राष्ट्रीय सैन्य विद्यालयों के वार्षिक प्राचार्य एवं प्रशासनिक अधिकारियों के सम्मेलन का आयोजन 15 सितंबर को नई दिल्ली के मानेकशॉ केंद्र में किया गया। इस अवसर पर वरिष्ठ सैन्य नेतृत्व, गणमान्य अतिथि और विशिष्ट पूर्व छात्र एक साथ जुटे और संस्थानों की प्रगति की समीक्षा की गई।
सम्मेलन की अध्यक्षता लेफ्टिनेंट जनरल विपुल शिंगल, उप प्रमुख, सेना मुख्यालय (सूचना प्रणाली और प्रशिक्षण) ने की। विशिष्ट पूर्व छात्र श्री अशोक लवासा, आईएएस (सेवानिवृत्त), और लेफ्टिनेंट जनरल एसएन हांडा (सेवानिवृत्त) इस कार्यक्रम में सम्मानित अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
यह वार्षिक सम्मेलन राष्ट्रीय सैन्य विद्यालयों के नेतृत्व के लिए एक महत्वपूर्ण संस्थागत मंच के रूप में कार्य करता है। इसके माध्यम से आरएमएस नेटवर्क में हुए विकास की समीक्षा की जाती है और शैक्षणिक कार्य, नेतृत्व, अनुशासन तथा कैडेटों के समग्र विकास से जुड़े अनुभव साझा किए जाते हैं।
बैठक में संस्थागत पद्धतियों को मजबूत करने और विद्यार्थियों के शैक्षणिक तथा व्यक्तिगत विकास को सहयोग देने वाले तरीकों पर चर्चा हुई। समग्र कैडेट विकास पर दिया गया जोर इस बात को दर्शाता है कि आरएमएस में औपचारिक शिक्षा के साथ चरित्र निर्माण, अनुशासन और नेतृत्व विकास पर भी समान ध्यान दिया जाता है।
राष्ट्रीय सैन्य विद्यालय भारत की सैन्य-उन्मुख शिक्षा व्यवस्था में एक विशिष्ट स्थान रखते हैं। इनका उद्देश्य केवल पढ़ाई तक सीमित नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों को ऐसे संरचित वातावरण से परिचित कराना है जो उनमें अनुशासन, जिम्मेदारी, नेतृत्व और सेवा-भावना जैसे गुण विकसित करे।
सम्मेलन में वरिष्ठ सैन्य नेतृत्व की उपस्थिति ने इन संस्थागत उद्देश्यों की समीक्षा करने और उन्हें सभी विद्यालयों में और अधिक प्रभावी ढंग से लागू करने के उपायों पर विचार का अवसर दिया।
2026 के सम्मेलन की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि कैप्टन गुरबचन सिंह सालरिया, पीवीसी, के सम्मान में सर्वश्रेष्ठ आरएमएस ट्रॉफी की स्थापना रही। यह ट्रॉफी राष्ट्रीय सैन्य विद्यालयों के बीच समग्र संस्थागत उत्कृष्टता को मान्यता देने के लिए बनाई गई है।
कैप्टन जीएस सालरिया सैन्य-विद्यालय प्रणाली से जुड़े सबसे विशिष्ट पूर्व छात्रों में से एक माने जाते हैं। उन्हें परम वीर चक्र से सम्मानित किया गया था, जो शत्रु के सामने असाधारण वीरता के लिए भारत का सर्वोच्च सैन्य अलंकरण है। उनके सम्मान में वार्षिक ट्रॉफी की स्थापना संस्थागत उत्कृष्टता को सेवा और बलिदान की उस विरासत से जोड़ती है, जो आरएमएस के एक प्रमुख पूर्व छात्र से जुड़ी है।
नई ट्रॉफी को केवल शैक्षणिक प्रदर्शन तक सीमित न रखकर समग्र उत्कृष्टता को पहचान देने के लिए तैयार किया गया है। इसलिए यह पहल सैन्य शिक्षा के व्यापक उद्देश्यों पर बल देती है, जिनमें पढ़ाई, नेतृत्व, अनुशासन और कैडेटों का समग्र विकास शामिल है।
