भारत ने संयुक्त राष्ट्र के शांति सैनिकों की सुरक्षा मजबूत करने, उन पर हमलों के जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय करने और शांति अभियानों को पर्याप्त संसाधन देने की मांग की है। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन के सैन्य सलाहकार कर्नल तरुणेंद्र प्रताप सिंह ने ड्यूटी के दौरान जान गंवाने वाले 184 भारतीय शांति सैनिकों को श्रद्धांजलि भी दी।
न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों की व्यापक समीक्षा पर आयोजित वार्षिक बहस को संबोधित करते हुए कर्नल सिंह ने अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के प्रति भारत की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि शांति अभियानों को लेकर भारत का दृष्टिकोण सात दशक से अधिक के जमीनी अनुभव पर आधारित है।
भारत अब तक संयुक्त राष्ट्र के 50 शांति अभियानों में तीन लाख से अधिक सैन्यकर्मी तैनात कर चुका है। कुल योगदान के लिहाज से वह इन अभियानों के लिए सबसे अधिक सैनिक देने वाला देश है। संयुक्त राष्ट्र के झंडे तले सेवा करते हुए 184 भारतीय शांति सैनिकों ने अपने प्राण गंवाए हैं।
कर्नल सिंह ने कहा कि निष्पक्षता, संबंधित पक्षों की सहमति और केवल आत्मरक्षा या मिशन को सौंपे गए दायित्वों की रक्षा के लिए बल प्रयोग जैसे सिद्धांत संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों को अंतरराष्ट्रीय शांति बनाए रखने का अपरिहार्य साधन बनाते हैं।
उन्होंने जोर दिया कि इन अभियानों के ठोस नतीजे तभी मिल सकते हैं, जब उनके साथ व्यापक राजनीतिक प्रक्रिया, स्पष्ट राजनीतिक उद्देश्य और पर्याप्त परिचालन संसाधन हों। जरूरी क्षमताओं या व्यावहारिक राजनीतिक रणनीति के बिना शांति सैनिकों की तैनाती मिशन की प्रभावशीलता कमजोर कर सकती है।
भारत ने मांग की कि सुरक्षा परिषद किसी शांति अभियान के दायित्व तय करने या उनकी समीक्षा से पहले सैनिक और पुलिसकर्मी भेजने वाले देशों के साथ नियमित, संस्थागत परामर्श करे। इससे कर्मियों की तैनाती, सुरक्षा और परिचालन जिम्मेदारियों से जुड़े फैसलों में योगदान देने वाले देशों की सार्थक भागीदारी सुनिश्चित हो सकेगी।
कर्नल सिंह ने कहा कि शांति सैनिकों के सामने सुरक्षा संबंधी चुनौतियां अधिक जटिल हो गई हैं। अब उन्हें गैर-पारंपरिक और तकनीक की मदद से पैदा किए जा रहे खतरों का भी सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने दोहराया कि शांति सैनिकों पर हमले करने वाले व्यक्तियों और समूहों की जवाबदेही तय होनी चाहिए।
इस संदर्भ में उन्होंने अगस्त 2021 में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का प्रस्ताव 2589 पारित कराने में भारत की अग्रणी भूमिका का उल्लेख किया। यह प्रस्ताव संयुक्त राष्ट्र शांति सैनिकों के खिलाफ अपराधों के लिए जवाबदेही तय करने पर केंद्रित है।
भारत ने शांति अभियानों को जरूरत और उपयोगिता के आधार पर सुव्यवस्थित करने की भी वकालत की। कर्नल सिंह ने कहा कि जिन अभियानों को जारी रखने का स्पष्ट परिचालन आधार नहीं है, वे बहुमूल्य संसाधन खर्च करते हैं और संयुक्त राष्ट्र की विश्वसनीयता को कमजोर कर सकते हैं। हर मिशन के उद्देश्य स्पष्ट होने चाहिए और उन्हें हासिल करने के लिए जरूरी क्षमताएं भी उपलब्ध होनी चाहिए।
उन्होंने शांति अभियानों में उन्नत तकनीक और नवीकरणीय ऊर्जा के समाधानों को तेजी से अपनाने का आह्वान किया। इससे परिचालन दक्षता बढ़ सकती है, जमीनी हालात की बेहतर जानकारी मिल सकती है और कठिन तैनाती क्षेत्रों में रसद संबंधी परेशानियां कम हो सकती हैं।
महिला शांति सैनिकों के योगदान का उल्लेख करते हुए कर्नल सिंह ने बताया कि भारत 1960 से महिलाओं को शांति अभियानों में तैनात कर रहा है। वर्ष 2007 में भारत ने लाइबेरिया में संयुक्त राष्ट्र की पहली पूरी तरह महिला कर्मियों वाली गठित पुलिस इकाई तैनात की थी।
भारत ने यह भी स्पष्ट किया कि 2028–2029 के कार्यकाल के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अस्थायी सदस्यता की उसकी दावेदारी में शांति अभियानों को मजबूत करना प्राथमिकता रहेगा। कर्नल सिंह ने अधिक संसाधनों, बेहतर सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के व्यापक प्रतिनिधित्व वाली शांति व्यवस्था के प्रति भारत का समर्थन दोहराया।