सेवानिवृत्त एयर मार्शल नरमदेश्वर तिवारी ने वेलिंगटन स्थित रक्षा सेवाएँ स्टाफ कॉलेज में 82वें स्टाफ कोर्स के अधिकारियों और संकाय को संबोधित किया। उन्होंने “समकालीन एयरोस्पेस शक्ति का विकास: भारत के लिए अनिवार्यताएँ” विषय पर एक सारगर्भित व्याख्यान दिया।
इस व्याख्यान में वायु युद्ध की उभरती प्रवृत्तियों पर ध्यान केंद्रित किया गया और कोर्स के अधिकारियों को एयरोस्पेस शक्ति के समकालीन विकास की समझ दी गई। सत्र में वायु युद्ध के बदलते स्वरूप और भारत के लिए उससे जुड़ी आवश्यकताओं को रेखांकित किया गया।
ऑपरेशन सिंदूर और हालिया वैश्विक संघर्षों से मिले सबक भी व्याख्यान का महत्वपूर्ण हिस्सा रहे। इन अनुभवों के माध्यम से बदलती युद्ध पद्धतियों को समझने और उभरती परिचालन आवश्यकताओं के अनुरूप एयरोस्पेस क्षमताओं को ढालने की जरूरत पर जोर दिया गया।
व्याख्यान में स्वदेशी क्षमताओं के महत्व को भी प्रमुखता से सामने रखा गया। इसमें इस बात पर बल दिया गया कि भारत की परिचालन आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए ऐसी क्षमताओं का विकास और उन्हें बनाए रखना आवश्यक है।
बातचीत के दौरान युद्ध सहनशक्ति पर भी विशेष ध्यान दिया गया। ऑपरेशन सिंदूर और हालिया संघर्षों के सबक ने लंबे समय तक चलने वाले युद्ध में सैन्य अभियानों को बनाए रखने और आवश्यक क्षमताओं को संरक्षित रखने के महत्व को उजागर किया।
इस सत्र ने 82वें स्टाफ कोर्स के अधिकारियों को हालिया अभियानों और संघर्षों के अनुभव के माध्यम से एयरोस्पेस शक्ति के विकास का आकलन करने का अवसर दिया। साथ ही, इसने समकालीन सुरक्षा परिवेश में भारत की एयरोस्पेस शक्ति से जुड़ी व्यापक आवश्यकताओं की उनकी समझ को भी समृद्ध किया।