भारतीय वायु सेना के पूर्वी वायु कमान के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ एयर मार्शल आई. एस. वालिया ने 11 और 12 जुलाई 2026 को क्रमशः मणिपुर और नागालैंड के राज्यपालों से अलग-अलग उच्चस्तरीय मुलाकात की। यह संवाद पूर्वी क्षेत्र में नागरिक-सैन्य समन्वय को मजबूत करने और सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के प्रयासों का हिस्सा था।
11 जुलाई को मणिपुर के राज्यपाल श्री अजय कुमार भल्ला ने एयर मार्शल आई. एस. वालिया से क्षेत्र से जुड़े रणनीतिक महत्व के मुद्दों पर चर्चा की। बातचीत में राज्य प्रशासन और भारतीय वायु सेना के बीच सहयोग बढ़ाने, बेहतर तालमेल विकसित करने और पूर्वी क्षेत्र में उभरती सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए समन्वय मजबूत करने के उपायों पर विचार किया गया।
इन चर्चाओं में क्षेत्रीय घटनाक्रम की भी समीक्षा की गई और नागरिक अधिकारियों तथा सशस्त्र बलों के बीच घनिष्ठ सहयोग के महत्व पर जोर दिया गया। परिचालन तैयारी बनाए रखने, स्थिरता सुनिश्चित करने तथा आपात स्थितियों और अन्य आकस्मिक परिस्थितियों में प्रभावी प्रतिक्रिया देने में संस्थागत सहयोग की भूमिका को दोनों पक्षों ने रेखांकित किया।
अपनी अगली बैठक में एयर मार्शल आई. एस. वालिया ने 12 जुलाई को नागालैंड के राज्यपाल श्री नंद किशोर यादव से मुलाकात की। इस बातचीत में पूर्वी क्षेत्र में समन्वय, मजबूती और सुरक्षा बढ़ाने की साझा प्रतिबद्धता दोहराई गई। बैठक ने रणनीतिक महत्व के मामलों पर भारतीय वायु सेना और राज्य नेतृत्व के बीच निरंतर संवाद के महत्व को भी सामने रखा।
नागालैंड के राज्यपाल के साथ हुई चर्चा में यह बात उभरी कि उभरती चुनौतियों से निपटने और पूर्वोत्तर में राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए नागरिक प्रशासन और सशस्त्र बलों के बीच सहयोग जारी रहना चाहिए। दोनों पक्षों ने शांति और सुरक्षा बनाए रखने में लचीलापन, प्रभावी संवाद और संयुक्त योजना की अहम भूमिका को स्वीकार किया।
इन मुलाकातों ने पूर्वी वायु कमान की इस निरंतर प्राथमिकता को दर्शाया कि वह पूर्वोत्तर के विभिन्न राज्यों की सरकारों के साथ मजबूत नागरिक-सैन्य साझेदारी को बढ़ावा देती रहे। ऐसे संवाद परस्पर कार्यक्षमता बढ़ाने, संकट प्रतिक्रिया तंत्र को सुधारने और मानवीय सहायता, आपदा राहत अभियानों तथा सुरक्षा संबंधी आकस्मिक परिस्थितियों में बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभाते हैं।
पूर्वी वायु कमान भारत की पूर्वी और उत्तर-पूर्वी सीमाओं पर हवाई रक्षा और परिचालन क्षमता का एक महत्वपूर्ण अंग बनी हुई है। राज्य प्रशासन और अन्य हितधारकों के साथ नियमित संवाद के माध्यम से यह कमान क्षेत्रीय सुरक्षा, परिचालन तत्परता और राष्ट्रीय लचीलापन को सुदृढ़ करने के लिए सहयोगात्मक ढांचे को लगातार मजबूत कर रही है।