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डिफेन्स न्यूज़

जनरल धीरज सेठ ने भविष्य के युद्धों के लिए ‘SAMARTH’ दृष्टि का अनावरण किया

SSBCrack News Desk
Last updated: सितम्बर 28, 2026 9:57 पूर्वाह्न
SSBCrack News Desk
Published: सितम्बर 28, 2026
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General Dhiraj Seth Unveils ‘SAMARTH’ Vision for Future Wars

नई दिल्ली, 28 सितंबर 2026 — थल सेनाध्यक्ष जनरल धीरज सेठ ने रविवार को भारतीय सेना की लंबे समय तक चलने वाले और प्रौद्योगिकी-आधारित संघर्षों के लिए परिचालन तैयारियों को मजबूत करने के उद्देश्य से सात सूत्रीय ढांचा ‘समर्थ’ पेश किया। एनडीटीवी डिफेंस समिट 2026 में बोलते हुए उन्होंने कहा कि आधुनिक युद्धों में मुठभेड़ें भले छोटी हों, लेकिन युद्ध जरूरी नहीं कि छोटे हों, इसलिए बल को ऐसे युग के लिए सहनशक्ति, अनुकूलनशीलता और प्रौद्योगिकीय बढ़त विकसित करनी होगी, जिसे उन्होंने “परिवर्तनकारी युद्ध” कहा।

“परिवर्तनकारी युद्धों के युग में आत्मनिर्भरता” शीर्षक वाला यह संबोधन 27 सितंबर को आयोजित एकदिवसीय संगोष्ठी में दिया गया। 30 जून 2026 को 31वें थल सेनाध्यक्ष के रूप में कार्यभार संभालने वाले जनरल सेठ ने ‘समर्थ’ को क्षमता विकास की एक व्यावहारिक अभिव्यक्ति बताया। उन्होंने कहा कि इस हिंदी शब्द का अर्थ “सक्षम” होता है। इसके प्रत्येक अक्षर का अलग महत्व है।

एस का अर्थ है दीर्घकाल तक चलने वाले संघर्षों को झेलने की क्षमता, ए का अर्थ है बदलते खतरों से तेज़ी से अनुकूलन, एम का अर्थ है आधुनिकीकऱण, दूसरा ए क्षमता के प्रयोग को तेज़ करने और विरासत प्रणालियों के साथ नई प्रौद्योगिकी को जोड़ने, आर का अर्थ है लचीलापन, टी का अर्थ है प्रौद्योगिकी, जिसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता, स्वायत्त प्रणालियाँ, रोबोटिक्स और ड्रोन शामिल हैं, और एच का अर्थ है मानव-मशीन समन्वय।

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जनरल सेठ ने कहा कि प्रौद्योगिकी को हमारे सैनिकों को अधिक तेज़, बेहतर सूचित और अधिक प्रभावी बनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इससे उन्हें बेहतर निर्णय लेने में मदद मिलनी चाहिए। उनके अनुसार, ‘समर्थ’ का यही अर्थ है कि बल सक्षम हो, उसमें सहनशक्ति हो, अनुकूलन की क्षमता हो और वह इस परिवर्तनकारी युद्धों के युग में दूसरों से आगे बना रहे। उन्होंने यह भी कहा कि क्षमता-विकास चक्र अक्सर प्रौद्योगिकी चक्र से पीछे रह जाता है, इसलिए ‘समर्थ’ जैसी सोच आवश्यक है।

थल सेनाध्यक्ष ने समकालीन संघर्षों को “रुक-रुक कर होने वाले युद्ध” बताया। उन्होंने कहा कि प्रौद्योगिकी व्यक्तिगत मुठभेड़ों की अवधि कम कर देती है, लेकिन कुल मिलाकर युद्धों का कोई स्पष्ट अंत नहीं दिखता और वे तीव्रता में बदलाव के साथ चलते रहते हैं। उन्होंने इस प्रवृत्ति की तुलना पहले के युद्धों से की, जिनका अंत ढाका में 1971 के आत्मसमर्पण जैसी स्पष्ट घटना से होता था। उन्होंने चेतावनी दी कि किसी विराम को शत्रुता का अंत नहीं समझना चाहिए।

सूचना अभियानों और सोशल मीडिया की “मुठभेड़ों” के बीच, जो स्थिति की तस्वीर को धुंधला कर सकते हैं, जनरल सेठ ने कहा कि एक बात स्थिर रहती है और वह है भूमि। उन्होंने कहा कि विजय हमेशा क्षेत्रीय शब्दों में मापी गई है, मापी जाती है और आगे भी मापी जाएगी, और उस क्षेत्र पर कब्ज़ा, सुरक्षा और रक्षा केवल बल द्वारा ही की जाएगी। उन्होंने कहा कि हर नई क्षमता को एक ही सवाल का जवाब देना चाहिए कि वह उस सैनिक, उस योद्धा, की कैसे मदद करती है जो जमीन पर बूट या ट्रैक के साथ मौजूद है। भारत के विविध भूभाग और खतरे के स्वरूप को देखते हुए, उन्होंने कहा कि “एक ही तरीका सभी के लिए उपयुक्त नहीं होता”; सेना को व्यापक पहुँच और शक्ति, दोनों की आवश्यकता है।

आत्मनिर्भरता उनके संबोधन का एक केंद्रीय विषय रही। जनरल सेठ ने कहा कि जब संकट लंबा खिंचता है, तब आत्मनिर्भरता विजेता और पराजित के बीच अंतर तय करेगी। उन्होंने इसे बाहरी आपूर्ति शृंखलाओं पर निर्भर हुए बिना टिके रहने की क्षमता बताया। उनके अनुसार, आत्मनिर्भरता का अर्थ भारत में डिजाइन, भारत में विकास, भारत में निर्माण, भारत में संधारण, भारत में उन्नयन और दुनिया के लिए निर्माण होना चाहिए। उन्होंने “स्वदेशी अप्रासंगिकता” के खतरे की ओर भी इशारा किया, यानी ऐसे तंत्र जो देश में विकसित तो किए जाएँ, लेकिन उपयोग में लाने से पहले ही पुराने पड़ जाएँ। उन्होंने ऐसी आत्मनिर्भरता की आवश्यकता पर बल दिया जो गतिशील हो और निरंतर उन्नत होती रहे। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर योद्धा को क्षमता विकास के केंद्र में रहना चाहिए।

‘समर्थ’ की यह परिकल्पना उन ‘विजय’ प्राथमिकताओं के पूरक के रूप में आई है, जिन्हें जनरल सेठ ने जुलाई में कार्यभार संभालने के बाद घोषित किया था। इनमें सतर्कता, नवाचार और परिवर्तन, संयुक्तता और एकीकरण, आत्मनिर्भरता तथा योद्धा प्रथम शामिल हैं। यह ढांचा व्यापक परिवर्तन दशक और स्वदेशी समाधानों पर राष्ट्रीय जोर के साथ भी मेल खाता है। इन सभी पहलों का उद्देश्य ऐसे सैनिक-केंद्रित, प्रौद्योगिकी-सक्षम बल को तैयार करना है, जो तेज़ बहु-क्षेत्रीय संघर्षों के साथ-साथ लंबे समय तक चलने वाले युद्ध में भी टिके रहने में सक्षम हो।

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SSBCrack की संपादकीय टीम में अनुभवी पत्रकार, पेशेवर कंटेंट लेखक और समर्पित रक्षा अभ्यर्थी शामिल हैं, जिन्हें सैन्य मामलों, राष्ट्रीय सुरक्षा और भू-राजनीति का गहरा ज्ञान है।
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