नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्ण स्वामीनाथन ने 23 जुलाई 2026 को पुणे स्थित सशस्त्र बल चिकित्सा महाविद्यालय का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने सैन्य चिकित्सा शिक्षा, जैव-चिकित्सीय अनुसंधान, नवाचार और उन्नत स्वास्थ्य सेवाओं में संस्थान के महत्वपूर्ण योगदान की समीक्षा की।
यह दौरा इस बात को रेखांकित करता है कि सशस्त्र बलों के लिए चिकित्सा पेशेवरों को तैयार करने और प्रौद्योगिकी आधारित स्वास्थ्य सेवाओं को आगे बढ़ाने में इस संस्थान की भूमिका कितनी अहम है।
दौरे के दौरान एडमिरल कृष्ण स्वामीनाथन को संस्थान की बहुआयामी भूमिका के बारे में जानकारी दी गई। उन्हें विश्वस्तरीय चिकित्सा शिक्षा, अत्याधुनिक जैव-चिकित्सीय अनुसंधान और नवाचार के जरिए सैन्य स्वास्थ्य क्षमताओं को मजबूत करने के प्रयासों पर विस्तार से बताया गया।
ब्रीफिंग में यह भी बताया गया कि संस्थान चिकित्सा प्रशिक्षण और वैज्ञानिक प्रगति के माध्यम से परिचालन तैयारियों को समर्थन देने के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है।
नौसेना प्रमुख ने संस्थान के कई प्रमुख विभागों और केंद्रों का भी दौरा किया। इनमें सामुदायिक चिकित्सा, चिकित्सा अनुसंधान, प्रसूति एवं स्त्री रोग, और खेल चिकित्सा विभाग शामिल थे।
उन्होंने उन्नत अनुसंधान केंद्र, चिकित्सा अनुसंधान विभाग, एबीआईवीआईसी केंद्र, युद्ध शल्य चिकित्सा संग्रहालय और शल्य कौशल प्रयोगशाला, एएफएमसी प्रकाशन तथा छात्रों की वैज्ञानिक संस्था अपरमय का भी निरीक्षण किया। इससे उन्हें महाविद्यालय के शैक्षणिक, शोध और नवाचार तंत्र की प्रत्यक्ष जानकारी मिली।
एडमिरल कृष्ण स्वामीनाथन ने नौसेना के अधिकारियों, नौसैनिकों और कैडेटों से भी बातचीत की। उन्होंने उनके समर्पण की सराहना की और राष्ट्र सेवा में पेशेवर उत्कृष्टता के लिए निरंतर प्रयास करने को प्रोत्साहित किया।
उन्होंने एएफएमसी द्वारा बनाए गए उच्च मानकों की प्रशंसा की और शैक्षणिक उत्कृष्टता, अग्रणी अनुसंधान, नवाचारी कार्यप्रणाली तथा रोगी-केंद्रित स्वास्थ्य दृष्टिकोण की सराहना की।
नौसेना प्रमुख ने संकाय, शोधकर्ताओं, चिकित्सा पेशेवरों और छात्रों की भी सराहना की और कहा कि वे उन्नत चिकित्सा शिक्षा तथा वैज्ञानिक नवाचार के माध्यम से परिचालन तैयारियों को मजबूत करने के लिए निरंतर प्रतिबद्ध हैं।
यह दौरा एएफएमसी की भारत के प्रमुख सैन्य चिकित्सा संस्थानों में स्थिति को फिर से पुष्ट करता है। साथ ही, इसने सशस्त्र बलों के लिए एक आधुनिक, प्रौद्योगिकी-आधारित स्वास्थ्य तंत्र के निर्माण में इसके सतत योगदान को भी रेखांकित किया।
शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार और नैदानिक उत्कृष्टता पर केंद्रित यह महाविद्यालय देश की रक्षा सेवाओं की चिकित्सा क्षमताओं और परिचालन प्रभावशीलता को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है।