नई दिल्ली, 13 अक्टूबर 2026: ईएमई स्कूल, वडोदरा के कैप्टन शुभम कुमार ने भारतीय सेना को गौरवान्वित करते हुए भारतीय सेना टेरियर साइबरक्वेस्ट 2026 के एआई कवच ग्रैंड फिनाले में दूसरा स्थान हासिल किया है। यह राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता साइबर सुरक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और उभरती रक्षा प्रौद्योगिकियों पर केंद्रित थी।
इस प्रतियोगिता का आयोजन प्रादेशिक सेना ने साइबरपीस फाउंडेशन और जोहो के सहयोग से किया था। इसमें देशभर के प्रतिभागियों ने ऐसी नवोन्मेषी तकनीकी समाधानों को प्रस्तुत किया, जिनका उद्देश्य साइबर सुरक्षा और रक्षा क्षमताओं को मजबूत करना था।
ईएमई स्कूल, वडोदरा का प्रतिनिधित्व करते हुए कैप्टन शुभम कुमार ने भारतभर की टीमों के खिलाफ व्यक्तिगत रूप से प्रतिस्पर्धा की और नई दिल्ली स्थित यूनाइटेड सर्विस इंस्टीट्यूशन ऑफ इंडिया में आयोजित एआई कवच ग्रैंड फिनाले में उपविजेता स्थान प्राप्त किया।
इस प्रतियोगिता में 8,200 से अधिक पंजीकरण हुए, जो कृत्रिम बुद्धिमत्ता, साइबर सुरक्षा और रक्षा क्षेत्र में उन्नत तकनीकी अनुप्रयोगों के बढ़ते आकर्षण को दर्शाता है।
कैप्टन कुमार ने अपने नवोन्मेषी प्रोजेक्ट रक्षाःएआई के माध्यम से विशेष पहचान बनाई। यह एक स्वायत्त कृत्रिम बुद्धिमत्ता-आधारित साइबर रक्षा प्रणाली है, जिसे साइबर सुरक्षा अनुप्रयोगों के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। उनकी इस प्रस्तुति ने प्रतिस्पर्धी प्रविष्टियों में अपनी जगह बनाई और उन्हें इस प्रतिष्ठित आयोजन में दूसरा स्थान दिलाया।
यह उपलब्धि उभरते क्षेत्रों जैसे कृत्रिम बुद्धिमत्ता और साइबर रक्षा में भारतीय सेना के अधिकारियों की बढ़ती तकनीकी दक्षता और नवोन्मेषी क्षमता को दर्शाती है। यह बदलती साइबर सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए स्वदेशी तकनीकी समाधानों के विकास के महत्व को भी रेखांकित करती है।
कैप्टन कुमार की यह सफलता विशेष रूप से कोर ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड मैकेनिकल इंजीनियर्स, यानी ईएमई, के लिए महत्वपूर्ण है, जो भारतीय सेना की तकनीकी क्षमताओं को बनाए रखने, समर्थन देने और आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाता है।
यह उपलब्धि आर्मी ट्रेनिंग कमांड, यानी आर्ट्रैक, की उन चल रही पहलों के भी अनुरूप है, जिनका उद्देश्य सैन्य प्रशिक्षण और संचालनगत तैयारी में विशिष्ट तथा उभरती प्रौद्योगिकियों के एकीकरण को प्रोत्साहित करना है।
जैसे-जैसे आधुनिक युद्ध में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, स्वायत्त प्रणालियों और साइबर अभियानों की भूमिका बढ़ रही है, टेरियर साइबरक्वेस्ट जैसे प्रयास सशस्त्र बलों के भीतर नवोन्मेषी समाधानों की पहचान और तकनीकी प्रतिभा को प्रोत्साहित करने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान करते हैं।
कैप्टन शुभम कुमार की यह उपलब्धि भारतीय सेना के नवाचार, तकनीकी आत्मनिर्भरता और अपने कर्मियों को भविष्य के युद्ध की चुनौतियों के लिए तैयार करने पर दिए जा रहे जोर को भी दर्शाती है।