भारत की समुद्री सुरक्षा बलों में लैंगिक समानता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए रक्षा मंत्रालय ने मंगलवार को भारतीय तटरक्षक बल में महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन देने की मंजूरी दे दी। नई दिल्ली में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इन नीति सुधारों की घोषणा की, जिसके साथ यह बल वर्षों बाद सेना, नौसेना और भारतीय वायु सेना की पंक्ति में आ गया है।
सरकार ने दो बड़े नीतिगत बदलावों की घोषणा की है। पहला, अधिकारियों की नियुक्ति के लिए लैंगिक-तटस्थ ढांचा लागू किया गया है। अब महिला उम्मीदवारों को अल्पकालिक सेवा नियुक्ति और स्थायी नियुक्ति, दोनों में पुरुषों के समान शर्तों पर शामिल किया जा सकेगा। साथ ही, अल्पकालिक सेवा नियुक्ति का रास्ता पुरुष उम्मीदवारों के लिए भी खोल दिया गया है।
इस नीति के तहत प्रारंभिक प्रशिक्षण चरण से ही करियर में समान अवसर सुनिश्चित किए गए हैं। स्थायी नियुक्ति पर कार्यरत मौजूदा महिला अधिकारी निर्धारित मानदंड पूरे करने पर उच्च रैंकों में पदोन्नति की पात्र होंगी। वहीं, अल्पकालिक सेवा नियुक्ति पर तैनात महिला अधिकारियों को भी तय शर्तें पूरी करने पर स्थायी नियुक्ति में बदलने का विकल्प मिलेगा।
रक्षा मंत्रालय ने कहा कि यह प्रगतिशील कदम नारी शक्ति और देश की समुद्री सुरक्षा व्यवस्था में समान अवसर के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
पृष्ठभूमि और सर्वोच्च न्यायालय का दबाव
इस निर्णय से पहले भारतीय तटरक्षक बल ही ऐसा प्रमुख वर्दीधारी बल था, जिसकी नीति के तहत महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन नहीं दिया जाता था। सेना, नौसेना और वायु सेना में 2020 में सर्वोच्च न्यायालय के ऐतिहासिक निर्णयों के बाद स्थायी करियर मार्ग पहले ही खोल दिए गए थे। ये फैसले बबिता पुनिया और एनी नगराजा मामलों में आए थे, जिनमें शारीरिक तर्कों को लैंगिक रूढ़ियों के रूप में खारिज किया गया था।
तटरक्षक बल की इस स्थिति को लेकर सर्वोच्च न्यायालय ने भी कड़ी टिप्पणी की थी। 2024 में तत्कालीन प्रधान न्यायाधीश डी. वाई. चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने कमांडेंट प्रियंका त्यागी की याचिका पर सुनवाई की थी, जिन्होंने 14 वर्ष सेवा करने के बाद उन्हें मुक्त किए जाने का मुद्दा उठाया था। अदालत ने भारतीय तटरक्षक बल को अपवाद बताते हुए उसकी “पितृसत्तात्मक सोच” पर सवाल उठाए थे और इस मुद्दे को सरकार के नारी शक्ति संबंधी सार्वजनिक रुख से सीधे जोड़ा था।
सुनवाई के दौरान न्यायाधीशों ने केंद्र से कहा था, “यदि आप नहीं करेंगे, तो हम करेंगे।” उस समय बल में लगभग 1,586 अधिकारियों में महिलाएं केवल करीब 16 थीं। मंगलवार का निर्णय इस असमानता को प्रभावी रूप से समाप्त करता है।
दूसरा सुधार: लापता कर्मियों के परिवारों को त्वरित राहत
स्थायी कमीशन नीति के साथ सरकार ने तटरक्षक बल के उन कर्मियों के परिवारों की कठिनाई कम करने के लिए भी एक नया सुधार लागू किया है, जो परिचालन ड्यूटी के दौरान समुद्र में लापता हो जाते हैं।
नई व्यवस्था के तहत सक्षम प्राधिकारी समुद्र में लापता बताए गए कर्मी को सीमित उद्देश्य के लिए “मृत मान लिया गया” घोषित कर सकेगा, ताकि अनुग्रह राशि और सेवानिवृत्ति लाभ दिए जा सकें। इससे प्रक्रियागत देरी घटने और अनिश्चितता तथा संकट के समय निकट संबंधियों को जल्द वित्तीय सहायता मिलने की उम्मीद है।
व्यापक संदर्भ
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भारतीय तटरक्षक बल की पांच दशकों की सेवा की सराहना की और कहा कि ये सुधार बल की मनोबल और परिचालन प्रभावशीलता को बढ़ाएंगे, क्योंकि यह 2027 में अपना स्वर्ण जयंती वर्ष मनाने की तैयारी कर रहा है। उन्होंने आधुनिक, सक्षम और भविष्य के लिए तैयार तटरक्षक बल के निर्माण की सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई।
ये नीतिगत बदलाव ऐसे समय आए हैं जब महिला अधिकारियों ने पहले ही कठिन परिचालन और नेतृत्व भूमिकाओं में अपनी क्षमता दिखाई है। स्थायी प्रवेश मार्ग खुलने से प्रतिभा का दायरा बढ़ने, प्रशिक्षित महिला अधिकारियों की सेवा में बने रहने की संभावना मजबूत होने और भारत के विस्तृत तटीय क्षेत्र में तटीय सुरक्षा, खोज एवं बचाव तथा समुद्री कानून-प्रवर्तन की जिम्मेदारी निभाने वाले बल की समग्र कार्यक्षमता में सुधार की उम्मीद है।
इन सुधारों के साथ भारतीय तटरक्षक बल सीमित अल्पकालिक अवसरों से आगे बढ़कर पूर्ण करियर समानता की दिशा में आ गया है। इससे लैंगिक-तटस्थ स्थायी कमीशन के मुद्दे पर यह बल अब सशस्त्र बलों के बाकी हिस्सों के साथ एकरूप हो गया है।