पटियाला पुलिस ने भारतीय सेना के एक बर्खास्त सिपाही और उसके एक कथित सहयोगी को गिरफ्तार कर सात पिस्तौल और 23 जिंदा कारतूस बरामद किए हैं। अधिकारियों के अनुसार यह कार्रवाई लॉरेंस बिश्नोई गिरोह के एक ऐसे मॉड्यूल का भंडाफोड़ है, जो कथित तौर पर एक लक्षित अपराध की योजना बना रहा था।
अपराध अन्वेषण एजेंसी की टीम ने सोमवार, 28 सितंबर 2026 को साधू बेला रोड पर तेजिंदर सिंह उर्फ फौजी, 32, निवासी दौन कलां गांव, और राहुल उर्फ डाना, 21, निवासी हरिदास कॉलोनी, नाभा, को रोका। यह कार्रवाई पंजाब पुलिस के “गैंगस्टरों के खिलाफ युद्ध” अभियान का हिस्सा थी। पुलिस को विशेष सूचना मिली थी कि दोनों अवैध हथियारों के साथ घूम रहे हैं।
तलाशी में छह .32 बोर पिस्तौल के साथ 19 जिंदा कारतूस और एक .30 बोर पिस्तौल के साथ चार जिंदा कारतूस बरामद किए गए। इसके बाद अर्बन एस्टेट थाने में शस्त्र अधिनियम की धारा 25, 54 और 59 के तहत मामला दर्ज किया गया। स्थानीय अदालत ने मंगलवार को दोनों आरोपियों को पुलिस हिरासत में भेज दिया।
निरीक्षक सिमरजीत सिंह शेरगिल ने छापेमारी का नेतृत्व किया, जबकि इसकी निगरानी पुलिस अधीक्षक (शहर) मोहित कुमार अग्रवाल और उप पुलिस अधीक्षक (जांच) गुरवीर सिंह ने की। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक हरमंदिप सिंह हंस ने कहा कि जांचकर्ता हथियारों के स्रोत, संचार संबंधों और संभावित लक्ष्य की पड़ताल कर रहे हैं।
आरोपी और कथित गिरोह से संबंध
पुलिस ने तेजिंदर सिंह की पहचान भारतीय सेना की 152 सिख रेजिमेंट के पूर्व सिपाही के रूप में की है, जिसे सेवा से बर्खास्त किया जा चुका है। उसके खिलाफ हत्या, हत्या के प्रयास, दंगा और हथियारों की तस्करी से जुड़े 10 मामले दर्ज हैं। उसका नाम अप्रैल 2022 में दौन कलां स्थित कबड्डी क्लब के अध्यक्ष धर्मिंदर सिंह भिंडा, 30, की हत्या में भी आया था। भिंडा की पीटरोल पंप के बाहर, पंजाबी विश्वविद्यालय, पटियाला के पास गोली मारकर हत्या कर दी गई थी, जब वह कथित तौर पर छात्र समूहों के बीच झगड़ा सुलझाने की कोशिश कर रहा था। तेजिंदर को उस मामले में मई 2026 में जमानत मिली थी।
अधिकारियों के अनुसार तेजिंदर ने बिश्नोई नेटवर्क के विदेश में बैठे संचालकों से सीधे संपर्क किया था और जेल में बंद अपराधियों के साथ मिलकर हथियार जुटाने तथा हमलों की योजना बनाने में समन्वय किया था। राहुल को दैनिक मजदूरी करने वाला व्यक्ति बताया गया है, जिसका पहले कोई खास आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। उसे कथित तौर पर संदेशवाहक और रसद में मदद करने वाला सहयोगी बनाया गया था।
जांचकर्ता आरोपियों से पूछताछ जारी रखे हुए हैं, ताकि मॉड्यूल की पूरी भूमिका, हथियारों के स्रोत और संभावित लक्ष्य का पता लगाया जा सके। पुलिस को संदेह है कि इन हथियारों का इस्तेमाल विदेश से संचालित बिश्नोई नेटवर्क की ओर से निर्देशित लक्षित हमलों में किया जाना था।
लॉरेंस बिश्नोई गिरोह के मुख्य सरगना के जेल में होने के बावजूद इस सिंडिकेट को कई राज्यों में कानून-प्रवर्तन एजेंसियों ने वसूली, सुपारी हत्याओं और अवैध हथियार आपूर्ति से जोड़ा है। पंजाब पुलिस ने पटियाला में हुई इस बरामदगी को ऐसे मॉड्यूलों को जमीनी स्तर पर ध्वस्त करने के व्यापक प्रयास का हिस्सा बताया है।