यह पहल राष्ट्रीय सैन्य विद्यालयों की उस भावना को भी मजबूत करती है, जिसमें चरित्र निर्माण और नेतृत्व विकास शिक्षा व्यवस्था के केंद्रीय तत्व बने रहते हैं।
सम्मेलन ने प्राचार्यों और प्रशासनिक अधिकारियों को अपने अनुभव और संस्थागत पद्धतियाँ साझा करने का मंच भी प्रदान किया। इस प्रकार के आदान-प्रदान से विद्यालयों को ऐसे तरीकों की पहचान करने में मदद मिल सकती है, जिन्हें आरएमएस नेटवर्क में लागू किया जा सके, जबकि प्रत्येक संस्थान की विशिष्टता और उद्देश्य बने रहें।
आरएमएस प्रणाली में शैक्षणिक प्रदर्शन एक महत्वपूर्ण पक्ष बना रहता है, लेकिन सम्मेलन का व्यापक एजेंडा संतुलित रूप से विकसित कैडेट तैयार करने पर केंद्रित रहा। नेतृत्व के अवसर, अनुशासन और संरचित गतिविधियाँ कक्षा शिक्षा के पूरक के रूप में देखी जाती हैं और विद्यार्थियों को विद्यालय जीवन के बाद की जिम्मेदारियों के लिए तैयार करने में मदद करती हैं।
विशिष्ट पूर्व छात्रों की उपस्थिति ने आरएमएस प्रणाली के दीर्घकालिक प्रभाव को भी सामने रखा। इन पूर्व छात्रों ने सशस्त्र बलों, सिविल प्रशासन और अन्य व्यावसायिक क्षेत्रों में सेवा देकर सैन्य विद्यालयों में अर्जित मूल्यों को आगे बढ़ाया है।
श्री अशोक लवासा, आईएएस (सेवानिवृत्त), आरएमएस पूर्व छात्रों के सिविल सेवा पक्ष का प्रतिनिधित्व करते हैं, जबकि लेफ्टिनेंट जनरल एसएन हांडा (सेवानिवृत्त) संस्था के भारत के सैन्य नेतृत्व से जुड़े निरंतर संबंध का प्रतीक हैं। उनकी सम्मानित अतिथि के रूप में उपस्थिति ने आरएमएस संस्थानों के वर्तमान नेतृत्व को उन पूर्व विद्यार्थियों से संवाद का अवसर दिया, जिन्होंने आगे चलकर सार्वजनिक जीवन में वरिष्ठ पदों पर सेवा दी।
मानेकशॉ केंद्र में हुआ यह सम्मेलन आरएमएस ढांचे के भीतर शिक्षा और राष्ट्र-निर्माण के संबंध को भी रेखांकित करता है। विद्यालय ऐसा वातावरण बनाने का प्रयास करते हैं, जिसमें युवा कैडेट न केवल शैक्षणिक क्षमता विकसित करें, बल्कि समाज और देश के प्रति जिम्मेदारी की भावना भी अर्जित करें।
कैप्टन जीएस सालरिया, पीवीसी, के सम्मान में सर्वश्रेष्ठ आरएमएस ट्रॉफी की स्थापना से उत्कृष्टता के लिए एक अतिरिक्त संस्थागत मानक मिलने की उम्मीद है। समग्र प्रदर्शन को मान्यता देकर यह पुरस्कार विद्यालयों को पढ़ाई, अनुशासन, नेतृत्व और कैडेट जीवन के अन्य क्षेत्रों में संतुलित विकास के लिए प्रेरित कर सकता है।
इस प्रकार 2026 का सम्मेलन संस्थागत समीक्षा और राष्ट्रीय सैन्य विद्यालयों की विरासत के सम्मान का संगम रहा। इसमें संस्थानों के प्रशासन और नेतृत्व से जुड़े लोग, वरिष्ठ सैन्य नेतृत्व तथा सार्वजनिक सेवा में योगदान देने वाले पूर्व छात्र एक साथ आए।
इस सम्मेलन ने आरएमएस प्रणाली में चरित्र निर्माण, अनुशासन, नेतृत्व और राष्ट्र-निर्माण के महत्व को एक बार फिर रेखांकित किया। वरिष्ठ सैन्य नेतृत्व, विशिष्ट पूर्व छात्रों और विद्यालय प्रशासकों की उपस्थिति ने संस्थानों की प्रगति की समीक्षा के साथ-साथ जिम्मेदार और अनुशासित नागरिकों की अगली पीढ़ी तैयार करने की उनकी दीर्घकालिक भूमिका को भी मजबूत किया।