर्चाओं ने मित्र देशों के साथ समुद्री साझेदारी मजबूत करने की भारत की प्रतिबद्धता को फिर से रेखांकित किया। क्षमता निर्माण, संचालन सहयोग और समुद्री सुरक्षा पर ध्यान भारत के व्यापक दृष्टिकोण को दर्शाता है, जिसका उद्देश्य सुरक्षित और स्थिर समुद्री वातावरण को बढ़ावा देना है।
ये engagements MAHASAGAR, यानी म्यूचुअल एंड होलिस्टिक एडवांसमेंट फॉर सिक्योरिटी एंड ग्रोथ अक्रॉस रीजन, की दृष्टि के अनुरूप भी हैं। इस दृष्टि में सामूहिक सुरक्षा, सतत विकास और हिंद महासागर क्षेत्र के देशों के बीच मजबूत साझेदारी पर जोर दिया गया है।
मॉरीशस में एडमिरल कृष्ण स्वामीनाथन की यह बातचीत दोनों देशों के बीच रक्षा और समुद्री संबंधों को और सुदृढ़ करने वाली मानी जा रही है। इससे समुद्री सुरक्षा, क्षमता विकास और क्षेत्रीय स्थिरता के क्षेत्र में सहयोग के नए अवसर भी खुल सकते हैं।