राजकोट के गांधीनगर-2 (विश्वविद्यालय) पुलिस थाने ने एक व्यक्ति के खिलाफ मामला दर्ज किया है। उस पर आरोप है कि उसने भारतीय वायु सेना में नौकरी दिलाने का झांसा देकर अपने बचपन के मित्र और चार अन्य लोगों से 16 लाख रुपये की ठगी की।
आरोप है कि व्यक्ति ने वायु सेना के अधिकारी के रूप में खुद को पेश किया और करीब दो महीने में यह रकम वसूली। बताया गया है कि उसने दो दशक बाद अपने मुख्य शिकायतकर्ता से फिर संपर्क किया और उसके बाद यह ठगी की गई।
प्राथमिकी के अनुसार, शिकायतकर्ता अर्जुनसिंह जाडेजा, उम्र 40 वर्ष, कालावड रोड के निवासी हैं और शिव ट्रैवल्स नाम से कारोबार चलाते हैं। उन्हें 8 जून को उनके बचपन के मित्र प्रगनेश गढ़वी का फोन आया। दोनों के बीच कम से कम 20 साल से संपर्क नहीं था।
आरोप है कि गढ़वी ने खुद को गांधीनगर में वायु सेना में प्राचार्य बताया और जाडेजा के लिए ड्राइवर की नौकरी दिलाने की बात कही। इसके बदले उसने पैसे मांगे। जाडेजा ने इस पर सहमति जताई और नौकरी की तलाश करने वाले अपने रिश्तेदारों तथा परिचितों से भी पैसे जुटाए।
अगले दो महीनों में कुल 16 लाख रुपये आरोपी को दिए गए। इसमें 12.30 लाख रुपये ऑनलाइन लेनदेन के जरिए और 3.70 लाख रुपये नकद दिए गए। इस राशि में जाडेजा के चार परिचितों का योगदान भी शामिल था, जिससे कथित पीड़ितों की संख्या पांच हो गई।
धोखाधड़ी को बनाए रखने के लिए गढ़वी ने कथित तौर पर जाडेजा को व्हाट्सऐप के जरिए एक फर्जी इलेक्ट्रॉनिक कॉल लेटर भेजा। जब नौकरी नहीं मिली और जाडेजा ने पैसे लौटाने की मांग की, तो आरोपी बहाने बनाने लगा।
बाद में जाडेजा को पता चला कि गढ़वी को अहमदाबाद में एक अन्य वित्तीय विवाद के मामले में पुलिस ने हिरासत में लिया था। तब उन्हें समझ आया कि गढ़वी का भारतीय वायु सेना से कोई वास्तविक संबंध नहीं था और कॉल लेटर भी फर्जी था। इसके बाद उन्होंने पुलिस से संपर्क किया।
पुलिस ने प्रगनेश गढ़वी के खिलाफ ठगी, व्यक्ति बनकर ठगी करने, जालसाजी और लोक सेवक का रूप धारण करने के आरोप में मामला दर्ज किया है। आगे की जांच जारी है, ताकि लेनदेन के पूरे सिलसिले का पता लगाया जा सके और यह भी देखा जा सके कि और पीड़ित तो नहीं हैं।
कथित ठगी कैसे सामने आई
यह मामला भरोसे का दुरुपयोग कर की गई ठगी का उदाहरण है। लंबे समय बाद फिर संपर्क स्थापित होने पर आरोपी ने बचपन की मित्रता का फायदा उठाया और विश्वसनीयता बनाने की कोशिश की।
गांधीनगर में वायु सेना का प्राचार्य होने का दावा और ड्राइवर की नौकरी का प्रस्ताव देकर उसने यह आभास दिया कि उसके पास अंदरूनी पहुंच है। इसके बाद व्हाट्सऐप पर फर्जी कॉल लेटर भेजकर कथित प्रक्रिया को आधिकारिक दिखाने की कोशिश की गई।
जाडेजा द्वारा रिश्तेदारों और परिचितों से पैसा जुटाने से कथित ठगी का दायरा बढ़ गया। भर्ती से जुड़े ऐसे मामलों में अक्सर सामूहिक भुगतान किया जाता है, क्योंकि इच्छुक लोग या उनके परिवार सरकारी या रक्षा क्षेत्र की नौकरी पाने के लिए प्रभाव या संपर्क के दावों पर भरोसा कर लेते हैं।
रक्षा क्षेत्र की नौकरी से जुड़े धोखाधड़ी के मामले
भारतीय सशस्त्र बलों से जुड़ी फर्जी नौकरी पेशकशें देश के कई हिस्सों में बार-बार सामने आती रही हैं। सेना, नौसेना और वायु सेना में नौकरी की प्रतिष्ठा, स्थिरता और लाभों के कारण बेरोजगार युवा और उनके परिवार अक्सर ऐसे लोगों के झांसे में आ जाते हैं, जो भर्ती बोर्ड, एसएसबी साक्षात्कार या सीधे नियुक्ति तक विशेष पहुंच का दावा करते हैं।
ऐसे ठग फर्जी कॉल लेटर, प्रवेश पत्र, नियुक्ति पत्र, वर्दी या पत्राचार के कागजों का उपयोग करते हैं और प्रक्रिया शुल्क, सुरक्षा जमा, प्रशिक्षण खर्च या प्रभाव के नाम पर पैसा मांगते हैं। भारतीय वायु सेना में भर्ती केवल आधिकारिक माध्यमों से ही होती है, जिनमें उसकी आधिकारिक वेबसाइट, संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षाएं, अग्निवीर वायु प्रवेश और अधिकृत चयन प्रक्रियाएं शामिल हैं।
प्राइवेट व्यक्ति, प्राचार्य या बिचौलिये द्वारा पैसे लेकर नौकरी “पक्की” कराने की कोई व्यवस्था नहीं है। ऐसे किसी भी दावे को खतरे की घंटी मानना चाहिए। पुलिस और रक्षा अधिकारी समय-समय पर इस तरह के गिरोहों के खिलाफ सावधानी बरतने की सलाह देते रहे हैं।
उम्मीदवारों और परिवारों के लिए सावधानी
एनडीए, सीडीएस, एएफसीएटी, अग्निवीर या अन्य प्रवेशों की तैयारी करने वाले उम्मीदवारों को यह याद रखना चाहिए कि सभी वास्तविक भर्ती सूचनाएं, प्रवेश पत्र और परिणाम केवल आधिकारिक वेबसाइटों या अधिकृत पोर्टल पर ही जारी किए जाते हैं। कोई भी व्यक्ति पैसे लेकर चयन की गारंटी नहीं दे सकता और न ही चयन प्रक्रिया को दरकिनार कर सकता है।
अज्ञात व्यक्ति द्वारा नौकरी का दावा करने पर मूल दस्तावेज साझा न करें, नकद या ऑनलाइन भुगतान न करें और व्हाट्सऐप संदेशों पर बिना स्वतंत्र सत्यापन के भरोसा न करें। ऐसे प्रस्ताव मिलने पर तुरंत स्थानीय पुलिस या साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत करें और सभी संवाद, लेनदेन विवरण तथा स्क्रीनशॉट सुरक्षित रखें।
राजकोट का यह मामला दिखाता है कि लंबे समय के व्यक्तिगत संबंधों का भी दुरुपयोग किया जा सकता है, खासकर तब जब उन्हें रक्षा करियर के आकर्षण से जोड़ा जाए। जांच जारी रहने के साथ अधिकारी आरोपी से जुड़े वित्तीय लेनदेन और किसी व्यापक नेटवर्क की भी पड़ताल कर रहे हैं।